26 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बिदादी टाउनशिप विवाद: कुमारस्वामी ने शिवकुमार को 27 जून को बायरमंगला आने का दिया न्योता

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बिदादी टाउनशिप विवाद: कुमारस्वामी ने शिवकुमार को 27 जून को बायरमंगला आने का दिया न्योता

सारांश

बिदादी टाउनशिप विवाद में कुमारस्वामी ने शिवकुमार को सचिवालय नहीं, बल्कि प्रभावित गाँव बायरमंगला आने की चुनौती दी है। ₹18,000-20,000 करोड़ की परियोजना के लिए 518 एकड़ भूमि अधिग्रहण को लेकर किसान सड़कों पर हैं और केंद्र-राज्य की यह सियासी जंग जमीन पर उतर आई है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री एच.डी.
कुमारस्वामी ने 25 जून 2026 को मुख्यमंत्री डी.के.
शिवकुमार को दूसरा पत्र लिखकर 27 जून को बायरमंगला गांव आने का निमंत्रण दिया।
22 जून को भेजे गए पहले पत्र का राज्य सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं मिला था।
ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत ₹18,000-20,000 करोड़ है और पहले चरण में 518 एकड़ भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना 12 जून 2026 को जारी हुई।
प्रभावित गाँवों में केम्पय्यानापाल्या , मंडलहल्ली और वडेरहल्ली शामिल हैं।
कुमारस्वामी ने किसानों से जमीन न देने की अपील की; BJP ने भी विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों को समर्थन देने की घोषणा की।
शिवकुमार ने पहले कुमारस्वामी को विधान सौधा में विशेषज्ञ टीम के साथ चर्चा का प्रस्ताव दिया था।

केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने 25 जून 2026 को कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को दूसरा पत्र लिखकर 27 जून को बायरमंगला गांव आने और ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप प्रोजेक्ट से प्रभावित किसानों, मजदूरों और स्थानीय निवासियों से सीधे संवाद करने का आमंत्रण दिया। यह पत्र ऐसे समय आया है जब 22 जून को भेजे गए उनके पहले पत्र का राज्य सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं मिला था।

विवाद की पृष्ठभूमि

बिदादी टाउनशिप परियोजना — जिसे आधिकारिक तौर पर ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप प्रोजेक्ट कहा जाता है — कर्नाटक सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। इसका उद्देश्य बेंगलुरु से लगभग 30-40 किलोमीटर दूर बिदादी के निकट एक बड़ा सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करना है, ताकि महानगर के बुनियादी ढाँचे पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सके। परियोजना की अनुमानित लागत ₹18,000 करोड़ से ₹20,000 करोड़ के बीच बताई जाती है।

कर्नाटक सरकार ने मार्च 2025 में भूमि अधिग्रहण की प्रारंभिक अधिसूचना जारी की थी। मई 2026 में राज्य मंत्रिमंडल ने परियोजना को मंजूरी दी और 12 जून 2026 को पहले चरण में लगभग 518 एकड़ भूमि अधिग्रहण की अंतिम अधिसूचना जारी हुई, जिसमें केम्पय्यानापाल्या, मंडलहल्ली और वडेरहल्ली गांवों के कुछ हिस्से शामिल हैं।

कुमारस्वामी का रुख और पत्र का सार

कुमारस्वामी ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि इतनी बड़ी परियोजना पर बातचीत उन्हीं लोगों की उपस्थिति में होनी चाहिए जिनकी जमीन और आजीविका दाँव पर है। उन्होंने लिखा, 'मैं आपका ध्यान 22 जून 2026 को भेजे गए आपके पत्र और उसी दिन भेजे गए मेरे जवाब की ओर दिलाना चाहता हूँ। मुझे उम्मीद है कि आपने मेरे पत्र पर विचार किया होगा और मैं अब भी आपके उत्तर की प्रतीक्षा कर रहा हूँ।'

उन्होंने आगे कहा, 'यदि आप उसी दिन जीबीए और अन्य अधिकारियों के साथ बायरमंगला आते हैं, तो हम मिलकर प्रभावित लोगों की समस्याएँ सुन सकते हैं और मौके पर ही व्यावहारिक समाधान तलाश सकते हैं।'

शिवकुमार का प्रस्ताव और राजनीतिक टकराव

इससे पहले मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कुमारस्वामी को 26 जून को विधान सौधा स्थित अपने कार्यालय में पाँच विशेषज्ञों की टीम के साथ चर्चा के लिए आमंत्रित किया था। कुमारस्वामी के नए पत्र को इसी प्रस्ताव का प्रति-उत्तर माना जा रहा है — जहाँ वे चर्चा का स्थान सचिवालय से बदलकर प्रभावित गाँव ले जाना चाहते हैं।

