29 अगस्त 2026
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मनोज जरांगे का अंतरवाली सराटी में फिर आमरण अनशन, जालना पुलिस ने जारी किया 10 शर्तों वाला नोटिस

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मनोज जरांगे का अंतरवाली सराटी में फिर आमरण अनशन, जालना पुलिस ने जारी किया 10 शर्तों वाला नोटिस

सारांश

मनोज जरांगे पाटिल का अंतरवाली सराटी में फिर आमरण अनशन — तीन साल के संघर्ष को वे 'जीत के करीब' बता रहे हैं। जालना पुलिस ने BNSS धारा 168 के तहत 10 शर्तों वाला नोटिस थमाया, जिसका जरांगे ने शांतिपूर्ण आंदोलन का हवाला देते हुए जवाब दिया और किसी भी अनुचित घटना की जिम्मेदारी सरकार पर डाली।

मुख्य बातें

मनोज जरांगे पाटिल ने 29 अगस्त को अंतरवाली सराटी में मराठा आरक्षण की माँग पर आमरण अनशन फिर से शुरू किया।
जालना पुलिस ने BNSS की धारा 168 के तहत नोटिस जारी कर अनशन पर 10 सख्त शर्तें लगाईं।
शर्तों में यातायात अवरोध न करना, ध्वनि प्रदूषण नियमों का पालन, भड़काऊ भाषण पर प्रतिबंध और सर्वोच्च न्यायालय व बॉम्बे उच्च न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन शामिल है।
जरांगे पाटिल ने जवाब में कहा कि अनशन शांतिपूर्ण है और किसी भी घटना की जिम्मेदारी सरकार की होगी।
उन्होंने पूरे महाराष्ट्र में मराठा समुदाय से विरोध स्थल पर एकत्रित होने की अपील की।

मराठा आरक्षण आंदोलन के अगुआ मनोज जरांगे पाटिल ने 29 अगस्त को अंतरवाली सराटी में एक बार फिर आमरण अनशन शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि मराठा समुदाय का तीन साल का संघर्ष अब 'जीत के करीब' पहुँच चुका है और समुदाय को एकजुट होकर इस निर्णायक मोड़ पर डटे रहना होगा।

मुख्य घटनाक्रम

अनशन की शुरुआत से पहले जालना पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 168 के तहत जरांगे पाटिल को एक औपचारिक नोटिस भेजा। इस नोटिस में स्पष्ट किया गया कि अनशन के दौरान 10 सख्त शर्तों का पालन अनिवार्य होगा। पुलिस ने चेतावनी दी कि नोटिस का उल्लंघन होने पर इसे कानूनी कार्रवाई में साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।

पुलिस की 10 प्रमुख शर्तें

नोटिस में शामिल प्रमुख शर्तें इस प्रकार हैं: अनशन के कारण यातायात अवरुद्ध नहीं होना चाहिए और वाहनों की पार्किंग निर्धारित स्थान पर ही होगी। इसके लिए आयोजकों को स्वयंसेवक नियुक्त कर उनके नाम व मोबाइल नंबर पुलिस को देने होंगे। ध्वनि प्रदूषण नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। अनशन की रूपरेखा में कोई भी बदलाव करने से पहले पुलिस को सूचित करना अनिवार्य होगा।

जालना जिलाधिकारी द्वारा लागू जमावबंदी और हथियारबंदी आदेश का कड़ाई से पालन करना होगा। बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में आयोजकों को स्वयं जनरेटर की व्यवस्था करनी होगी। मंच से किसी भी प्रकार का भड़काऊ या उकसाने वाला भाषण प्रतिबंधित रहेगा। किसी भी जाति, धर्म या समुदाय की भावनाएँ आहत न हों, इसका ध्यान रखना होगा। अनशन स्थल व आसपास ज्वलनशील पदार्थों का उपयोग वर्जित रहेगा। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय और बॉम्बे उच्च न्यायालय की मुंबई व औरंगाबाद पीठ द्वारा विभिन्न याचिकाओं में दिए गए निर्देशों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए।

