अंजुम चोपड़ा: वनडे में भारत के लिए शतक जड़ने वाली पहली महिला, दक्षिण अफ्रीका में दिलाई ऐतिहासिक जीत
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय महिला क्रिकेट की礎 आधारशिला मानी जाने वाली अंजुम चोपड़ा ने अपने करियर में बल्ले और कप्तानी — दोनों मोर्चों पर ऐसे कीर्तिमान स्थापित किए, जो आज भी भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास में दर्ज हैं। 1999 में इंग्लैंड के खिलाफ वनडे शतक जड़कर वह यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला क्रिकेटर बनीं, और उनकी कप्तानी में टीम इंडिया ने दक्षिण अफ्रीका की धरती पर विदेश में अपनी पहली टेस्ट जीत दर्ज की।
क्रिकेट तक का सफर
अंजुम चोपड़ा का जन्म 20 मई 1977 को नई दिल्ली में हुआ। उनका परिवार खेलों से गहरे जुड़ा था — पिता गोल्फ खिलाड़ी थे, माँ कार रैली में जीत दर्ज कर चुकी थीं, और भाई दिल्ली की ओर से अंडर-17 और अंडर-19 क्रिकेट खेल चुके थे। शुरुआत में अंजुम की रुचि बास्केटबॉल में अधिक थी, लेकिन जब क्रिकेट से नाता जुड़ा तो यह खेल उनकी पहचान बन गया।
अंतरराष्ट्रीय करियर और रिकॉर्ड
अंजुम ने भारतीय टीम के लिए अंतरराष्ट्रीय डेब्यू 1995 में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ किया। इसके 9 महीने बाद उन्हें वनडे क्रिकेट में उतरने का अवसर मिला और उन्होंने 1999 में इंग्लैंड के खिलाफ शतकीय पारी खेलकर इतिहास रच दिया — वह वनडे में शतक लगाने वाली भारत की पहली महिला क्रिकेटर बनीं।
अंजुम ने भारत के लिए कुल 127 वनडे मुकाबले खेले और 2,856 रन बनाए। वह इस फॉर्मेट में 1,000 रनों का आँकड़ा पार करने वाली भी पहली भारतीय महिला क्रिकेटर रहीं। उनके नाम वनडे में 1 शतक और 18 अर्धशतक दर्ज हैं। 12 टेस्ट मुकाबलों में उन्होंने 30.00 की औसत से 548 रन बनाए, जबकि 18 टी20 इंटरनेशनल में उनके बल्ले से 241 रन निकले।
कप्तानी में ऐतिहासिक जीत
बतौर कप्तान अपनी पहली सीरीज़ में अंजुम ने इंग्लैंड के खिलाफ टीम को शानदार जीत दिलाई। इससे भी बड़ी उपलब्धि तब आई जब उनकी अगुआई में भारतीय महिला टीम ने दक्षिण अफ्रीका की धरती पर टेस्ट मैच 10 विकेट से जीता — यह विदेश में भारतीय महिला टीम की पहली टेस्ट जीत थी। यह ऐसे समय में आया जब भारतीय महिला क्रिकेट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहा था।
विश्व कप और विरासत
अंजुम ने भारत के लिए कुल 6 विश्व कप खेले। 2005 के वनडे विश्व कप में उन्होंने टीम को फाइनल तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई — यह भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास के सबसे यादगार अध्यायों में से एक है। गौरतलब है कि यह उपलब्धि तब हासिल हुई जब महिला क्रिकेट को वह सार्वजनिक समर्थन और बुनियादी ढाँचा नहीं मिलता था जो आज उपलब्ध है।
सम्मान और संन्यास
अंजुम ने 2012 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया। भारतीय महिला क्रिकेट में उनके असाधारण योगदान को देखते हुए उन्हें 2007 में अर्जुन पुरस्कार और 2014 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया। आज भी वह क्रिकेट विश्लेषक और प्रसारक के रूप में सक्रिय हैं, और युवा महिला क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।