बिदादी टाउनशिप विवाद: कुमारस्वामी ने शिवकुमार को 27 जून को बायरमंगला आने का दिया न्योता
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने 25 जून 2026 को कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को दूसरा पत्र लिखकर 27 जून को बायरमंगला गांव आने और ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप प्रोजेक्ट से प्रभावित किसानों, मजदूरों और स्थानीय निवासियों से सीधे संवाद करने का आमंत्रण दिया। यह पत्र ऐसे समय आया है जब 22 जून को भेजे गए उनके पहले पत्र का राज्य सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं मिला था।
विवाद की पृष्ठभूमि
बिदादी टाउनशिप परियोजना — जिसे आधिकारिक तौर पर ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप प्रोजेक्ट कहा जाता है — कर्नाटक सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। इसका उद्देश्य बेंगलुरु से लगभग 30-40 किलोमीटर दूर बिदादी के निकट एक बड़ा सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करना है, ताकि महानगर के बुनियादी ढाँचे पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सके। परियोजना की अनुमानित लागत ₹18,000 करोड़ से ₹20,000 करोड़ के बीच बताई जाती है।
कर्नाटक सरकार ने मार्च 2025 में भूमि अधिग्रहण की प्रारंभिक अधिसूचना जारी की थी। मई 2026 में राज्य मंत्रिमंडल ने परियोजना को मंजूरी दी और 12 जून 2026 को पहले चरण में लगभग 518 एकड़ भूमि अधिग्रहण की अंतिम अधिसूचना जारी हुई, जिसमें केम्पय्यानापाल्या, मंडलहल्ली और वडेरहल्ली गांवों के कुछ हिस्से शामिल हैं।
कुमारस्वामी का रुख और पत्र का सार
कुमारस्वामी ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि इतनी बड़ी परियोजना पर बातचीत उन्हीं लोगों की उपस्थिति में होनी चाहिए जिनकी जमीन और आजीविका दाँव पर है। उन्होंने लिखा, 'मैं आपका ध्यान 22 जून 2026 को भेजे गए आपके पत्र और उसी दिन भेजे गए मेरे जवाब की ओर दिलाना चाहता हूँ। मुझे उम्मीद है कि आपने मेरे पत्र पर विचार किया होगा और मैं अब भी आपके उत्तर की प्रतीक्षा कर रहा हूँ।'
उन्होंने आगे कहा, 'यदि आप उसी दिन जीबीए और अन्य अधिकारियों के साथ बायरमंगला आते हैं, तो हम मिलकर प्रभावित लोगों की समस्याएँ सुन सकते हैं और मौके पर ही व्यावहारिक समाधान तलाश सकते हैं।'
शिवकुमार का प्रस्ताव और राजनीतिक टकराव
इससे पहले मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कुमारस्वामी को 26 जून को विधान सौधा स्थित अपने कार्यालय में पाँच विशेषज्ञों की टीम के साथ चर्चा के लिए आमंत्रित किया था। कुमारस्वामी के नए पत्र को इसी प्रस्ताव का प्रति-उत्तर माना जा रहा है — जहाँ वे चर्चा का स्थान सचिवालय से बदलकर प्रभावित गाँव ले जाना चाहते हैं।
गौरतलब है कि कुमारस्वामी ने किसानों से अपनी कृषि भूमि सरकार को न देने की अपील की है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों को समर्थन देने की घोषणा की है, जिससे यह मुद्दा कर्नाटक की राजनीति में केंद्रीय बन गया है।
प्रभावित वर्ग और स्थानीय चिंताएँ
कुमारस्वामी ने बताया कि 27 जून को बायरमंगला दौरे के दौरान वे विस्थापन का सामना कर रहे किसानों, कृषि मजदूरों, डेयरी व्यवसाय से जुड़ी महिलाओं, छोटे कारोबारियों और अन्य स्थानीय निवासियों से मिलेंगे। परियोजना को 'वर्क-लिव-प्ले' टाउनशिप और एआई आधारित शहरी विकास केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों की मुख्य चिंता भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया और मुआवजे की दरों को लेकर है।
आगे क्या होगा
केंद्रीय मंत्री के कार्यालय ने यह पत्र और दौरे का कार्यक्रम मुख्यमंत्री कार्यालय तथा मीडिया दोनों को भेज दिया है। कुमारस्वामी ने उम्मीद जताई है कि शिवकुमार उनके निमंत्रण को सकारात्मक रूप से स्वीकार करेंगे। यह देखना बाकी है कि क्या दोनों नेता 27 जून को एक ही मंच पर आकर प्रभावित समुदायों के साथ संवाद स्थापित कर पाएँगे — या यह विवाद और गहरा होगा।