24 जुलाई 2026
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कालाइकुंडा एयरबेस पर सिविल एन्क्लेव योजना को मिली नई रफ्तार, पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद उम्मीदें जगीं

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कालाइकुंडा एयरबेस पर सिविल एन्क्लेव योजना को मिली नई रफ्तार, पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद उम्मीदें जगीं

सारांश

पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलते ही एक दशक से ठंडे बस्ते में पड़ी कालाइकुंडा सिविल एन्क्लेव परियोजना फिर चर्चा में है। खड़गपुर से 11 किलोमीटर दूर यह एयरबेस उड़ान योजना के तहत क्षेत्रीय संपर्क की बड़ी कड़ी बन सकता है — बशर्ते 38.25 एकड़ भूमि का पेच सुलझे।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद कालाइकुंडा वायु सेना स्टेशन पर सिविल एन्क्लेव योजना को नई गति मिलने की संभावना बढ़ी।
AAI ने पश्चिम बंगाल सरकार से 38.25 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।
एयरबेस औद्योगिक शहर खड़गपुर से मात्र 11 किलोमीटर दूर है और ओडिशा सीमा के निकट है।
केंद्र सरकार की उड़ान योजना के तहत यह सिविल एन्क्लेव क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत कर सकता है।
उत्तर बंगाल में हासीमारा एयरबेस पर भी इसी तरह का सिविल एन्क्लेव प्रस्तावित है, जो भूटान सीमा के निकट है।

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद पश्चिम मेदिनीपुर जिले स्थित वायु सेना स्टेशन कालाइकुंडा में सिविल एन्क्लेव (नागरिक हवाई अड्डा सुविधा) स्थापित करने की लंबे समय से लंबित योजना को फिर से गति मिलने की संभावना प्रबल हो गई है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) पिछले एक दशक से अधिक समय से इस परियोजना को साकार करने के प्रयास में लगे हैं, लेकिन राज्य स्तर पर भूमि अधिग्रहण और सड़क संपर्क जैसी बाधाएँ इसे रोकती रही हैं।

परियोजना की पृष्ठभूमि और अड़चनें

सूत्रों के अनुसार, भारतीय वायु सेना इस एयरबेस के बुनियादी ढाँचे को नागरिक उड़ानों के साथ साझा करने के पक्ष में रही है, क्योंकि इससे संचालन और रखरखाव की लागत साझा करने में सुविधा होती है। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए एक समय वायुसेना के एक सेवानिवृत्त अधिकारी को राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी।

मुख्य अड़चन यह रही कि राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति-2016 के तहत भूमि उपलब्ध कराना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। AAI ने कालाइकुंडा एयर फोर्स स्टेशन में नए सिविल एन्क्लेव के निर्माण के लिए पश्चिम बंगाल सरकार से 38.25 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया हुआ है। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग से सड़क संपर्क विकसित करना भी अपेक्षित प्रगति के बिना अटका रहा।

संसद में उठा था मुद्दा

करीब एक वर्ष पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता समिक भट्टाचार्य ने संसद में इस मुद्दे को उठाया था। उस समय तत्कालीन नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू ने स्पष्ट किया था कि AAI राज्य सरकार के साथ लगातार संपर्क में है और आवश्यक भूमि उपलब्ध होने तथा सभी जरूरी मंजूरियाँ मिलने के बाद ही परियोजना पर काम शुरू हो सकता है।

क्षेत्रीय संपर्क और आर्थिक महत्व

विशेषज्ञों का मानना है कि कालाइकुंडा में नागरिक हवाई सेवा शुरू होना रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण होगा। यह एयरबेस औद्योगिक शहर खड़गपुर से मात्र लगभग 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। खड़गपुर ओडिशा सीमा के भी करीब है और पड़ोसी राज्य के कई प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों तक सुगम पहुँच प्रदान करता है।

अधिकारियों के अनुसार, केंद्र सरकार की उड़ान योजना के तहत संचालित होने वाला यह सिविल एन्क्लेव बड़ी संख्या में यात्रियों को आकर्षित कर सकता है और पूरे क्षेत्र की संपर्क व्यवस्था को मजबूत करेगा।

हासीमारा में भी समान प्रस्ताव

इसी तर्ज पर उत्तर बंगाल में वायु सेना स्टेशन हासीमारा में भी एक सिविल एन्क्लेव विकसित करने का प्रस्ताव है। यह एयरबेस भूटान की सीमा के निकट स्थित है। अधिकारियों का मानना है कि हासीमारा में सिविल एन्क्लेव बनने से भूटान पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही आसपास के वन क्षेत्रों और चाय बागानों वाले इलाकों में पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में नई राज्य सरकार के साथ केंद्र-राज्य समन्वय के नए अवसर बने हैं। गौरतलब है कि भूमि आवंटन और सड़क संपर्क की बाधाएँ दूर होते ही AAI परियोजना पर तत्काल काम शुरू करने की स्थिति में है। दोनों एयरबेस — कालाइकुंडा और हासीमारा — पर सिविल एन्क्लेव बनने से पश्चिम बंगाल में क्षेत्रीय हवाई संपर्क का नया अध्याय शुरू हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कालाइकुंडा एयरबेस पर सिविल एन्क्लेव क्या है?
कालाइकुंडा वायु सेना स्टेशन पर प्रस्तावित सिविल एन्क्लेव एक नागरिक हवाई अड्डा सुविधा है जो मौजूदा सैन्य एयरबेस के बुनियादी ढाँचे को नागरिक उड़ानों के साथ साझा करेगी। यह पश्चिम मेदिनीपुर जिले में खड़गपुर से लगभग 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
परियोजना इतने वर्षों से क्यों अटकी हुई थी?
राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति-2016 के तहत भूमि उपलब्ध कराना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। पिछली राज्य सरकार की ओर से 38.25 एकड़ भूमि आवंटन और राष्ट्रीय राजमार्ग से सड़क संपर्क विकसित करने में अपेक्षित प्रगति नहीं हो पाई, जिससे परियोजना एक दशक से अधिक समय से लंबित रही।
इस सिविल एन्क्लेव से किसे फायदा होगा?
खड़गपुर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों के यात्रियों को सीधा लाभ होगा। ओडिशा सीमा के निकट होने के कारण पड़ोसी राज्य के व्यावसायिक केंद्रों तक भी पहुँच आसान होगी। केंद्र की उड़ान योजना के तहत यह क्षेत्रीय संपर्क को और मजबूत करेगा।
हासीमारा एयरबेस पर प्रस्तावित सिविल एन्क्लेव कहाँ है?
हासीमारा वायु सेना स्टेशन उत्तर बंगाल में भूटान सीमा के निकट स्थित है। अधिकारियों के अनुसार यहाँ सिविल एन्क्लेव बनने से भूटान पर्यटन के साथ-साथ आसपास के वन क्षेत्रों और चाय बागान इलाकों में भी आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी।
परियोजना शुरू होने के लिए अभी क्या जरूरी है?
नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू के संसद में दिए बयान के अनुसार, आवश्यक 38.25 एकड़ भूमि का आवंटन और सभी जरूरी मंजूरियाँ मिलना अनिवार्य है। इसके बाद AAI परियोजना पर निर्माण कार्य शुरू कर सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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