24 जुलाई 2026
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एम्स पटना ने 'भिष्म क्यूब' पर टेबलटॉप अभ्यास किया, 22 अगस्त को रोहतास में बड़ी मॉक ड्रिल

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एम्स पटना ने 'भिष्म क्यूब' पर टेबलटॉप अभ्यास किया, 22 अगस्त को रोहतास में बड़ी मॉक ड्रिल

सारांश

एम्स पटना ने 'भिष्म क्यूब' आपदा-चिकित्सा प्रणाली पर बहु-एजेंसी टेबलटॉप अभ्यास किया — NDRF, बिहार पुलिस, HEOC और अग्निशमन सेवाओं सहित दर्जनों एजेंसियाँ एक मंच पर। असली परीक्षा 22 अगस्त को रोहतास के करमचट बांध पर होगी।

मुख्य बातें

एम्स पटना ने 24 जुलाई 2026 को 'भिष्म क्यूब' प्रणाली पर टेबलटॉप एक्सरसाइज का आयोजन किया।
पूर्ण पैमाने की बहु-एजेंसी मॉक ड्रिल 22 अगस्त 2026 को रोहतास जिले के करमचट बांध पर प्रस्तावित है।
अनिल कुमार ने काल्पनिक आपदा परिदृश्य के ज़रिए एजेंसियों को समन्वय प्रक्रिया से अवगत कराया।
NDRF , HEOC , SDRF , बिहार पुलिस , अग्निशमन सेवाएं और एयरपोर्ट अथॉरिटी सहित कई एजेंसियों ने भाग लिया।
कार्यकारी निदेशक प्रो.
राजू अग्रवाल ने एम्स पटना की ओर से पूर्ण तकनीकी सहयोग का आश्वासन दिया।

एम्स पटना ने 24 जुलाई 2026 को आपदा प्रबंधन तैयारियों को और पुख्ता करने के उद्देश्य से 'भिष्म क्यूब' प्रणाली पर एक टेबलटॉप एक्सरसाइज का आयोजन किया। इस अभ्यास का लक्ष्य 22 अगस्त 2026 को रोहतास जिले के करमचट बांध पर प्रस्तावित पूर्ण पैमाने की बहु-एजेंसी मॉक ड्रिल की तैयारियों को अंतिम रूप देना था। सामूहिक दुर्घटनाओं और बड़े हादसों में घायलों को त्वरित चिकित्सा सहायता पहुँचाने की क्षमता परखने के लिए यह पहल की गई है।

भिष्म क्यूब: क्या है यह प्रणाली

अभ्यास में प्रतिभागियों को 'भिष्म क्यूब' की कार्यप्रणाली से विस्तार से अवगत कराया गया। यह एक पोर्टेबल आपदा-चिकित्सा प्रणाली है जो बड़े हादसों में गंभीर रूप से घायल मरीजों के त्वरित उपचार, प्राथमिक चिकित्सा और सुरक्षित निकासी के लिए डिज़ाइन की गई है। विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय, संसाधनों के बेहतर उपयोग और जिम्मेदारियों के स्पष्ट विभाजन पर विशेष ज़ोर दिया गया।

मुख्य घटनाक्रम

एम्स पटना के ट्रॉमा सर्जरी विभागाध्यक्ष एवं 'भिष्म क्यूब' कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने एक काल्पनिक आपदा परिदृश्य प्रस्तुत करते हुए बताया कि ऐसी स्थितियों में उपलब्ध संसाधनों का कुशल उपयोग, घायलों की ट्राइएज, सुरक्षित निकासी और एजेंसियों के बीच तालमेल कैसे सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पूर्व तैयारी और समन्वित कार्रवाई सबसे महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम में हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (HEOC), बिहार सरकार की नोडल पदाधिकारी डॉ. रागिनी मिश्रा; राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के डॉ. सी.बी. नारायण; फायर ऑफिसर गया नंद सिंह; यातायात विभाग के मोहम्मद अली अंसारी; अग्निशमन सेवाएं (विमानन) के सहायक प्रबंधक एस.बी. दुबे; एयरपोर्ट अथॉरिटी के आदित्य और विशाल (F&CAO) सहित एम्स पटना के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

