प्रयागराज में भारतीय सेना की बाढ़ राहत मॉक ड्रिल, संगम-किला घाट पर आपदा तैयारियों की परखी क्षमता
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना के मध्य भारत क्षेत्र ने 13 जून 2026 को प्रयागराज के संवेदनशील तटीय इलाकों में व्यापक बाढ़ राहत एवं आपदा प्रतिक्रिया मॉक ड्रिल आयोजित की, जिसमें वीआईपी घाट, संगम क्षेत्र और किला घाट को केंद्र बनाया गया। इस अभ्यास का उद्देश्य मानसून से पहले सेना की परिचालन तत्परता को मज़बूत करना और नागरिक एजेंसियों के साथ समन्वय को परखना था।
मॉक ड्रिल में क्या-क्या परखा गया
अभ्यास के दौरान आपदा प्रबंधन के सभी प्रमुख पहलुओं को वास्तविक परिस्थितियों जैसी स्थिति में आज़माया गया। इनमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से नागरिकों का बचाव, घायलों की सुरक्षित निकासी, त्वरित चिकित्सा सहायता और राहत सामग्री का वितरण शामिल था। सेना के जवानों ने नावों, मेडिकल वैन, राहत सामग्री और संचार उपकरणों का उपयोग कर इन गतिविधियों का अभ्यास किया।
विशेष ध्यान तेज प्रतिक्रिया समय, संसाधनों की प्रभावी तैनाती और प्रभावित नागरिकों तक समय पर सहायता पहुँचाने पर दिया गया। सेना अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के नियमित अभ्यास जवानों की क्षमता बढ़ाते हैं और आपदा की स्थिति में प्रतिक्रिया टीमें तेज़ी, सटीकता और संवेदनशीलता के साथ काम कर पाती हैं।
बहु-एजेंसी समन्वय की परीक्षा
इस अभ्यास में नागरिक प्रशासन, स्थानीय पुलिस, राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करने की क्षमता को भी परखा गया। विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल की यह परीक्षा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वास्तविक आपदा में त्वरित अंतर-विभागीय संवाद ही जीवन बचाने में निर्णायक भूमिका निभाता है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब मानसून की दस्तक से पहले उत्तर प्रदेश के कई ज़िले बाढ़ की आशंका के मद्देनज़र अलर्ट पर हैं।
प्रयागराज क्यों है विशेष रूप से संवेदनशील
प्रयागराज में प्रतिवर्ष मानसून के दौरान गंगा और यमुना नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है, जिससे संगम क्षेत्र और निचले इलाकों में रहने वाले हज़ारों नागरिक प्रभावित होते हैं। यही कारण है कि यहाँ ऐसे अभ्यास की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है।
सेना के इस अभ्यास से न केवल परिचालन तत्परता सुनिश्चित होती है, बल्कि स्थानीय प्रशासन और नागरिकों में भी विश्वास का संचार होता है कि किसी भी आपात स्थिति में सशस्त्र बल तत्काल सहायता के लिए तैयार हैं।
सेना का संदेश
भारतीय सेना के मध्य भारत क्षेत्र ने इस अभ्यास के ज़रिए स्पष्ट किया कि प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय संकट की किसी भी स्थिति में सेना पूरी तत्परता के साथ नागरिकों के साथ खड़ी रहेगी। आने वाले मानसून सीज़न से पहले इस तरह की तैयारी को सेना की नियमित परिचालन प्रक्रिया का अहम हिस्सा माना जा रहा है।