29 अगस्त 2026
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वाल्मीकि घोटाला: कुमारस्वामी का आरोप — नागेंद्र का इस्तीफा कांग्रेस को बचाने की कोशिश

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वाल्मीकि घोटाला: कुमारस्वामी का आरोप — नागेंद्र का इस्तीफा कांग्रेस को बचाने की कोशिश

सारांश

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कर्नाटक के पूर्व मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे को ₹84 करोड़ के वाल्मीकि निगम घोटाले से कांग्रेस सरकार को बचाने की कोशिश बताया। राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने अभियोजन मंजूरी पर कैबिनेट से राय माँगी है, जिससे राज्य सरकार की मुश्किलें बढ़ी हैं।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने 29 अगस्त को आरोप लगाया कि बी.
नागेंद्र को कांग्रेस की शर्मिंदगी बचाने के लिए इस्तीफा देने पर मजबूर किया गया।
कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित ₹84 करोड़ के घोटाले में आदिवासी कल्याण की राशि के गबन का आरोप है।
कुमारस्वामी ने अपने खिलाफ मामलों को राजनीति-प्रेरित बताया और कहा कि उन पर सरकारी धन के दुरुपयोग का कोई आरोप नहीं।
राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने नागेंद्र, पूर्व मंत्री रेणुकाचार्य और BJP विधायक गली जनार्दन रेड्डी के खिलाफ अभियोजन मंजूरी पर कैबिनेट की राय माँगी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, कर्नाटक सरकार इन अभियोजन फैसलों को लेकर कठिन स्थिति में है।

केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने 29 अगस्त को बेंगलुरु में मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि कर्नाटक के पूर्व योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र को कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित ₹84 करोड़ के वित्तीय घोटाले की आँच से कांग्रेस सरकार को बचाने के लिए इस्तीफा देने पर मजबूर किया गया। उनका यह बयान नागेंद्र के उस दावे के जवाब में आया, जिसमें पूर्व मंत्री ने स्वयं कहा था कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी को शर्मिंदगी से बचाने के लिए पद छोड़ा।

कुमारस्वामी के आरोप

कुमारस्वामी ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा, 'यह शर्मिंदगी किस वजह से हुई? उन्हें इस्तीफा देने के लिए क्यों मजबूर किया गया? ₹84 करोड़ का घोटाला क्या था? क्या इस घोटाले से बचने के लिए नागेंद्र से इस्तीफा दिलवाया गया?' उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी समुदायों के कल्याण के लिए आवंटित यह राशि गबन कर व्यक्तियों में बाँट दी गई और नागेंद्र का इस्तीफा राज्य सरकार की जिम्मेदारी से पलायन था।

नागेंद्र के पलटवार पर प्रतिक्रिया

नागेंद्र ने यह भी पूछा था कि क्या कुमारस्वामी पर भी मामले दर्ज हैं। इस पर केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ जो मामले हैं, वे राजनीति-प्रेरित हैं और उन पर सरकारी धन के गबन का कोई आरोप नहीं है। उन्होंने कहा, 'ये आरोप पिछले 14 सालों से चल रहे हैं। उन्होंने मामलों को जिंदा रखा है, लेकिन वे एचडी कुमारस्वामी को चुप नहीं करा सकते। क्या मुझ पर पैसे लेने का कोई आरोप है? क्या मुझ पर सरकारी खजाने को नुकसान पहुँचाने का आरोप है?'

दो बार मुख्यमंत्री रहे, फिर भी मामले खुले रखे

कुमारस्वामी ने यह भी कहा कि दो बार मुख्यमंत्री रहने के बावजूद उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज मामलों को दबाने या बंद करने की कोशिश नहीं की। उन्होंने कहा, 'अगर मैंने कुछ गलत किया होता, तो दो बार मुख्यमंत्री बनने पर मामलों को दफना सकता था। मैंने ऐसा नहीं किया। मैंने उन्हें जाँच के लिए खुला छोड़ दिया है।' यह बयान उनके आत्मविश्वास और राजनीतिक पारदर्शिता के दावे के रूप में देखा जा रहा है।

