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बिदादी टाउनशिप विरोध: भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने किसानों से मुलाकात की, कांग्रेस सरकार पर रियल एस्टेट हित साधने का आरोप

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बिदादी टाउनशिप विरोध: भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने किसानों से मुलाकात की, कांग्रेस सरकार पर रियल एस्टेट हित साधने का आरोप

सारांश

कर्नाटक भाजपा नेताओं ने बिदादी के किसानों से मुलाकात कर प्रस्तावित ₹18,000–20,000 करोड़ की GBIT टाउनशिप परियोजना के लिए 7,481 एकड़ उपजाऊ भूमि अधिग्रहण का विरोध किया। विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री शिवकुमार पर किसानों की बजाय रियल एस्टेट हितों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

अशोक और चलावादी नारायणस्वामी के नेतृत्व में भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने बिदादी के चार गांवों — केंपय्याना पाल्या, अरलालासंद्रा, होसूर और बन्निगिरि — का दौरा किया।
प्रस्तावित GBIT टाउनशिप की अनुमानित लागत ₹18,000–₹20,000 करोड़ है और इसके लिए 9 गांवों में 7,481 एकड़ भूमि अधिग्रहण प्रस्तावित है।
भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर किसानों की बजाय रियल एस्टेट हितों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया और भूमि अधिग्रहण योजना वापस लेने की माँग की।
विजयेंद्र ने भाजपा नेताओं के खिलाफ लगाए गए पोस्टरों को सत्तारूढ़ दल की डराने की कोशिश बताकर खारिज किया।
डेयरी किसानों और रेशम उत्पादकों (सेरीकल्चर) की आजीविका पर परियोजना के प्रभाव को लेकर विशेष चिंता जताई गई।

कर्नाटक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक तथा विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष चलावादी नारायणस्वामी के नेतृत्व में भाजपा के एक वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल ने 18 जून 2025 को बेंगलुरु के बाहरी इलाके बिदादी के कई गांवों का दौरा किया और प्रस्तावित टाउनशिप परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों के साथ एकजुटता व्यक्त की। यह दौरा उस समय हुआ जब कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है।

किन गांवों का किया दौरा

भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने केंपय्याना पाल्या, अरलालासंद्रा, होसूर और बन्निगिरि गांवों का दौरा किया — ये वे गांव हैं जहां किसान राज्य सरकार की प्रस्तावित टाउनशिप परियोजना के लिए कृषि भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल में पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं विधायक सी.एन. अश्वथ नारायण तथा वरिष्ठ विधायक एस. सुरेश कुमार समेत पार्टी के अनेक नेता शामिल रहे।

नेताओं ने बिदादी स्थित एक दुग्ध डेयरी का निरीक्षण किया और डेयरी किसानों से चर्चा की। इसके अलावा कृषि क्षेत्रों और रेशम उत्पादन (सेरीकल्चर) फार्मों का भी मुआयना कर किसानों व रेशम उत्पादकों से उनकी आजीविका और परियोजना के संभावित प्रभावों पर विस्तृत बातचीत की।

भाजपा के आरोप और माँगें

बेंगलुरु में मीडिया से बात करते हुए विजयेंद्र ने कांग्रेस सरकार पर किसानों और गरीबों के हितों की अनदेखी कर रियल एस्टेट हितों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और कांग्रेस सरकार की प्राथमिकता न तो किसान हैं और न ही गरीबों को आवास उपलब्ध कराना। शपथ लेने के 24 घंटे के भीतर ही मुख्यमंत्री ने दिखा दिया कि उनकी प्राथमिकता रियल एस्टेट है।'

विजयेंद्र ने यह भी कहा, 'सरकार को किसानों की मदद करनी चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य से मुख्यमंत्री शिवकुमार के लिए रियल एस्टेट ही प्राथमिकता बन गया है। मैं उनसे आग्रह करता हूं कि वह अपना हठ छोड़ें और किसानों को उनकी जमीन से जबरन बेदखल न होने दें।' भाजपा ने कांग्रेस सरकार से प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण योजना वापस लेने और मौजूदा स्वरूप में टाउनशिप परियोजना को रद्द करने की माँग की है।

