28 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

वाल्मीकि निगम घोटाला: कर्नाटक मंत्री बी. नागेंद्र का इस्तीफा, बोले — 'दलित हूं इसलिए निशाना बनाया जा रहा हूं'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
वाल्मीकि निगम घोटाला: कर्नाटक मंत्री बी. नागेंद्र का इस्तीफा, बोले — 'दलित हूं इसलिए निशाना बनाया जा रहा हूं'

सारांश

वाल्मीकि निगम घोटाले की आंच में घिरे कर्नाटक मंत्री बी. नागेंद्र ने इस्तीफा दे दिया — लेकिन इसे हार नहीं, बल्कि संवैधानिक लड़ाई का आगाज़ बताया। दलित पहचान को हथियार बनाकर वे BJP पर पलटवार कर रहे हैं और 15 आदिवासी विधानसभा क्षेत्रों में जनसंपर्क की तैयारी में हैं।

मुख्य बातें

नागेंद्र ने 28 अगस्त 2026 को कर्नाटक मंत्रिमंडल से इस्तीफे की घोषणा की।
इस्तीफे का कारण कथित वाल्मीकि जनजातीय कल्याण निगम घोटाला ; नागेंद्र ने खुद को निर्दोष बताया।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने उन्हें निर्दोष बताया था, फिर भी नागेंद्र ने पार्टी हित में इस्तीफा दिया।
ईडी ने उन्हें गिरफ्तार किया था; तीन महीने जेल में रहने के बाद जमानत मिली।
नागेंद्र ने BJP पर 'मनुस्मृति की सोच' थोपने और दलित-आदिवासी नेताओं को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाया।
वे 15 अनुसूचित जनजाति बहुल विधानसभा क्षेत्रों में जनसंपर्क अभियान चलाएंगे।

कर्नाटक के योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र ने 28 अगस्त 2026 को मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने की घोषणा की। कथित वाल्मीकि जनजातीय कल्याण निगम घोटाले को लेकर जारी विवाद के बीच उन्होंने यह फैसला स्वेच्छा से लिया, ताकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और उसके नेतृत्व को राजनीतिक असहजता से बचाया जा सके। नागेंद्र ने खुद को निर्दोष बताया और आरोप लगाया कि उन्हें दलित-आदिवासी पृष्ठभूमि के कारण जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।

विधान सौधा में भावुक प्रेस कॉन्फ्रेंस

बेंगलुरु के विधान सौधा में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में नागेंद्र भावुक नजर आए। उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मुझे स्पष्ट कहा कि मैं हर स्तर पर निर्दोष हूं और मुझे इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है। लेकिन पार्टी को किसी तरह की परेशानी न हो, इसलिए मैं स्वेच्छा से अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री को सौंप रहा हूं।' उन्होंने उन पत्रकारों का भी आभार जताया जिन्होंने इस पूरे मामले में उनका समर्थन किया।

विपक्ष पर गंभीर आरोप

नागेंद्र ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर आरोप लगाया कि उसने जानबूझकर विधानसभा की कार्यवाही बाधित की, जिससे सूखा, कावेरी जल विवाद, केपीएससी भर्ती विवाद और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि BJP 'मनुस्मृति की सोच' को लागू करना चाहती है, जबकि देश संविधान और डॉ. भीमराव आंबेडकर के सिद्धांतों पर चलता है। रामायण के शंबूक प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज के संवैधानिक युग में इस तरह के भेदभाव की कोई जगह नहीं है।

ईडी गिरफ्तारी और जांच का हवाला

नागेंद्र ने बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें गिरफ्तार किया था और वह तीन महीने जेल में रहे, जिसके बाद उन्हें जमानत मिली। उन्होंने सवाल उठाया — 'क्या मैंने कहीं कोई हस्ताक्षर किए? क्या मेरे पास से एक रुपया भी बरामद हुआ?' उन्होंने यह भी कहा कि 2024 में भी उन्होंने पार्टी को बचाने के लिए इस्तीफे की पेशकश की थी, जिसके बाद सीआईडी और एसआईटी जांच हुई।

दोहरे मानदंड का आरोप

नागेंद्र ने तर्क दिया कि यदि उन्हें जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, तो केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भी इस्तीफा देना चाहिए, क्योंकि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधीन है। उन्होंने राज्यपाल के उस फैसले पर भी सवाल उठाया जिसमें उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी गई, जबकि केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के खिलाफ इसी तरह का मामला वर्षों से लंबित है। उन्होंने पूछा, 'मुझे ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है? क्या इसलिए कि मैं दलित या आदिवासी हूं?'

