बिदादी टाउनशिप विवाद: कुमारस्वामी बोले — 'सीएम शिवकुमार आएं तो स्वागत है, लड़ाई किसानों के लिए'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने शुक्रवार, 27 जून 2026 को स्पष्ट किया कि वह बिदादी के बायरमंगला गांव में किसानों के साथ खड़े रहेंगे और यदि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार वहाँ बातचीत के लिए आते हैं तो उनका स्वागत है। कर्नाटक में प्रस्तावित ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप प्रोजेक्ट को लेकर यह सियासी टकराव तब और तीखा हो गया है जब भूमि अधिग्रहण के खिलाफ किसानों का आंदोलन 470 दिनों से अधिक समय से जारी है।
कुमारस्वामी का रुख: प्रतिष्ठा नहीं, किसान पहले
पत्रकारों से बात करते हुए कुमारस्वामी ने कहा, 'मैं पहले ही मुख्यमंत्री को बता चुका हूं कि तय समय पर मैं किसानों के साथ रहूंगा। अगर वह आते हैं तो उनका स्वागत है। इस मुद्दे का समाधान बातचीत से होना चाहिए।' उन्होंने जोर देकर कहा कि यह उनकी या मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा का मसला नहीं, बल्कि किसानों के हितों की लड़ाई है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसानों को भूमि अधिग्रहण पर कोई आपत्ति नहीं होगी तो उन्हें भी कोई आपत्ति नहीं है।
किसानों के आंदोलन की पृष्ठभूमि
कुमारस्वामी के अनुसार, लगभग 70 से 80 प्रतिशत किसान इस परियोजना के विरोध में हैं और उनका आंदोलन 450 दिनों से भी अधिक समय से चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि गुरुवार से कुछ लोगों को यह कहकर धरने पर बैठाया गया है कि वे जमीन देने और मुआवजा लेने के लिए तैयार हैं। उनके दावे के मुताबिक, करीब 20 लोगों का एक अलग टेंट उन किसानों के सामने लगाया गया है जो लंबे समय से भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं। गौरतलब है कि करीब दो महीने पहले किसान स्वयं कुमारस्वामी के पास अपनी समस्या लेकर पहुंचे थे।
मुआवजे और परियोजना पर सवाल
मुआवजे के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि सरकार ₹19 करोड़ मुआवजे का दावा कर रही है, लेकिन वास्तव में कितने किसानों को इसका लाभ मिला, यह स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि करीब ₹20,000 करोड़ की इस परियोजना के लिए लोगों पर जबरन मुआवजा थोपना उचित नहीं है। उनका तर्क है कि कुछ किसानों ने खेती लाभदायक न रहने के कारण जमीन छोड़ी है, लेकिन उनकी संख्या बेहद कम है — इससे यह नहीं माना जा सकता कि सभी किसान अधिग्रहण के पक्ष में हैं।
कांग्रेस पर पलटवार और ऐतिहासिक संदर्भ
कांग्रेस विधायक एचसी बालकृष्ण के इस बयान पर कि मुख्यमंत्री का प्रभावित क्षेत्र में जाना कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा कर सकता है, कुमारस्वामी ने तंज कसा — 'तो फिर सभी किसानों को विधान सौधा बुला लिया जाए।' उन्होंने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल (2006-07) का हवाला देते हुए बताया कि उस समय भी उन्होंने इस परियोजना का विरोध कर रहे 500 से 600 किसानों को तीन अलग-अलग अवसरों पर अपने सरकारी आवास 'कृष्णा' बुलाकर विस्तार से चर्चा की थी। कुमारस्वामी ने यह भी दावा किया कि विधानसभा के रिकॉर्ड गवाह हैं कि उस दौर में कांग्रेस के नेताओं ने भी बिदादी परियोजना का विरोध किया था। उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि वे अपने सलाहकारों से वे रिकॉर्ड निकलवाएं और देखें कि उनकी अपनी पार्टी ने तब क्या रुख अपनाया था।
भूमि अधिग्रहण कानून और आगे की राह
कुमारस्वामी ने कहा कि 2013 में यूपीए सरकार द्वारा बनाया गया भूमि अधिग्रहण कानून आज भी लागू है, लेकिन विडंबना यह है कि आज कांग्रेस की सरकार उसी कानून की भावना का उल्लंघन करते हुए परियोजना को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा करना चाहती है ताकि निषेधाज्ञा लागू की जा सके। उनके अनुसार यह मामला अंततः कानूनी लड़ाई से ही सुलझेगा। बेंगलुरु के विकास पर उन्होंने कहा, 'मैं शहर के विकास के खिलाफ नहीं हूं, लेकिन पहले मौजूदा बेंगलुरु की समस्याओं का समाधान होना चाहिए — वरना लोग नए शहर का मजाक उड़ाएंगे।'
घड़ी विवाद पर सफाई
अपनी कथित महंगी घड़ी को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर कुमारस्वामी ने कहा, 'यह प्रचार किया जा रहा है कि मैं ₹70 लाख की घड़ी पहनता हूं, जबकि मेरे हाथ में एचएमटी की घड़ी है जिस पर डॉ. बीआर आंबेडकर की तस्वीर बनी हुई है। यदि किसी को शक है तो एसआईटी से जांच करवा लें और अगर आरोप सही निकले तो घड़ी जब्त कर लें।' यह मामला ऐसे समय में उठा है जब राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी जनता दल (सेक्युलर) के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर है।