तपोवन में सीआईएसएफ का बड़ा मॉक ड्रिल: बाढ़ और बादल फटने पर 12 एजेंसियों ने साझा किया रेस्क्यू अभ्यास
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) ने 2 जून 2025 को उत्तराखंड के तपोवन में एक बहु-एजेंसी मॉक ड्रिल का आयोजन किया, जिसमें बादल फटने और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में रेस्क्यू ऑपरेशन की तैयारियों का परीक्षण किया गया। इस अभ्यास में 12 से अधिक सरकारी और अर्धसैनिक संस्थाओं ने एकजुट होकर भाग लिया, जो उत्तराखंड की आपदा प्रबंधन क्षमता को मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मॉक ड्रिल में कौन-कौन शामिल हुए
इस संयुक्त अभ्यास में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), स्टेट फायर सर्विसेज़, स्थानीय पुलिस, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ), एनटीपीसी, आईबी, एलआईए, एसडीएम कार्यालय, एचसीसी और मेडिकल टीमें शामिल रहीं। इतनी बड़ी संख्या में विभिन्न एजेंसियों की भागीदारी इस अभ्यास को व्यापक और व्यावहारिक बनाती है।
ड्रिल का उद्देश्य और रूपरेखा
अभ्यास से पहले ही एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई थी, जिसके अनुसार पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया। मॉक ड्रिल का प्राथमिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना था कि बाढ़ या बादल फटने की स्थिति में तमाम एजेंसियाँ बिना किसी विलंब के समन्वित रेस्क्यू ऑपरेशन चला सकें। साथ ही, इस अभ्यास के ज़रिए सुरक्षाकर्मियों की मौजूदा कार्यकुशलता और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का भी आकलन किया गया।
तालमेल की अहमियत
विशेषज्ञों और अधिकारियों के अनुसार, आपदा प्रबंधन में अक्सर तालमेल की कमी रेस्क्यू ऑपरेशन को जटिल बना देती है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड में मानसून पूर्व तैयारियाँ तेज़ हो रही हैं। इस मॉक ड्रिल के ज़रिए यह परखा गया कि विभिन्न एजेंसियाँ एक साझा कमांड संरचना के तहत कितनी प्रभावी ढंग से काम कर सकती हैं।
उत्तराखंड की आपदा-संवेदनशीलता
गौरतलब है कि उत्तराखंड देश के सर्वाधिक आपदा-प्रवण राज्यों में गिना जाता है। 2013 की केदारनाथ त्रासदी से लेकर 2021 के तपोवन ग्लेशियर हादसे तक, इस राज्य ने बार-बार प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है। ऐसे में मानसून सीज़न से पहले इस तरह का बहु-एजेंसी अभ्यास आपदा प्रतिक्रिया तंत्र को और धारदार बनाने की कोशिश है।
आगे की कार्रवाई
मॉक ड्रिल को सफल घोषित किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, अभ्यास के दौरान सामने आई किसी भी कमज़ोरी को चिह्नित कर उसे दूर करने की दिशा में तत्काल कदम उठाए जाएंगे। आने वाले मानसून सीज़न में इस तैयारी की असली परीक्षा होगी।