आशी चौकसे की आइची-नागोया 2026 पर नज़र: 'छोटी चीज़ें परफेक्ट करें, कोई नहीं रोक पाएगा'
सारांश
मुख्य बातें
भोपाल की 24 वर्षीय राइफल शूटर आशी चौकसे अपने दूसरे एशियन गेम्स — आइची-नागोया 2026 — में उतरने से पहले एक स्पष्ट और महत्वाकांक्षी लक्ष्य लेकर चल रही हैं: स्वर्ण पदक। 2022 एशियन गेम्स (जो 2023 में आयोजित हुए) में दो रजत और एक कांस्य पदक जीत चुकीं आशी का कहना है कि पहले अनुभव ने उन्हें मानसिक और तकनीकी दोनों स्तरों पर तैयार किया है।
पिछले एशियन गेम्स की उपलब्धियाँ
2023 में हुए एशियन गेम्स में आशी ने महिलाओं के 10 मीटर एयर राइफल टीम इवेंट में रजत, महिलाओं के 50 मीटर राइफल 3पी टीम इवेंट में रजत और महिलाओं के 50 मीटर राइफल 3पी व्यक्तिगत इवेंट में कांस्य पदक हासिल किया था। उल्लेखनीय यह है कि उसी 50 मीटर 3पी कैटेगरी में भारत ने स्वर्ण और कांस्य जीते, जबकि मेज़बान चीन को अपने ही देश में रजत से संतोष करना पड़ा था।
भोपाल कैंप: इंटेंसिटी और इनोवेशन
एशियन गेम्स की तैयारी के लिए भारतीय शूटिंग टीम ने भोपाल में एक गहन प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लिया। आशी के अनुसार, 10 दिन के इस कैंप में तीन-चार मैच और तीन-चार फाइनल सिमुलेशन आयोजित किए गए — जो किसी भी सामान्य कार्यक्रम से कहीं अधिक है। टीम ने 120-शॉट के विशेष मैच भी खेले, जो आधिकारिक प्रतियोगिताओं में नहीं होते, लेकिन सहनशक्ति और निरंतरता परखने के लिए डिज़ाइन किए गए थे। आशी ने कहा, "मैच खेलना बहुत इंटेंस होता है, भले ही वह सिर्फ 60-शॉट का मैच हो।"
बायोफीडबैक और स्पोर्ट्स साइकोलॉजी का सहारा
तकनीकी तैयारी के साथ-साथ टीम ने एक स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट के साथ मिलकर काम किया है। शूटिंग के दौरान श्वास और शारीरिक प्रतिक्रियाओं को मापने के लिए बायोफीडबैक टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया। आशी ने बताया कि साइकोलॉजिस्ट ने सोने से पहले और जागने के बाद विशेष एक्सरसाइज़ करने की सलाह दी, जिससे उनकी शूटिंग में सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने कहा, "इससे हमें खुद को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली है।"
चीन से मुकाबले का उत्साह
आशी खासतौर पर चीन की शूटिंग टीम के साथ प्रतिस्पर्धा को लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने हँसते हुए कहा, "2023 में हुए एशियन गेम्स में महिलाओं की 50 मीटर 3पी कैटेगरी में हमें स्वर्ण और कांस्य मिला था, जबकि उन्हें अपने ही देश में रजत पदक मिला था। इसलिए हो सकता है कि वे अभी भी इसे लेकर हमसे नाराज़ हों और बदला लेने की सोच रहे हों।" यह आत्मविश्वास उस खिलाड़ी का है जो अब दबाव को अवसर के रूप में देखती है।
संयोग से शुरू हुआ सफर, अब स्वर्ण की दौड़
आशी ने 2018 में एनसीसी कैंप के दौरान पहली बार राइफल थामी थी — एक ऐसा संयोग जो जल्द ही जुनून में बदल गया। उस शुरुआती अनुभव के बाद उन्हें स्टेट शूटिंग एकेडमी में चुना गया और महज़ कुछ वर्षों में वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमकने लगीं। अब आइची-नागोया 2026 में वे एक अनुभवी, आत्मविश्वासी और लक्ष्य-केंद्रित एथलीट के रूप में उतरेंगी — और इस बार निशाना सिर्फ स्वर्ण पर है।