आगे की राह

नागेंद्र ने स्पष्ट किया कि वह 15 विधानसभा क्षेत्रों में जाकर अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों से सीधे मिलेंगे और अपनी बात रखेंगे। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का उल्लेख करते हुए कहा कि कर्नाटक से आने वाले इतने वरिष्ठ नेता को इस विवाद की वजह से असहज नहीं किया जाना चाहिए। नागेंद्र ने दोहराया कि यह इस्तीफा उनका व्यक्तिगत निर्णय है और वह अपने ऊपर लगे आरोपों के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक लड़ाई जारी रखेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

सत्तारूढ़ दल के भीतर ही समावेशिता के दावों पर सवाल खड़े करता है। गौरतलब है कि ईडी जांच और राज्यपाल की अभियोजन स्वीकृति के बावजूद नागेंद्र ने अदालत में अपनी बेगुनाही साबित करने का संकल्प दोहराया है — जो बताता है कि यह राजनीतिक अध्याय अभी खत्म नहीं हुआ। 15 आदिवासी विधानसभा क्षेत्रों में उनका प्रस्तावित जनसंपर्क अभियान इस मामले को जाति-न्याय के व्यापक विमर्श से जोड़ सकता है, जो 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के लिए असहज समीकरण बना सकता है।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाल्मीकि जनजातीय कल्याण निगम घोटाला क्या है?
यह कर्नाटक के वाल्मीकि जनजातीय कल्याण निगम में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा मामला है, जिसमें मंत्री बी. नागेंद्र पर आरोप लगे हैं। ईडी ने इस मामले में नागेंद्र को गिरफ्तार किया था और वे तीन महीने जेल में रहे, जिसके बाद उन्हें जमानत मिली।
बी. नागेंद्र ने इस्तीफा क्यों दिया?
नागेंद्र ने कहा कि वे स्वेच्छा से इस्तीफा दे रहे हैं ताकि कांग्रेस पार्टी और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के विकास कार्यों पर इस विवाद का असर न पड़े। उन्होंने खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया और कहा कि मुख्यमंत्री ने भी उन्हें इस्तीफा देने से मना किया था।
नागेंद्र ने BJP पर क्या आरोप लगाए?
नागेंद्र ने BJP पर विधानसभा की कार्यवाही जानबूझकर बाधित करने और दलित-आदिवासी नेताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि BJP 'मनुस्मृति की सोच' को लागू करना चाहती है और दलित, आदिवासी व अल्पसंख्यक समुदायों की सत्ता में भागीदारी रोकना चाहती है।
नागेंद्र के इस्तीफे के बाद आगे क्या होगा?
नागेंद्र ने कहा कि वे 15 अनुसूचित जनजाति बहुल विधानसभा क्षेत्रों में जनसंपर्क करेंगे और कांग्रेस हाईकमान के सामने अपनी स्थिति रखेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरोपों के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक लड़ाई जारी रखेंगे।
क्या नागेंद्र ने राज्यपाल के फैसले पर सवाल उठाए?
हां, नागेंद्र ने राज्यपाल द्वारा उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति देने पर सवाल उठाया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के खिलाफ इसी तरह के लंबित मामले का हवाला देते हुए दोहरे मानदंड का आरोप लगाया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 4 घंटे पहले
  3. कल
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 2 सप्ताह पहले
  6. 2 सप्ताह पहले
  7. 2 सप्ताह पहले
  8. 2 सप्ताह पहले