29 अगस्त 2026
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पोरबंदर एयरपोर्ट पर मल्टी-एजेंसी मॉक ड्रिल: सीआईएसएफ, एएआई और पुलिस ने परखी आपदा तैयारी

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पोरबंदर एयरपोर्ट पर मल्टी-एजेंसी मॉक ड्रिल: सीआईएसएफ, एएआई और पुलिस ने परखी आपदा तैयारी

सारांश

पोरबंदर एयरपोर्ट पर सीआईएसएफ के नेतृत्व में हुई मल्टी-एजेंसी फायर मॉक ड्रिल ने आपदा प्रतिक्रिया की असली परीक्षा ली — एएआई, पुलिस और मेडिकल टीमें एक साथ मैदान में उतरीं, और डीब्रीफिंग से तैयारी को और धार दी गई।

मुख्य बातें

पोरबंदर एयरपोर्ट पर 29 अगस्त 2026 को लैंडिंग के दौरान विमान दुर्घटना परिदृश्य पर आधारित फुल-स्केल मल्टी-एजेंसी फायर मॉक ड्रिल आयोजित की गई।
सीआईएसएफ क्यूआरटी , एएआई फायर सर्विसेज , सिटी फायर सर्विसेज , स्थानीय पुलिस और मेडिकल टीमों ने एसओपी के अनुसार भाग लिया।
ड्रिल में आग बुझाना, घायलों को निकालना, परिधि नियंत्रण और रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन की क्षमताएँ परखी गईं।
अभ्यास का समापन डीब्रीफिंग सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिक्रिया की समीक्षा और सुधार पर चर्चा हुई।
सीआईएसएफ ने इसे सभी हितधारकों के बीच समन्वय और ऑपरेशनल तैयारी को मजबूत करने वाला अभ्यास बताया।

पोरबंदर एयरपोर्ट पर 29 अगस्त 2026 को लैंडिंग के दौरान विमान दुर्घटना जैसी आपात स्थिति को ध्यान में रखते हुए एक फुल-स्केल मल्टी-एजेंसी फायर मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस अभ्यास का उद्देश्य इमरजेंसी प्रतिक्रिया की गति, एजेंसियों के बीच समन्वय और ऑपरेशनल तैयारी को वास्तविक परिस्थितियों में परखना था।

मुख्य घटनाक्रम

इस अभ्यास में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की क्विक रिएक्शन टीम (क्यूआरटी), भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) फायर सर्विसेज, सिटी फायर सर्विसेज, स्थानीय पुलिस और मेडिकल टीमों ने एक साथ भाग लिया। सिम्युलेटेड दुर्घटना परिदृश्य में सभी एजेंसियों ने मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार अपनी-अपनी जिम्मेदारियाँ निभाते हुए साइट को त्वरित गति से सुरक्षित किया।

किन क्षमताओं की हुई परीक्षा

यह ड्रिल विशेष रूप से आग बुझाने, घायलों को निकालने, क्रैश साइट की परिधि नियंत्रण और रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन पर केंद्रित थी। सीआईएसएफ ने बताया कि इस अभ्यास ने सभी हितधारकों के बीच सहज समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया को मजबूत किया है। गौरतलब है कि भारतीय हवाईअड्डों पर इस प्रकार की ड्रिल सीआईएसएफ के नेतृत्व में नियमित अंतराल पर आयोजित की जाती है।

सीआईएसएफ की प्रतिक्रिया

सीआईएसएफ ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस अभ्यास की जानकारी साझा करते हुए लिखा — 'तैयारी अभ्यास के जरिए, तत्परता समन्वय के जरिए।' बल ने इस मल्टी-एजेंसी सहयोग को आपदा प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

डीब्रीफिंग और सुधार पर जोर

मॉक ड्रिल का समापन एक डीब्रीफिंग सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिक्रिया की समीक्षा की गई और भविष्य में तैयारियों को और सुदृढ़ करने पर विस्तृत चर्चा हुई। यह सत्र सभी भाग लेने वाली एजेंसियों के लिए अपनी कमियों को पहचानने और उन्हें दूर करने का अवसर रहा।

क्यों है यह अभ्यास जरूरी

विमानन सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, हवाईअड्डों पर इस तरह के फुल-स्केल अभ्यास इमरजेंसी सेवाओं की वास्तविक प्रतिक्रिया क्षमता का सबसे विश्वसनीय पैमाना होते हैं। पोरबंदर एयरपोर्ट जैसे छोटे हवाईअड्डों पर इस तरह की ड्रिल यह सुनिश्चित करती है कि संसाधनों की सीमा के बावजूद आपात स्थिति में प्रतिक्रिया प्रभावी रहे। यह अभ्यास इमरजेंसी मैनेजमेंट को और अधिक सुगठित बनाने की दिशा में एक निरंतर प्रयास का हिस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि डीब्रीफिंग में उठाई गई कमियाँ वास्तव में दूर होती हैं या महज कागज़ों पर दर्ज होकर रह जाती हैं। भारत में विमानन आपदा प्रबंधन की समीक्षाएँ बार-बार एजेंसियों के बीच रियल-टाइम संचार की कमी को रेखांकित करती रही हैं। मॉक ड्रिल की सफलता तभी सार्थक है जब उसके निष्कर्ष अगली ड्रिल से पहले क्रियान्वित हों — केवल प्रेस रिलीज़ तक सीमित न रहें।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पोरबंदर एयरपोर्ट पर मॉक ड्रिल क्यों आयोजित की गई?
यह ड्रिल लैंडिंग के दौरान विमान दुर्घटना जैसी आपात स्थिति में इमरजेंसी सेवाओं की प्रतिक्रिया क्षमता और एजेंसियों के बीच समन्वय परखने के लिए आयोजित की गई। इसका उद्देश्य वास्तविक आपदा से पहले तैयारियों की खामियाँ पहचानना और उन्हें दूर करना था।
इस मॉक ड्रिल में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल थीं?
इस अभ्यास में सीआईएसएफ की क्यूआरटी, एएआई फायर सर्विसेज, सिटी फायर सर्विसेज, स्थानीय पुलिस और मेडिकल टीमें शामिल थीं। सभी ने एसओपी के अनुसार अपनी-अपनी भूमिकाएँ निभाईं।
मॉक ड्रिल में किन परिस्थितियों का अभ्यास किया गया?
ड्रिल में आग बुझाना, घायलों को निकालना, क्रैश साइट की परिधि नियंत्रण और बहु-एजेंसी रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन का अभ्यास किया गया। यह एक फुल-स्केल सिम्युलेटेड विमान दुर्घटना परिदृश्य पर आधारित था।
डीब्रीफिंग सत्र का क्या उद्देश्य था?
मॉक ड्रिल के बाद आयोजित डीब्रीफिंग सत्र में सभी भाग लेने वाली एजेंसियों की प्रतिक्रिया की समीक्षा की गई और भविष्य में तैयारियों को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। यह सत्र कमियों को पहचानने और सुधारात्मक कदम तय करने का अवसर था।
भारतीय हवाईअड्डों पर सीआईएसएफ की भूमिका क्या है?
सीआईएसएफ भारतीय हवाईअड्डों पर सुरक्षा का प्रमुख बल है और आपात स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया की जिम्मेदारी इसी पर होती है। यह बल एएआई, पुलिस और मेडिकल टीमों के साथ समन्वय करते हुए विमानन सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
राष्ट्र प्रेस
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