सहभागी एजेंसियाँ

इस टेबलटॉप एक्सरसाइज में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन, बिहार पुलिस तथा अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। सभी एजेंसियों ने 22 अगस्त 2026 की मॉक ड्रिल को सफल बनाने के लिए समन्वित रूप से काम करने की प्रतिबद्धता जताई।

संस्थागत नेतृत्व का संदेश

एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल और चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) प्रशांत कुमार सिंह ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि प्रभावी आपदा प्रबंधन केवल संसाधनों पर नहीं, बल्कि समय पर समन्वित कार्रवाई और संस्थागत तैयारी पर भी निर्भर करता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एम्स पटना प्रस्तावित मॉक ड्रिल के लिए हर स्तर पर तकनीकी और संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराएगा।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब बिहार जैसे बाढ़-संभावित राज्य में आपदा प्रतिक्रिया तंत्र को मज़बूत करना नीतिगत प्राथमिकता बन चुकी है। 22 अगस्त 2026 को रोहतास जिले के करमचट बांध पर होने वाली पूर्ण पैमाने की मॉक ड्रिल यह परखेगी कि आपदा की वास्तविक स्थिति में ये सभी एजेंसियाँ एकजुट होकर कितनी तेज़ी और दक्षता से काम कर सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी राज्य की आपदा-चिकित्सा प्रतिक्रिया अब तक खंडित और प्रतिक्रियाशील रही है। 22 अगस्त की मॉक ड्रिल असली कसौटी होगी — यह देखने के लिए कि टेबलटॉप की योजना मैदान पर कितनी उतरती है। जब तक मॉक ड्रिल के परिणाम सार्वजनिक नहीं होते, यह पहल एक सकारात्मक संकेत तो है, लेकिन व्यवस्थागत सुधार का प्रमाण नहीं।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'भिष्म क्यूब' क्या है और इसे आपदा प्रबंधन में क्यों इस्तेमाल किया जाता है?
'भिष्म क्यूब' एक पोर्टेबल आपदा-चिकित्सा प्रणाली है जो बड़े हादसों और सामूहिक दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल मरीजों के त्वरित उपचार, ट्राइएज और सुरक्षित निकासी के लिए डिज़ाइन की गई है। यह प्रणाली विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को सरल बनाती है और संसाधनों के कुशल उपयोग में सहायता करती है।
एम्स पटना ने यह टेबलटॉप अभ्यास क्यों आयोजित किया?
यह अभ्यास 22 अगस्त 2026 को रोहतास जिले के करमचट बांध पर प्रस्तावित पूर्ण पैमाने की बहु-एजेंसी मॉक ड्रिल की तैयारी के लिए आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य सभी सहभागी एजेंसियों को 'भिष्म क्यूब' की कार्यप्रणाली से परिचित कराना और उनकी भूमिकाएँ स्पष्ट करना था।
22 अगस्त 2026 की मॉक ड्रिल में कौन-कौन सी एजेंसियाँ भाग लेंगी?
मॉक ड्रिल में NDRF, HEOC (बिहार सरकार), SDRF, स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन, बिहार पुलिस, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं, एयरपोर्ट अथॉरिटी और एम्स पटना सहित कई एजेंसियाँ हिस्सा लेंगी। सभी ने समन्वित रूप से काम करने की प्रतिबद्धता जताई है।
इस अभ्यास में एम्स पटना की क्या भूमिका है?
एम्स पटना इस पूरी पहल का तकनीकी और संस्थागत नेतृत्व कर रहा है। कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि एम्स पटना मॉक ड्रिल के लिए हर स्तर पर सहयोग उपलब्ध कराएगा। ट्रॉमा सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार 'भिष्म क्यूब' कार्यक्रम के नोडल अधिकारी हैं।
बिहार में आपदा प्रबंधन की यह तैयारी क्यों ज़रूरी है?
बिहार प्रतिवर्ष बाढ़, औद्योगिक हादसों और सामूहिक दुर्घटनाओं से प्रभावित होता है, जिसके लिए त्वरित और समन्वित चिकित्सा प्रतिक्रिया अनिवार्य है। 'भिष्म क्यूब' जैसी प्रणालियों और बहु-एजेंसी मॉक ड्रिल से राज्य की आपदा-चिकित्सा क्षमता को संस्थागत रूप देने का प्रयास किया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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