गौरतलब है कि कुमारस्वामी ने किसानों से अपनी कृषि भूमि सरकार को न देने की अपील की है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों को समर्थन देने की घोषणा की है, जिससे यह मुद्दा कर्नाटक की राजनीति में केंद्रीय बन गया है।

प्रभावित वर्ग और स्थानीय चिंताएँ

कुमारस्वामी ने बताया कि 27 जून को बायरमंगला दौरे के दौरान वे विस्थापन का सामना कर रहे किसानों, कृषि मजदूरों, डेयरी व्यवसाय से जुड़ी महिलाओं, छोटे कारोबारियों और अन्य स्थानीय निवासियों से मिलेंगे। परियोजना को 'वर्क-लिव-प्ले' टाउनशिप और एआई आधारित शहरी विकास केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों की मुख्य चिंता भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया और मुआवजे की दरों को लेकर है।

आगे क्या होगा

केंद्रीय मंत्री के कार्यालय ने यह पत्र और दौरे का कार्यक्रम मुख्यमंत्री कार्यालय तथा मीडिया दोनों को भेज दिया है। कुमारस्वामी ने उम्मीद जताई है कि शिवकुमार उनके निमंत्रण को सकारात्मक रूप से स्वीकार करेंगे। यह देखना बाकी है कि क्या दोनों नेता 27 जून को एक ही मंच पर आकर प्रभावित समुदायों के साथ संवाद स्थापित कर पाएँगे — या यह विवाद और गहरा होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुविचारित राजनीतिक चाल है — चर्चा का मंच सचिवालय की बजाय उस जमीन पर ले जाना जहाँ कैमरे और किसान दोनों मौजूद होंगे। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पहले से कई मोर्चों पर दबाव में है और विधानसभा चुनाव की आहट दूर नहीं। असली सवाल यह है कि ₹18,000-20,000 करोड़ की इस परियोजना में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पारदर्शी है या नहीं — और मुआवजे की दरें बाजार मूल्य के अनुरूप हैं या नहीं। दोनों पक्षों की सियासी बयानबाजी के बीच असली पीड़ित वे किसान और डेयरी महिलाएँ हैं जिनकी आजीविका दाँव पर है, और जिनकी आवाज अभी तक किसी भी आधिकारिक बैठक में नहीं सुनी गई।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिदादी ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप प्रोजेक्ट क्या है?
यह कर्नाटक सरकार की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है जिसका उद्देश्य बेंगलुरु से लगभग 30-40 किलोमीटर दूर बिदादी के पास एक बड़ा सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करना है। इसकी अनुमानित लागत ₹18,000-20,000 करोड़ है और इसे आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक तथा एआई आधारित शहरी विकास केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
कुमारस्वामी ने शिवकुमार को पत्र क्यों लिखा?
22 जून 2026 को भेजे गए पहले पत्र का राज्य सरकार की ओर से कोई जवाब न मिलने पर कुमारस्वामी ने 25 जून को दूसरा पत्र लिखा। उन्होंने माँग की कि परियोजना पर चर्चा सचिवालय में नहीं, बल्कि प्रभावित गाँव बायरमंगला में किसानों और स्थानीय लोगों की मौजूदगी में हो।
बिदादी परियोजना में कितनी भूमि अधिग्रहित की जा रही है और कौन से गाँव प्रभावित हैं?
12 जून 2026 को पहले चरण में लगभग 518 एकड़ भूमि अधिग्रहण की अंतिम अधिसूचना जारी की गई। इसमें केम्पय्यानापाल्या, मंडलहल्ली और वडेरहल्ली गाँवों के कुछ हिस्से शामिल हैं।
BJP और कुमारस्वामी का इस परियोजना पर क्या रुख है?
कुमारस्वामी ने किसानों से अपनी कृषि भूमि सरकार को न देने की अपील की है। BJP ने भी भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों को समर्थन देने की घोषणा की है, जिससे यह मुद्दा कर्नाटक की राजनीति में केंद्रीय बन गया है।
27 जून को बायरमंगला दौरे में क्या होगा?
कुमारस्वामी ने घोषणा की है कि वे 27 जून को बायरमंगला गाँव का दौरा करेंगे और विस्थापन का सामना कर रहे किसानों, कृषि मजदूरों, डेयरी व्यवसाय से जुड़ी महिलाओं तथा छोटे कारोबारियों से मिलेंगे। उन्होंने शिवकुमार को भी जीबीए अधिकारियों के साथ वहाँ आने का निमंत्रण दिया है ताकि मौके पर ही समाधान तलाशा जा सके।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 6 घंटे पहले
  3. 2 दिन पहले
  4. 2 दिन पहले
  5. 3 दिन पहले
  6. 3 दिन पहले
  7. 3 दिन पहले
  8. 1 महीना पहले