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अंजू जैन: 73 अंतरराष्ट्रीय मैच, अर्जुन अवॉर्ड और पिता की शर्त को चैलेंज में बदलने वाली विकेटकीपर

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अंजू जैन: 73 अंतरराष्ट्रीय मैच, अर्जुन अवॉर्ड और पिता की शर्त को चैलेंज में बदलने वाली विकेटकीपर

सारांश

बल्लेबाज बनने का सपना, पर टीम की ज़रूरत पर विकेटकीपिंग संभाली — अंजू जैन का सफर संयोग से शुरू हुआ और समर्पण से महान बना। 73 अंतरराष्ट्रीय मैच, अर्जुन अवॉर्ड और कोचिंग तक का यह सफर भारतीय महिला क्रिकेट की एक अनकही ताकत की दास्तान है।

मुख्य बातें

अंजू जैन का जन्म 11 अगस्त 1974 को दिल्ली में हुआ; उन्होंने भारत के लिए कुल 73 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले।
टेस्ट में 8 मैचों में 441 रन ( 36.75 औसत, 1 शतक, 3 अर्धशतक ); वनडे में 65 मैचों में 1,729 रन ( 29.81 औसत, 12 अर्धशतक )।
विकेटकीपर के रूप में 59 स्टंपिंग और 45 कैच दर्ज।
2005 में अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित; भारतीय महिला क्रिकेट चयन समिति की चेयरपर्सन रहीं।
बतौर कोच बांग्लादेश महिला क्रिकेट टीम और WPL में सेवाएँ दीं।

भारतीय महिला क्रिकेट की पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज अंजू जैन ने 73 अंतरराष्ट्रीय मैचों में अपनी तकनीक, अनुशासन और टीम-प्रथम सोच से एक ऐसी विरासत छोड़ी, जो महज आँकड़ों से कहीं बड़ी है। 11 अगस्त 1974 को दिल्ली में जन्मीं अंजू ने न केवल मैदान पर भारत का प्रतिनिधित्व किया, बल्कि बाद में कोच और चयन समिति की चेयरपर्सन के रूप में भी महिला क्रिकेट को दिशा दी।

पिता की शर्त से शुरू हुई क्रिकेट की राह

अंजू को बचपन से क्रिकेट का जुनून था, लेकिन परिवार ने खेल के साथ पढ़ाई को भी अनिवार्य कर दिया। पिता ने स्पष्ट कह दिया था कि यदि वे परीक्षा में अनुत्तीर्ण हुईं, तो क्रिकेट पर रोक लग जाएगी। अंजू ने इस शर्त को दबाव नहीं, बल्कि चुनौती माना और खेल व पढ़ाई दोनों में संतुलन बनाए रखा। यह अनुशासन उनके पूरे करियर की नींव बना।

विकेटकीपिंग: पसंद नहीं, ज़िम्मेदारी थी

दिलचस्प बात यह है कि विकेटकीपिंग अंजू की पहली पसंद कभी नहीं रही — वह एक बल्लेबाज बनना चाहती थीं। लेकिन जब दिल्ली की जूनियर टीम में कोई विकेटकीपर उपलब्ध नहीं था, तो उन्होंने यह जिम्मेदारी स्वीकार की। यही टीम-प्रथम सोच आगे चलकर उनकी पहचान बनी। घरेलू क्रिकेट में उन्होंने दिल्ली और एयर इंडिया का प्रतिनिधित्व किया।

अंतरराष्ट्रीय करियर के आँकड़े

1995 से 2003 के बीच अंजू ने भारत के लिए 8 टेस्ट मैच खेले। 12 पारियों में उन्होंने 36.75 की औसत से 441 रन बनाए, जिसमें 1 शतक और 3 अर्धशतक शामिल रहे। वनडे क्रिकेट में 1993 से 2005 के बीच उन्होंने 65 मैचों में 29.81 की औसत से 1,729 रन बनाए और 12 अर्धशतक जड़े। विकेट के पीछे भी उनका रिकॉर्ड प्रभावशाली रहा — 59 स्टंपिंग और 45 कैच उनके नाम दर्ज हैं।

