मऊ में बाढ़ मॉक ड्रिल: घोसी-मधुबन में SDRF संग ग्रामीणों को दी रेस्क्यू की ट्रेनिंग
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के जनपद मऊ में प्रशासन ने 12 जून 2026 को संभावित बाढ़ से निपटने की तैयारी के तहत तहसील घोसी और मधुबन में बाढ़ आपदा प्रबंधन मॉक ड्रिल का आयोजन किया। जिलाधिकारी आनंद वर्धन ने बताया कि यह अभ्यास राज्य के 118 जनपदों में एक साथ आयोजित किए गए व्यापक तैयारी अभियान का हिस्सा है।
मॉक ड्रिल में क्या हुआ
इस अभ्यास में राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (PAC), पुलिस बल, तहसील प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों ने भाग लिया। एक काल्पनिक बाढ़ परिदृश्य तैयार किया गया, जिसमें प्रदर्शित किया गया कि बाढ़ के दौरान फँसे व्यक्ति का रेस्क्यू कैसे किया जाएगा, प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) कैसे दिया जाएगा और उसे सुरक्षित स्थान तक कैसे पहुँचाया जाएगा।
जिलाधिकारी ने बताया कि अभ्यास में स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई, क्योंकि आम जनता को जागरूक करना भी इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य था।
इस वर्ष बाढ़ की आशंका अधिक
जिलाधिकारी आनंद वर्धन ने कहा कि पिछले वर्ष बाढ़ की आवृत्ति और तीव्रता अपेक्षाकृत कम रही थी, लेकिन इस वर्ष संभावित बाढ़ को देखते हुए प्रशासन पहले से बेहतर तैयारी सुनिश्चित करना चाहता है। उनका मानना है कि यह मॉक ड्रिल बाढ़ प्रभावित गाँवों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगी।
तटबंध और सुरक्षा कार्यों की स्थिति
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा के संबंध में जिलाधिकारी ने बताया कि सिंचाई विभाग द्वारा हाई फ्लड लेवल (HFL) के आधार पर किए गए आकलन के अनुसार जनपद के अधिकांश संवेदनशील क्षेत्रों को तटबंधों से सुरक्षित किया जा चुका है। हालाँकि, अभी भी कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ तटबंध नहीं बने हैं।
ऐसे क्षेत्रों के लिए परियोजना प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है और शीघ्र स्वीकृति दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। जहाँ कटान का खतरा अधिक है, वहाँ बाढ़ सीजन शुरू होने से पहले सुरक्षा कार्य पूरे कराने की कोशिश की जा रही है।
15 जून तक पूरे होंगे दो प्रमुख कार्य
जिलाधिकारी आनंद वर्धन ने बताया कि वर्तमान में जनपद में दो महत्वपूर्ण सुरक्षा कार्य चल रहे हैं, जिनका निरीक्षण उन्होंने स्वयं किया है। प्रशासन का लक्ष्य है कि 15 जून 2026 तक ये दोनों कार्य पूरे कर लिए जाएँ, ताकि संभावित बाढ़ की स्थिति में अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षा प्रदान की जा सके। यह तैयारी इस बात का संकेत है कि प्रशासन इस बार आपदा प्रतिक्रिया को प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि पूर्व-निवारक रूप देना चाहता है।