डॉ. भूमा वीजी बनीं एआईपीएसआई की कुलपति, भारत के विदेश मंत्रालय ने किया चयन
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय विदेश मंत्रालय ने आईआरपीएस (सेवानिवृत्त) डॉ. भूमा वीजी को मॉरीशस स्थित अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक सर्विस एंड इनोवेशन (एआईपीएसआई) के कुलपति पद के लिए चुना है। यह संस्थान मॉरीशस गणराज्य के मोका जिले के रेडुइट (मिनिसी) में स्थित है। डॉ. भूमा वीजी से शीघ्र ही अपना नया कार्यभार संभालने की अपेक्षा की जा रही है।
एआईपीएसआई: संस्थान की पृष्ठभूमि
एआईपीएसआई को पहले सिविल सर्विस कॉलेज, मॉरीशस के नाम से जाना जाता था। इस अत्याधुनिक संस्थान के निर्माण के लिए 2017 में एक द्विपक्षीय समझौता हुआ था, जिसके तहत 4.74 मिलियन अमेरिकी डॉलर के अनुदान से इसका निर्माण कराया गया। इसका उद्घाटन मार्च 2025 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम ने संयुक्त रूप से किया था।
अफ्रीकी क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकास
एआईपीएसआई को पूरे अफ्रीकी क्षेत्र के लिए लोक सेवा प्रशिक्षण का एक प्रमुख केंद्र और उत्कृष्टता संस्था के रूप में विकसित किया जा रहा है। भविष्य में यह संस्थान डिग्री और अन्य मान्यता प्राप्त शैक्षणिक योग्यताएँ भी प्रदान करेगा, जिससे इसका दायरा और अधिक विस्तृत होगा।
डॉ. भूमा वीजी की नियुक्ति का महत्त्व
भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा किया गया यह चयन भारत-मॉरीशस द्विपक्षीय संबंधों और क्षमता-निर्माण सहयोग की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। आईआरपीएस यानी भारतीय राजस्व एवं प्रशासनिक सेवा की सेवानिवृत्त अधिकारी होने के नाते डॉ. भूमा वीजी के पास सार्वजनिक प्रशासन और नीति-निर्माण का व्यापक अनुभव है। यह नियुक्ति संस्थान को एक अनुभवी नेतृत्व प्रदान करेगी।
आगे की राह
एआईपीएसआई के कुलपति पद पर डॉ. भूमा वीजी के कार्यभार संभालने के बाद संस्थान के शैक्षणिक और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को और अधिक विस्तार मिलने की संभावना है। यह संस्थान न केवल मॉरीशस बल्कि व्यापक अफ्रीकी क्षेत्र में भारत की 'साउथ-साउथ कोऑपरेशन' नीति का एक सशक्त प्रतीक बनता जा रहा है।