28 जून 2026
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बिदादी टाउनशिप विवाद: कुमारस्वामी ने जनसभा में सीएम शिवकुमार के लिए रखी खाली कुर्सी, खुली बहस की चुनौती

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बिदादी टाउनशिप विवाद: कुमारस्वामी ने जनसभा में सीएम शिवकुमार के लिए रखी खाली कुर्सी, खुली बहस की चुनौती

सारांश

बिदादी टाउनशिप विवाद में कुमारस्वामी ने एक खाली कुर्सी से सीएम शिवकुमार को आईना दिखाया — और शिवकुमार ने पत्रकारों के सवालों से मुँह फेर लिया। ₹हज़ारों करोड़ की परियोजना और 480 दिनों से जारी किसान आंदोलन के बीच यह टकराव अब केंद्र बनाम राज्य की लड़ाई का रूप लेता दिख रहा है।

मुख्य बातें

कुमारस्वामी ने 27 जून 2026 को भैरमंगला गांव में जनसभा के दौरान मंच पर सीएम डी.के.
शिवकुमार के नाम की खाली कुर्सी रखकर खुली बहस की चुनौती दी।
बिदादी के किसान और महिलाएं ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप परियोजना के खिलाफ लगभग 480 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं।
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि सरकार टाउनशिप के लिए लगभग 10 लाख पेड़ काटने की तैयारी में है, जबकि सीएम 15 लाख पौधे लगाने के अभियान में शामिल हैं।
कांग्रेस विधायक एच.सी.
बालकृष्ण ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री किसी भी परिस्थिति में सार्वजनिक बहस में शामिल नहीं होंगे।
कुछ गाँवों में अंतिम अधिसूचना के बाद लगभग 75 प्रतिशत भूमि मालिक मुआवजे पर जमीन देने को तैयार हुए थे, जबकि परियोजना समर्थक किसानों के एक समूह ने भी जनसभा स्थल पर नारेबाजी की।
क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप परियोजना को लेकर चल रहा सियासी टकराव 27 जून 2026 को और तीखा हो गया, जब कुमारस्वामी ने बिदादी के निकट भैरमंगला गांव में आयोजित जनसभा में मुख्यमंत्री के नाम की एक खाली कुर्सी मंच पर अपनी सीट के बगल में रखकर उन्हें प्रभावित किसानों के बीच खुली बहस के लिए सार्वजनिक निमंत्रण दिया। यह जनसभा उन किसानों, महिलाओं और बुजुर्गों के बीच हुई जो कथित तौर पर लगभग 480 दिनों से इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

कुमारस्वामी इससे पहले मुख्यमंत्री शिवकुमार को इस परियोजना पर प्रभावित क्षेत्र में सार्वजनिक बहस के लिए दो पत्र लिख चुके हैं। इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने उन्हें और उनके पाँच प्रतिनिधियों को विधान सौधा में चर्चा के लिए आमंत्रित किया था। हालांकि, शनिवार को बेंगलुरु में पत्रकारों द्वारा इस मुद्दे पर सवाल पूछे जाने पर मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कोई जवाब नहीं दिया और वहाँ से चले गए।

मीडिया से बातचीत में कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री में जनता के बीच खुली बहस करने का नैतिक साहस नहीं है। उन्होंने कहा, 'मैं पूरे साहस के साथ यहाँ आया हूँ। चर्चा जनता के सामने होनी चाहिए। मैं कहीं और क्यों जाऊँ? मुख्यमंत्री किसी भी कीमत पर यहाँ नहीं आएंगे, क्योंकि वे जनता का सामना नहीं कर सकते।'

कुमारस्वामी का पक्ष

कुमारस्वामी ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य मुख्यमंत्री को सड़क पर लाना नहीं, बल्कि उन किसानों, महिलाओं और बुजुर्गों के सामने चर्चा करना है जिन्होंने वर्षों से जनप्रतिनिधियों पर भरोसा किया है। उन्होंने कहा, 'मैं यहाँ उन लोगों का सम्मान करने आया हूँ, जो पिछले 460 दिनों से इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। यदि मुख्यमंत्री वास्तव में उनका सम्मान करते हैं तो उन्हें यहाँ आकर बहस करनी चाहिए।'

मुख्यमंत्री पर कटाक्ष करते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि एक ओर शिवकुमार 15 लाख पौधे लगाने के अभियान में शामिल हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार टाउनशिप परियोजना के लिए लगभग 10 लाख पेड़ काटने की तैयारी कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि वे किसानों के आंदोलन को भड़का नहीं रहे — किसान खुद अपनी पैतृक जमीन बचाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री शिवकुमार के करीबी और कांग्रेस विधायक एच.सी. बालकृष्ण ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री किसी भी परिस्थिति में सार्वजनिक बहस में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि कुमारस्वामी का असल उद्देश्य चर्चा नहीं, बल्कि क्षेत्र में अशांति और हिंसा का माहौल पैदा करना है।