बल्लेबाज़ी शैली और खासियत

अंजू दाएं हाथ की बल्लेबाज थीं और उन्हें 'मिड-ऑफ' तथा 'मिड-विकेट' के बीच 'वी' आकार के क्षेत्र में खेलना पसंद था। वह हवाई शॉट लगाने से भी नहीं हिचकती थीं और अपने दौर में गेंद पर आक्रामक प्रहार के लिए जानी जाती थीं।

करियर के बाद का योगदान

मैदान के बाहर भी अंजू जैन का योगदान उल्लेखनीय रहा। उन्हें 2005 में अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया — भारतीय खेल जगत का यह प्रतिष्ठित सम्मान उनके करियर की मान्यता है। वे भारतीय महिला क्रिकेट टीम की चयन समिति की चेयरपर्सन भी रहीं। बतौर कोच उन्होंने बांग्लादेश महिला क्रिकेट टीम को प्रशिक्षित किया और विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) में भी खिलाड़ियों को कोचिंग दी। अंजू जैन का सफर यह साबित करता है कि परिस्थिति चाहे जो हो, आत्मविश्वास और निरंतर मेहनत से लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न बड़े अनुबंध — फिर भी उन्होंने 73 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले और बाद में चयनकर्ता व कोच के रूप में अगली पीढ़ी को तैयार किया। यह उस पीढ़ी की अनदेखी विरासत है जिसने WPL और महिला IPL की नींव रखी। गौरतलब है कि विकेटकीपिंग उनकी पहली पसंद नहीं थी — उन्होंने टीम की ज़रूरत पर अपनी प्राथमिकता छोड़ी, जो आज के युग में दुर्लभ है। उनका सफर इस बात की याद दिलाता है कि भारतीय महिला क्रिकेट की मौजूदा सफलता कई ऐसे नामों के त्याग पर टिकी है जो सुर्खियों से दूर रहे।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंजू जैन कौन हैं और क्रिकेट में उनका क्या योगदान है?
अंजू जैन भारतीय महिला क्रिकेट की पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं, जिन्होंने 1993 से 2005 के बीच भारत के लिए 73 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। वे बाद में चयन समिति की चेयरपर्सन और बांग्लादेश महिला टीम की कोच भी रहीं।
अंजू जैन के अंतरराष्ट्रीय करियर के मुख्य आँकड़े क्या हैं?
अंजू ने 8 टेस्ट में 36.75 की औसत से 441 रन (1 शतक, 3 अर्धशतक) और 65 वनडे में 29.81 की औसत से 1,729 रन (12 अर्धशतक) बनाए। विकेटकीपर के रूप में उन्होंने 59 स्टंपिंग और 45 कैच किए।
अंजू जैन को अर्जुन अवॉर्ड कब मिला?
अंजू जैन को 2005 में भारत सरकार द्वारा अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया, जो खेल में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाने वाला प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार है।
अंजू जैन विकेटकीपर कैसे बनीं जबकि वह बल्लेबाज बनना चाहती थीं?
दिल्ली की जूनियर टीम में कोई विकेटकीपर उपलब्ध न होने पर अंजू ने टीम की ज़रूरत को देखते हुए यह भूमिका स्वीकार की। यह उनकी पहली पसंद नहीं थी, लेकिन उन्होंने इसे पूरी जिम्मेदारी से निभाया।
क्रिकेट के बाद अंजू जैन ने क्या किया?
सक्रिय क्रिकेट से संन्यास के बाद अंजू जैन भारतीय महिला क्रिकेट टीम की चयन समिति की चेयरपर्सन बनीं। उन्होंने बांग्लादेश महिला क्रिकेट टीम को कोचिंग दी और विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) में भी खिलाड़ियों को प्रशिक्षित किया।
राष्ट्र प्रेस
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