तंजावुर एयरपोर्ट के लिए ₹100 करोड़ की डीपीआर केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय को सौंपी, उड़ान योजना के तहत मिलेगी कनेक्टिविटी
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु सरकार और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने तंजावुर में प्रस्तावित घरेलू हवाई अड्डे की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को ₹100 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति और फंड आवंटन के लिए केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय को सौंप दिया है। यह प्रस्तावित हवाई अड्डा केंद्र सरकार की उड़ान क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना के अंतर्गत तंजावुर एयरपोर्ट स्टेशन पर विकसित किया जाएगा और डेल्टा जिलों के यात्रियों को सीधी हवाई सेवा प्रदान करेगा।
डीपीआर में क्या शामिल है
तिरुचि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के निदेशक एस.एस. राजू ने बताया कि प्रस्तावित घरेलू हवाई अड्डे में शुरुआती चरण में तीन ATR विमानों के संचालन की क्षमता होगी। DPR में एक प्रशासनिक भवन और घरेलू उड़ानों के लिए आवश्यक अन्य बुनियादी ढाँचे के निर्माण की योजना भी शामिल है। राजू के अनुसार, "यह परियोजना डेल्टा क्षेत्र के घरेलू हवाई यात्रियों की सेवा के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना तैयार करेगी।"
उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु सरकार ने इस परियोजना के लिए आवश्यक 55 एकड़ भूमि पहले ही भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को हस्तांतरित कर दी है, जिससे परियोजना की प्रशासनिक प्रक्रिया में तेज़ी आने की संभावना है।
तिरुचि हवाई अड्डे पर चल रहे विकास कार्य
तंजावुर DPR के साथ-साथ तिरुचि अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी कई महत्वपूर्ण विस्तार परियोजनाएँ प्रगति पर हैं। ₹60 करोड़ की लागत से निर्मित हो रहे 53 मीटर ऊँचे नए एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) टॉवर का लगभग 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इस टॉवर के चालू होने से वायु यातायात प्रबंधन और परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है।
इसके अतिरिक्त, रनवे को मौजूदा 8,000 फीट से बढ़ाकर 12,500 फीट करने के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। ₹350 करोड़ की इस रनवे विस्तार परियोजना के पूरा होने पर तिरुचि से वाइड-बॉडी विमानों का संचालन संभव होगा, जिससे कार्गो हैंडलिंग क्षमता और अंतर्राष्ट्रीय कनेक्टिविटी दोनों में सुधार होगा।
नए एकीकृत टर्मिनल का असर
हाल ही में चालू हुए एकीकृत टर्मिनल (Integrated Terminal) ने तिरुचि हवाई अड्डे की यात्री क्षमता को कई गुना बढ़ा दिया है। पीक ऑवर में यात्री संचालन क्षमता 652 यात्रियों से बढ़कर 3,480 यात्री प्रति घंटा हो गई है। वाहन पार्किंग की सुविधा भी 450 कारों से बढ़कर 990 कारों तक पहुँच गई है, जो पहले की तुलना में दोगुने से अधिक है।
डेल्टा क्षेत्र पर प्रभाव और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु के डेल्टा जिले — तंजावुर, तिरुवारुर और नागपट्टिनम — हवाई कनेक्टिविटी के मामले में पिछड़े हुए हैं और यात्रियों को तिरुचि या चेन्नई का रुख करना पड़ता है। प्रस्तावित तंजावुर हवाई अड्डा इस अंतर को पाटने का प्रयास करेगा। गौरतलब है कि उड़ान योजना के तहत देशभर में टियर-2 और टियर-3 शहरों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश की जा रही है, और तंजावुर परियोजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
तिरुचि हवाई अड्डे पर हो रहे समग्र बुनियादी ढाँचे के उन्नयन और तंजावुर परियोजना की DPR प्रस्तुति से तमिलनाडु के मध्य और दक्षिणी भाग में विमानन हब के रूप में इस क्षेत्र की स्थिति और मज़बूत होने की संभावना है।