परंदूर एयरपोर्ट रद्द: तमिलनाडु सरकार 1,700 एकड़ अधिग्रहित जमीन पर औद्योगिक परियोजनाएं लगाने पर विचार कर रही है
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु सरकार ने प्रस्तावित परंदूर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना को औपचारिक रूप से रद्द करने के बाद, इस परियोजना के लिए अधिग्रहित 1,700 एकड़ जमीन के वैकल्पिक औद्योगिक उपयोग पर विचार शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 25 अगस्त 2025 को विधानसभा में इस निर्णय की घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि चेन्नई को दूसरे हवाई अड्डे की आवश्यकता बरकरार है और इसके लिए नई जगह की तलाश जारी है।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा में बताया कि परंदूर परियोजना को खेती की जमीन, जल संसाधनों और स्थानीय निवासियों की आजीविका पर पड़ने वाले गंभीर प्रभाव के कारण रद्द किया गया है। उन्होंने यह भी वादा किया कि नए हवाई अड्डे के लिए ऐसी जगह चुनी जाएगी जहाँ कृषि भूमि और बस्तियों को न्यूनतम नुकसान हो। साथ ही, मौजूदा चेन्नई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के विस्तार की भी योजना है।
गौरतलब है कि परंदूर परियोजना की घोषणा अगस्त 2022 में की गई थी और इसे 13 गाँवों में 5,300 एकड़ जमीन पर विकसित करने की योजना थी। इसे 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य था। यह परियोजना चेन्नई की दीर्घकालिक विमानन आवश्यकताओं को पूरा करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी।
अधिग्रहित जमीन का भविष्य
सरकारी सूत्रों के अनुसार, अधिग्रहित जमीन को मूल मालिकों को वापस करने या दिए गए मुआवजे की वसूली का कोई प्रस्ताव नहीं है। चूँकि यह जमीन 'तमिलनाडु औद्योगिक उद्देश्यों के लिए भूमि अधिग्रहण अधिनियम' के तहत अधिग्रहित की गई थी, इसलिए इसका उपयोग अन्य परियोजनाओं के लिए भी किया जा सकता है।
उद्योग विभाग अन्य विभागों से परामर्श कर जमीन उपयोग की योजना तैयार करेगा। विचाराधीन विकल्पों में एग्रो-प्रोसेसिंग इकाइयाँ, कृषि-आधारित उद्योग, कम जोखिम वाले उद्योग और सिपकॉट (SIPCOT) औद्योगिक एस्टेट की स्थापना शामिल है। बातचीत पूरी होने के बाद सरकार एक विस्तृत रोडमैप जारी करेगी।
लंबे विरोध की जीत
परंदूर परियोजना का स्थानीय ग्रामीणों ने शुरू से ही कड़ा विरोध किया था। एगनापुरम के निवासियों ने 1,100 से अधिक दिनों तक रात्रिकालीन विरोध प्रदर्शन जारी रखे। इसके अलावा, 16 पंचायत प्रस्ताव पास किए गए, 7 ग्राम सभा बैठकों का बहिष्कार किया गया और आंदोलन के दौरान परिवारों ने बच्चों को सरकारी स्कूलों से भी दूर रखा।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में बड़े बुनियादी ढाँचा प्रोजेक्टों के खिलाफ जन-आंदोलन तेज हो रहे हैं। विरोध प्रदर्शनों के बावजूद पिछली सरकार ने भूमि अधिग्रहण जारी रखा था और विस्थापित परिवारों के लिए मॉडल घरों सहित पुनर्वास योजनाएं भी तैयार की थीं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
मुख्यमंत्री विजय ने जनवरी 2025 में एगनापुरम का दौरा कर वादा किया था कि सत्ता में आने पर वे इस परियोजना को रद्द करेंगे। उनकी सरकार के गठन के बाद परियोजना पर काम धीमा पड़ गया था। 25 अगस्त को विधानसभा में की गई घोषणा ने परंदूर योजना को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया।
आगे क्या होगा
अधिकारी नए हवाई अड्डे के लिए वैकल्पिक स्थलों का सर्वेक्षण कर रहे हैं, हालाँकि अभी तक किसी स्थान को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। मौजूदा चेन्नई हवाई अड्डे के विस्तार की प्रक्रिया भी समानांतर रूप से आगे बढ़ेगी। 1,700 एकड़ जमीन के औद्योगिक उपयोग का रोडमैप विभागीय परामर्श के बाद जारी किया जाएगा — यह तय करना बाकी है कि यह जमीन क्षेत्र के किसानों और विस्थापितों के लिए वास्तविक आर्थिक अवसर बनेगी या नहीं।