परंदूर हवाई अड्डे का विरोध: एकानापुरम ग्राम सभा ने CM विजय को दिया धन्यवाद, 'थलपति विजय रोड' की मांग
सारांश
मुख्य बातें
कांचीपुरम जिले के एकानापुरम गांव के निवासियों ने 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस ग्राम सभा बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को प्रस्तावित परंदूर ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे का विरोध करने के लिए धन्यवाद दिया। इसके साथ ही ग्रामीणों ने राज्य सरकार से गांव की मुख्य सड़क का नाम 'थलपति विजय रोड' रखने का आग्रह किया।
ग्राम सभा में क्या हुआ
यह बैठक एकानापुरम के एक सरकारी स्कूल में आयोजित की गई। ग्रामीणों ने दो प्रमुख प्रस्ताव पारित किए — पहला, मुख्यमंत्री विजय के पूर्व समर्थन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना; और दूसरा, सरकार से अपेक्षा कि वह चुनावी वादे के अनुरूप परियोजना को औपचारिक रूप से रद्द करे। एकानापुरम उन गांवों में से एक है जो प्रस्तावित हवाई अड्डे की परियोजना से सर्वाधिक प्रभावित होने की आशंका में हैं।
परंदूर हवाई अड्डा विवाद की पृष्ठभूमि
चेन्नई के लिए दूसरे हवाई अड्डे का प्रस्ताव 2022 में रखा गया था। यह परियोजना परंदूर और आसपास के 13 गांवों को कवर करते हुए लगभग 5,000 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित है। कृषि भूमि, आवासीय क्षेत्रों और जल निकायों के अधिग्रहण की आशंका से ग्रामीण लंबे समय से आंदोलनरत हैं।
गौरतलब है कि ग्रामीण 1,100 दिनों से अधिक समय से प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने 16 ग्राम सभा बैठकों में हवाई अड्डे के विरोध में प्रस्ताव पारित किए हैं और विरोध दर्ज कराने के लिए 7 बैठकों का बहिष्कार किया है। इस दीर्घकालीन आंदोलन के बावजूद, केंद्र और राज्य सरकारों ने भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही सहित परियोजना को आगे बढ़ाना जारी रखा।
विजय का वादा और टीवीके सरकार का रुख
मुख्यमंत्री विजय ने 20 जनवरी 2025 को परंदूर का दौरा किया था और आंदोलनकारी निवासियों को आश्वासन दिया था कि मुख्यमंत्री बनने पर परियोजना रद्द कर दी जाएगी। इसके बाद तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) ने परंदूर हवाई अड्डे की परियोजना को रद्द करने का वादा अपने चुनावी घोषणापत्र में शामिल किया।
हालांकि, विजय की पार्टी के सत्ता में आने के बाद भी सरकार ने अब तक परियोजना के भविष्य पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण औपचारिक नीतिगत निर्णय की प्रतीक्षा में हैं।
अधिकारी तबादले से बढ़ीं अटकलें
हवाई अड्डे के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए जिम्मेदार जिला राजस्व अधिकारी का 30 जुलाई को तबादला हो गया और अब तक उस पद पर किसी नए अधिकारी की नियुक्ति नहीं हुई है। इस घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या सरकार चुपचाप भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया से पीछे हट रही है। ग्रामीण इस तबादले और रिक्त पद को एक सकारात्मक संकेत मान रहे हैं, फिर भी वे किसी औपचारिक घोषणा की राह देख रहे हैं।
आगे क्या होगा
शनिवार को पारित प्रस्तावों में ग्रामीणों की कृतज्ञता और उम्मीद दोनों झलकती हैं — कि TVK सरकार अपने चुनावी वादे को पूरा करते हुए परियोजना को आधिकारिक रूप से बंद करेगी। सरकार की अगली घोषणा इस दीर्घकालीन विवाद की दिशा तय करेगी।