राज्यपाल ने मांगी कैबिनेट की राय

इस बीच, कर्नाटक के राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने नागेंद्र के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी के मामले में राज्य कैबिनेट से राय मांगी है। राज्यपाल ने पूर्व मंत्री रेणुकाचार्य और भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक गली जनार्दन रेड्डी के खिलाफ अलग-अलग मामलों में भी अभियोजन की मंजूरी पर सरकार की राय माँगी है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, कर्नाटक सरकार इन अभियोजन मंजूरी के फैसलों को लेकर फिलहाल कठिन स्थिति में है।

आगे क्या होगा

वाल्मीकि निगम घोटाले की जाँच जारी है और राज्यपाल की राय-माँग ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर राजनीतिक दबाव और बढ़ा दिया है। यह मामला आदिवासी कल्याण निधि के कथित दुरुपयोग को लेकर राज्य में सत्तारूढ़ दल के लिए एक बड़ी परीक्षा बन चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि अनुसूचित जनजाति समुदायों के साथ विश्वासघात का मामला है — जिस पर राजनीतिक बयानबाजी भारी पड़ रही है। कुमारस्वामी का हमला रणनीतिक है, क्योंकि राज्यपाल की अभियोजन मंजूरी वाली माँग ने सरकार को पहले ही रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है। लेकिन यह भी ध्यान देने योग्य है कि BJP और जनता दल (सेकुलर) के अपने नेताओं — रेणुकाचार्य और गली जनार्दन रेड्डी — के खिलाफ भी अभियोजन मंजूरी के मामले राज्यपाल के पास लंबित हैं, जो इस पूरे विवाद को एकतरफा नहीं रहने देते। असली सवाल यह है कि ₹84 करोड़ की आदिवासी कल्याण निधि किसके निर्देश पर और किन खातों में गई — यह जाँच जितनी देर से सामने आएगी, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप उतने ही तेज होंगे।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाल्मीकि निगम घोटाला क्या है?
कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित तौर पर ₹84 करोड़ की वित्तीय अनियमितताएँ सामने आई हैं, जिसमें आदिवासी समुदायों के कल्याण के लिए आवंटित राशि का गबन कर व्यक्तियों में बाँटने का आरोप है। इस घोटाले के बाद कर्नाटक के तत्कालीन योजना मंत्री बी. नागेंद्र ने इस्तीफा दिया था।
बी. नागेंद्र ने इस्तीफा क्यों दिया?
बी. नागेंद्र ने खुद कहा है कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी को शर्मिंदगी से बचाने के लिए इस्तीफा दिया। हालाँकि, केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी का आरोप है कि उन्हें वाल्मीकि घोटाले की आँच से सरकार को बचाने के लिए मजबूरन पद छोड़ना पड़ा।
राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने क्या कदम उठाया है?
राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने नागेंद्र के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी के मामले में राज्य कैबिनेट से राय माँगी है। इसके साथ ही पूर्व मंत्री रेणुकाचार्य और BJP विधायक गली जनार्दन रेड्डी के खिलाफ अलग-अलग मामलों में भी अभियोजन मंजूरी पर सरकार की राय माँगी गई है।
कुमारस्वामी ने अपने खिलाफ मामलों पर क्या कहा?
कुमारस्वामी ने कहा कि उनके खिलाफ दर्ज मामले राजनीति-प्रेरित हैं और उन पर सरकारी धन के गबन का कोई आरोप नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि दो बार मुख्यमंत्री रहने के बावजूद उन्होंने इन मामलों को दबाने की कोशिश नहीं की और उन्हें जाँच के लिए खुला छोड़ा।
इस विवाद का कर्नाटक की राजनीति पर क्या असर होगा?
वाल्मीकि निगम घोटाले ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर दबाव बढ़ाया है, खासकर राज्यपाल की अभियोजन मंजूरी माँग के बाद। सरकारी सूत्रों के अनुसार, सरकार इन फैसलों को लेकर फिलहाल कठिन स्थिति में है और विपक्ष इसे आदिवासी समुदायों के साथ अन्याय के रूप में उठा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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