10 जुलाई 2026
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केशोद एयरपोर्ट से 2027 तक एयरबस और कार्गो उड़ानें: मांडविया ने ₹364 करोड़ के पुनर्विकास कार्य में तेजी के निर्देश दिए

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केशोद एयरपोर्ट से 2027 तक एयरबस और कार्गो उड़ानें: मांडविया ने ₹364 करोड़ के पुनर्विकास कार्य में तेजी के निर्देश दिए

सारांश

केशोद हवाई अड्डे पर ₹364 करोड़ की पुनर्विकास परियोजना 2027 की समयसीमा के साथ आगे बढ़ रही है — 6,500 वर्ग मीटर का नया टर्मिनल और 2,500 मीटर का विस्तारित रनवे सौराष्ट्र को बड़े विमानों के नक्शे पर लाने की कोशिश है। मांडविया ने जूनागढ़ समीक्षा बैठक में तेजी और पारदर्शिता के कड़े निर्देश दिए।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने 10 जुलाई 2026 को जूनागढ़ में समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
लक्ष्य: 2027 तक केशोद हवाई अड्डे से एयरबस और कार्गो उड़ानें शुरू करना।
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) की ₹364 करोड़ की पुनर्विकास परियोजना — 6,500 वर्ग मीटर का नया टर्मिनल और रनवे विस्तार 2,500 मीटर तक।
नया टर्मिनल एक साथ 800 यात्रियों (400 आगमन + 400 प्रस्थान) को सेवा देने में सक्षम होगा।
परियोजना पूर्णता की समयसीमा जनवरी 2027 ; वैधानिक मंजूरियों और भूमि प्रक्रियाओं पर भी निर्भर।
मंत्री ने मानसून क्षति और घेड क्षेत्र के राहत कार्यों की भी समीक्षा की।

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने 10 जुलाई 2026 को जूनागढ़ में विकास परियोजनाओं की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक केशोद हवाई अड्डे से एयरबस और कार्गो विमानों का संचालन शुरू करना है। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को इस लक्ष्य को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने के लिए कार्यों में तेजी लाने के कड़े निर्देश दिए।

पुनर्विकास परियोजना का विवरण

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) द्वारा केशोद हवाई अड्डे पर ₹364 करोड़ की अनुमानित लागत से पुनर्विकास कार्य चल रहा है। इस परियोजना के तहत 6,500 वर्ग मीटर का नया टर्मिनल भवन निर्मित किया जा रहा है, जो व्यस्त समय में एक साथ 400 आगमन और 400 प्रस्थान यात्रियों को सेवा देने में सक्षम होगा। इसके अतिरिक्त, एयरबस ए320 जैसे बड़े विमानों के संचालन को सुगम बनाने के लिए रनवे की लंबाई बढ़ाकर 2,500 मीटर की जा रही है। परियोजना को जनवरी 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

गौरतलब है कि इस समयसीमा की पूर्ति वैधानिक मंजूरियों और भूमि अधिग्रहण से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर भी निर्भर करेगी।

मुख्य घटनाक्रम

पोरबंदर से सांसद मनसुख मांडविया की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में विभिन्न सरकारी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। मंत्री ने सभी विभागों से विस्तृत प्रगति रिपोर्ट तलब की और स्पष्ट किया कि समस्त कार्य तय समयसीमा के भीतर, पूर्ण गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ पूरे किए जाने चाहिए। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब गुजरात में बुनियादी ढाँचे के विकास को केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं में रखा गया है।

मानसून और आपदा प्रबंधन की समीक्षा

बैठक में मंत्री ने जूनागढ़ क्षेत्र में हाल ही में हुई भारी मानसूनी बारिश से हुए नुकसान की भी समीक्षा की। उन्होंने आपदा प्रबंधन विभाग और संबंधित एजेंसियों को सतर्क रहने तथा आवश्यकता पड़ने पर तत्काल बचाव एवं राहत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। घेड क्षेत्र में चल रहे विकास और राहत कार्यों की प्रगति की भी अलग से समीक्षा की गई।