पोस्टर विवाद पर भाजपा का जवाब

बिदादी दौरे से पहले भाजपा नेताओं के खिलाफ लगाए गए पोस्टरों को लेकर पूछे गए सवाल पर विजयेंद्र ने इसे सत्तारूढ़ दल की डराने की कोशिश बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री शिवकुमार शायद सोचते हैं कि हम सभी कांग्रेस विधायक हैं। हम इससे डरने वाले नहीं हैं।' पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह किसानों के आंदोलन के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।

क्या है बिदादी टाउनशिप परियोजना

प्रस्तावित ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप (GBIT), जिसे बिदादी टाउनशिप परियोजना के नाम से भी जाना जाता है, कर्नाटक सरकार की एक महत्वाकांक्षी शहरी विकास योजना है। करीब ₹18,000 से ₹20,000 करोड़ की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना बिदादी क्षेत्र के नौ गांवों में लगभग 7,481 एकड़ भूमि पर विकसित की जानी है।

सरकार इसे आधुनिक 'वर्क-लिव-प्ले' टाउनशिप और 'एआई सिटी' के रूप में प्रस्तुत कर रही है। दूसरी ओर, किसान और विपक्षी दल उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण तथा ग्रामीण आजीविका — विशेष रूप से डेयरी और रेशम उत्पादन — पर इसके दीर्घकालिक प्रभाव को लेकर चिंतित हैं।

आगे क्या होगा

भाजपा के इस दौरे के बाद किसानों के विरोध को राजनीतिक समर्थन मिलने से आंदोलन और तेज होने की संभावना है। अब सभी की निगाहें कर्नाटक सरकार की प्रतिक्रिया और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन किसानों की चिंताएं — डेयरी और सेरीकल्चर जैसी नाजुक आजीविकाओं पर खतरा — वास्तविक और गंभीर हैं। असली सवाल यह है कि क्या ₹18,000–20,000 करोड़ की यह 'एआई सिटी' योजना उन किसानों के लिए उचित पुनर्वास और वैकल्पिक आजीविका सुनिश्चित करती है जिनकी जमीन ली जाएगी — और इस पर अभी तक सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं आया है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिदादी टाउनशिप परियोजना (GBIT) क्या है?
ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप (GBIT) कर्नाटक सरकार की एक महत्वाकांक्षी शहरी विकास योजना है, जिसमें बिदादी क्षेत्र के नौ गांवों में लगभग 7,481 एकड़ भूमि पर ₹18,000 से ₹20,000 करोड़ की लागत से एक आधुनिक 'वर्क-लिव-प्ले' टाउनशिप और 'एआई सिटी' विकसित करने की योजना है। किसान इस परियोजना के लिए उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं।
भाजपा नेताओं ने बिदादी दौरे में क्या किया?
भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने केंपय्याना पाल्या, अरलालासंद्रा, होसूर और बन्निगिरि गांवों का दौरा कर किसानों से उनकी चिंताएं सुनीं। नेताओं ने एक दुग्ध डेयरी और सेरीकल्चर फार्मों का निरीक्षण किया तथा कांग्रेस सरकार से भूमि अधिग्रहण योजना वापस लेने की माँग की।
किसान इस परियोजना का विरोध क्यों कर रहे हैं?
किसानों को आशंका है कि उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण से उनकी डेयरी, रेशम उत्पादन और खेती पर आधारित आजीविका नष्ट हो जाएगी। उनका कहना है कि सरकार ने अभी तक उचित पुनर्वास और वैकल्पिक आजीविका का कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया है।
विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री शिवकुमार पर क्या आरोप लगाए?
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार किसानों और गरीबों की बजाय रियल एस्टेट हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि शपथ लेने के 24 घंटे के भीतर ही मुख्यमंत्री ने अपनी प्राथमिकता स्पष्ट कर दी थी।
बिदादी टाउनशिप परियोजना का किसानों पर क्या असर पड़ेगा?
प्रस्तावित अधिग्रहण में बिदादी के नौ गांवों की लगभग 7,481 एकड़ भूमि शामिल है, जिससे हजारों किसान, डेयरी पशुपालक और रेशम उत्पादक प्रभावित हो सकते हैं। उपजाऊ कृषि भूमि के जाने से ग्रामीण आजीविका और स्थानीय खाद्य उत्पादन पर दीर्घकालिक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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