मनोज जरांगे का अंतरवाली सराटी में फिर आमरण अनशन, जालना पुलिस ने जारी किया 10 शर्तों वाला नोटिस
सारांश
मुख्य बातें
मराठा आरक्षण आंदोलन के अगुआ मनोज जरांगे पाटिल ने 29 अगस्त को अंतरवाली सराटी में एक बार फिर आमरण अनशन शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि मराठा समुदाय का तीन साल का संघर्ष अब 'जीत के करीब' पहुँच चुका है और समुदाय को एकजुट होकर इस निर्णायक मोड़ पर डटे रहना होगा।
मुख्य घटनाक्रम
अनशन की शुरुआत से पहले जालना पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 168 के तहत जरांगे पाटिल को एक औपचारिक नोटिस भेजा। इस नोटिस में स्पष्ट किया गया कि अनशन के दौरान 10 सख्त शर्तों का पालन अनिवार्य होगा। पुलिस ने चेतावनी दी कि नोटिस का उल्लंघन होने पर इसे कानूनी कार्रवाई में साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
पुलिस की 10 प्रमुख शर्तें
नोटिस में शामिल प्रमुख शर्तें इस प्रकार हैं: अनशन के कारण यातायात अवरुद्ध नहीं होना चाहिए और वाहनों की पार्किंग निर्धारित स्थान पर ही होगी। इसके लिए आयोजकों को स्वयंसेवक नियुक्त कर उनके नाम व मोबाइल नंबर पुलिस को देने होंगे। ध्वनि प्रदूषण नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। अनशन की रूपरेखा में कोई भी बदलाव करने से पहले पुलिस को सूचित करना अनिवार्य होगा।
जालना जिलाधिकारी द्वारा लागू जमावबंदी और हथियारबंदी आदेश का कड़ाई से पालन करना होगा। बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में आयोजकों को स्वयं जनरेटर की व्यवस्था करनी होगी। मंच से किसी भी प्रकार का भड़काऊ या उकसाने वाला भाषण प्रतिबंधित रहेगा। किसी भी जाति, धर्म या समुदाय की भावनाएँ आहत न हों, इसका ध्यान रखना होगा। अनशन स्थल व आसपास ज्वलनशील पदार्थों का उपयोग वर्जित रहेगा। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय और बॉम्बे उच्च न्यायालय की मुंबई व औरंगाबाद पीठ द्वारा विभिन्न याचिकाओं में दिए गए निर्देशों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।
जरांगे पाटिल की प्रतिक्रिया
पुलिस नोटिस के जवाब में जरांगे पाटिल ने लिखित रूप से स्पष्ट किया कि उनका अनशन पूर्णतः शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक है। उन्होंने कहा कि अंतरवाली सराटी में पिछले तीन वर्षों से यह आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से चलता आया है और आगे भी ऐसा ही रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्वयं कानूनों का उल्लंघन करती है और पुलिस बल के माध्यम से मराठा समाज पर अत्याचार किया जाता है, जैसा कि पूर्व के आंदोलनों में देखा गया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई अनुचित घटना होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
समुदाय से अपील
जरांगे पाटिल ने पूरे महाराष्ट्र में मराठा समुदाय के लोगों से आह्वान किया कि वे अपने घरों से बाहर निकलें और विरोध स्थल पर एकत्रित होकर इस आंदोलन को मज़बूती दें। यह ऐसे समय में आया है जब मराठा आरक्षण का मुद्दा न्यायिक और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर अनिर्णीत बना हुआ है।
आगे क्या
गौरतलब है कि यह जरांगे पाटिल का इस मुद्दे पर कई बार का अनशन है, और हर बार आंदोलन ने महाराष्ट्र की राजनीति को हिला दिया है। प्रशासन की सतर्कता और 10 शर्तों वाला नोटिस इस बात का संकेत है कि अधिकारी किसी भी कानून-व्यवस्था की स्थिति से बचने के लिए पहले से तैयार हैं। आने वाले दिनों में आंदोलन की दिशा और सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।