जरांगे पाटिल की प्रतिक्रिया

पुलिस नोटिस के जवाब में जरांगे पाटिल ने लिखित रूप से स्पष्ट किया कि उनका अनशन पूर्णतः शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक है। उन्होंने कहा कि अंतरवाली सराटी में पिछले तीन वर्षों से यह आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से चलता आया है और आगे भी ऐसा ही रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्वयं कानूनों का उल्लंघन करती है और पुलिस बल के माध्यम से मराठा समाज पर अत्याचार किया जाता है, जैसा कि पूर्व के आंदोलनों में देखा गया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई अनुचित घटना होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

समुदाय से अपील

जरांगे पाटिल ने पूरे महाराष्ट्र में मराठा समुदाय के लोगों से आह्वान किया कि वे अपने घरों से बाहर निकलें और विरोध स्थल पर एकत्रित होकर इस आंदोलन को मज़बूती दें। यह ऐसे समय में आया है जब मराठा आरक्षण का मुद्दा न्यायिक और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर अनिर्णीत बना हुआ है।

आगे क्या

गौरतलब है कि यह जरांगे पाटिल का इस मुद्दे पर कई बार का अनशन है, और हर बार आंदोलन ने महाराष्ट्र की राजनीति को हिला दिया है। प्रशासन की सतर्कता और 10 शर्तों वाला नोटिस इस बात का संकेत है कि अधिकारी किसी भी कानून-व्यवस्था की स्थिति से बचने के लिए पहले से तैयार हैं। आने वाले दिनों में आंदोलन की दिशा और सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह मूल प्रश्न — कि क्या मराठा समुदाय को संवैधानिक दायरे में आरक्षण मिल सकता है — का उत्तर नहीं देता। सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व फैसलों और 50% आरक्षण सीमा की बाधा के बीच यह आंदोलन राजनीतिक दबाव तो बनाता है, पर न्यायिक समाधान की राह संकरी बनी हुई है।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनोज जरांगे पाटिल ने फिर से अनशन क्यों शुरू किया?
मनोज जरांगे पाटिल ने मराठा समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के तहत आरक्षण दिलाने की माँग पर 29 अगस्त को अंतरवाली सराटी में आमरण अनशन फिर शुरू किया। उन्होंने कहा कि तीन साल का संघर्ष अब 'जीत के करीब' है और समुदाय को एकजुट रहना होगा।
जालना पुलिस ने जरांगे पाटिल को कौन-सा नोटिस भेजा?
जालना पुलिस ने BNSS की धारा 168 के तहत नोटिस जारी कर अनशन पर 10 शर्तें लगाईं, जिनमें यातायात अवरोध न करना, ध्वनि प्रदूषण नियमों का पालन, भड़काऊ भाषण पर प्रतिबंध और न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन शामिल है। नोटिस में कहा गया कि उल्लंघन पर इसे कानूनी कार्रवाई में साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
जरांगे पाटिल ने पुलिस नोटिस का क्या जवाब दिया?
जरांगे पाटिल ने लिखित जवाब में कहा कि उनका अनशन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्वयं कानूनों का उल्लंघन करती है और किसी भी अनुचित घटना की पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
मराठा आरक्षण आंदोलन का अब तक क्या हुआ है?
मराठा आरक्षण का मुद्दा तीन वर्षों से अधिक समय से महाराष्ट्र में सक्रिय है। सर्वोच्च न्यायालय पहले ही महाराष्ट्र सरकार के मराठा आरक्षण कानून को 50% सीमा का उल्लंघन बताते हुए निरस्त कर चुका है, जिससे यह मुद्दा न्यायिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर अनिर्णीत बना हुआ है।
अनशन स्थल अंतरवाली सराटी कहाँ है?
अंतरवाली सराटी महाराष्ट्र के जालना जिले में स्थित एक गाँव है, जो मराठा आरक्षण आंदोलन का प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहाँ मनोज जरांगे पाटिल पहले भी कई बार आमरण अनशन कर चुके हैं।
राष्ट्र प्रेस
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