मांडविया ने अधिकारियों से कहा कि प्रभावी योजना और त्वरित कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों और आम नागरिकों को न्यूनतम असुविधा हो।

आम जनता पर असर

केशोद हवाई अड्डे से एयरबस और कार्गो उड़ानें शुरू होने से सौराष्ट्र क्षेत्र की हवाई संपर्क क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा। इससे न केवल यात्रियों को बेहतर विकल्प मिलेंगे, बल्कि कार्गो सेवाओं के जरिए स्थानीय व्यापार और कृषि उत्पादों के निर्यात को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

क्या होगा आगे

परियोजना की अगली निर्णायक परीक्षा वैधानिक अनुमोदन प्रक्रियाओं की गति पर निर्भर करेगी। जनवरी 2027 की समयसीमा को ध्यान में रखते हुए आने वाले महीनों में निर्माण कार्य की रफ्तार और प्रशासनिक समन्वय अहम भूमिका निभाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'जनवरी 2027' की समयसीमा के साथ वैधानिक मंजूरियों और भूमि प्रक्रियाओं की शर्त जोड़ना यह संकेत देता है कि जमीनी चुनौतियाँ अभी बाकी हैं। भारत में AAI की कई क्षेत्रीय हवाई अड्डा परियोजनाएँ अनुमोदन की पेचीदगियों के कारण समयसीमा से पिछड़ती रही हैं — केशोद इस पैटर्न का अपवाद बनेगा या नहीं, यह आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा। मंत्री की समीक्षा बैठक राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाती है, पर असली कसौटी प्रशासनिक समन्वय और निर्माण गति की होगी।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केशोद हवाई अड्डे से एयरबस उड़ानें कब शुरू होंगी?
केंद्र सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक केशोद हवाई अड्डे से एयरबस और कार्गो उड़ानें शुरू करना है। परियोजना की अंतिम समयसीमा जनवरी 2027 निर्धारित है, हालाँकि यह वैधानिक मंजूरियों और भूमि से जुड़ी प्रक्रियाओं पर भी निर्भर करेगी।
केशोद एयरपोर्ट पुनर्विकास परियोजना में क्या-क्या शामिल है?
₹364 करोड़ की इस परियोजना के तहत 6,500 वर्ग मीटर का नया टर्मिनल भवन बनाया जा रहा है, जो एक साथ 800 यात्रियों को सेवा दे सकेगा। एयरबस ए320 जैसे विमानों के लिए रनवे को 2,500 मीटर तक विस्तारित किया जा रहा है।
मनसुख मांडविया ने जूनागढ़ बैठक में क्या निर्देश दिए?
केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने 10 जुलाई 2026 को जूनागढ़ में समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को सभी कार्य तय समयसीमा में, पूरी गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ पूरे करने के निर्देश दिए। उन्होंने मानसून क्षति और घेड क्षेत्र के राहत कार्यों की भी समीक्षा की।
केशोद हवाई अड्डे के विकास से सौराष्ट्र को क्या फायदा होगा?
केशोद से एयरबस और कार्गो उड़ानें शुरू होने पर सौराष्ट्र क्षेत्र की हवाई संपर्क क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा। इससे यात्रियों को बेहतर विकल्प मिलेंगे और कार्गो सेवाओं के जरिए स्थानीय व्यापार व कृषि उत्पादों के निर्यात को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
केशोद एयरपोर्ट परियोजना में देरी की क्या संभावना है?
सरकार ने स्वयं स्पष्ट किया है कि जनवरी 2027 की समयसीमा वैधानिक मंजूरियों और भूमि से जुड़ी आवश्यक प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगी। इन प्रशासनिक प्रक्रियाओं की गति परियोजना की समयबद्ध पूर्णता में निर्णायक भूमिका निभाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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