बालकृष्ण ने कहा, 'अगर मुख्यमंत्री सार्वजनिक बहस के लिए तैयार भी हो जाते, तो बैठक की व्यवस्था उन्हें करनी चाहिए थी। कुमारस्वामी का मकसद केवल मुख्यमंत्री की छवि खराब करना है।' उन्होंने यह भी दावा किया कि सभी किसान परियोजना का विरोध नहीं कर रहे — कुछ गाँवों में पायलट आधार पर अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद लगभग 75 प्रतिशत भूमि मालिक मुआवजा लेकर अपनी जमीन देने के लिए तैयार हो गए थे।

ज़मीन पर स्थिति

गौरतलब है कि परियोजना के समर्थन में किसानों के एक अलग समूह ने विरोध कर रहे किसानों का सामना किया और नारेबाजी करते हुए कुमारस्वामी को उनके सामने लाने की माँग की, ताकि वे भी अपना पक्ष रख सकें। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए भैरमंगला और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। यह ऐसे समय में आया है जब बिदादी टाउनशिप परियोजना पर केंद्र और राज्य सरकार के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

आगे क्या

कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री से अहंकार छोड़कर किसानों की माँगें सुनने की अपील की है। दोनों पक्षों के बीच बातचीत की संभावना फिलहाल धुंधली दिखती है — एक पक्ष विधान सौधा में चर्चा पर अड़ा है, दूसरा प्रभावित क्षेत्र में खुली बहस पर। इस विवाद का अगला मोड़ इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या राज्य सरकार टाउनशिप परियोजना की अधिसूचना प्रक्रिया आगे बढ़ाती है या किसानों से सीधी बातचीत का रास्ता चुनती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पीछे की राजनीति उससे कहीं अधिक जटिल है — कुमारस्वामी एक केंद्रीय मंत्री हैं जो राज्य सरकार की परियोजना के खिलाफ जनसभा कर रहे हैं, जो केंद्र-राज्य संबंधों की परंपरागत सीमाओं को चुनौती देता है। दूसरी ओर, शिवकुमार का पत्रकारों के सवालों से बिना जवाब दिए चले जाना यह संकेत देता है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर रक्षात्मक स्थिति में है। आलोचकों का कहना है कि 75 प्रतिशत किसानों की सहमति और 480 दिनों के विरोध — दोनों आँकड़े एक साथ सच हो सकते हैं, जो दर्शाता है कि प्रभावित समुदाय खुद बँटा हुआ है। असली सवाल यह है कि क्या यह विवाद किसानों के हितों की लड़ाई है या दोनों नेताओं के बीच चुनावी ज़मीन तैयार करने की होड़।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिदादी टाउनशिप विवाद क्या है?
बेंगलुरु के निकट प्रस्तावित ग्रेटर बेंगलुरु इंटीग्रेटेड टाउनशिप परियोजना को लेकर स्थानीय किसान लगभग 480 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं, जिनका आरोप है कि इस परियोजना से उनकी पैतृक भूमि छिन जाएगी। केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी किसानों के समर्थन में उतरे हैं, जबकि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार परियोजना को आगे बढ़ाने के पक्ष में है।
कुमारस्वामी ने खाली कुर्सी क्यों रखी?
कुमारस्वामी ने 27 जून 2026 को भैरमंगला जनसभा में सीएम शिवकुमार के नाम की खाली कुर्सी रखकर उन्हें प्रभावित किसानों के बीच खुली बहस के लिए सार्वजनिक निमंत्रण दिया। इससे पहले वे दो पत्रों के ज़रिए भी यही माँग कर चुके थे, लेकिन मुख्यमंत्री ने विधान सौधा में बंद कमरे की बैठक का प्रस्ताव दिया था।
सीएम शिवकुमार ने सार्वजनिक बहस से इनकार क्यों किया?
कांग्रेस विधायक एच.सी. बालकृष्ण के अनुसार मुख्यमंत्री किसी भी परिस्थिति में सार्वजनिक बहस में शामिल नहीं होंगे। कांग्रेस का आरोप है कि कुमारस्वामी का उद्देश्य चर्चा नहीं, बल्कि क्षेत्र में अशांति का माहौल बनाना और मुख्यमंत्री की छवि खराब करना है।
क्या सभी किसान इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं?
नहीं। कांग्रेस विधायक बालकृष्ण के दावे के अनुसार, कुछ गाँवों में पायलट आधार पर अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद लगभग 75 प्रतिशत भूमि मालिक मुआवजा लेकर जमीन देने को तैयार हो गए थे। परियोजना समर्थक किसानों के एक समूह ने जनसभा स्थल पर नारेबाजी भी की।
इस विवाद में पेड़ों का मुद्दा क्यों उठाया गया?
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि एक ओर सीएम शिवकुमार 15 लाख पौधे लगाने के अभियान में शामिल हैं, वहीं राज्य सरकार टाउनशिप परियोजना के लिए लगभग 10 लाख पेड़ काटने की तैयारी कर रही है। यह विरोधाभास उन्होंने सरकार की नीतिगत असंगति को उजागर करने के लिए उठाया।
राष्ट्र प्रेस
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