सूरत में 'वर्क फ्रॉम होम' के नाम पर ₹5.98 लाख की साइबर ठगी, हीरा व्यापारी गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
सूरत साइबर क्राइम सेल ने स्टार रेटिंग आधारित अंशकालिक 'वर्क फ्रॉम होम' नौकरी का झाँसा देकर एक 23 वर्षीय युवक से ₹5,98,800 की ठगी के मामले में 28 अगस्त 2026 को एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी ने कमीशन के बदले अपने बैंक खाते की जानकारी साइबर ठगों को सौंपी थी, जिसके ज़रिये पीड़ित का पैसा हड़पा गया।
कैसे बिछाया गया ठगी का जाल
अधिकारियों के अनुसार, अज्ञात आरोपियों ने टेलीग्राम के माध्यम से पीड़ित से संपर्क किया और स्टार रेटिंग के काम पूरे करने पर आकर्षक वेतन का वादा करते हुए अंशकालिक नौकरी की पेशकश की। इसके बाद आरोपी ने एक फर्जी वेबसाइट का लिंक भेजा और पीड़ित को उस पर पंजीकृत कराया।
शुरुआत में पीड़ित को विश्वास दिलाने के लिए कुछ काम पूरे करने पर छोटी रकम भी दी गई। इसके बाद आरोपी ने कथित तौर पर कहा कि आगे के काम अनलॉक करने और अधिक कमाई के लिए अतिरिक्त शुल्क जमा करना होगा। इन दावों पर भरोसा करते हुए पीड़ित ने विभिन्न बैंक खातों में कुल ₹5,98,800 स्थानांतरित कर दिए, जो कभी वापस नहीं किए गए।
शिकायत और जाँच की शुरुआत
ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद सूरत साइबर क्राइम सेल ने जाँच शुरू की। पुलिस इंस्पेक्टर वीडी मंडोरा ने एक विशेष टीम गठित की, जिसने तकनीकी जाँच के ज़रिये आरोपियों का पता लगाया।
जाँच में पुलिस ने पाया कि पीड़ित के ₹1 लाख रुपए सूरत के कपोदरा क्षेत्र की गायत्री सोसाइटी में रहने वाले हीरा व्यापारी रवि बरैया के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक खाते में जमा हुए थे। रवि बरैया मूल रूप से भावनगर जिले के गरियाधर का निवासी है।
आरोपी की भूमिका और गिरफ्तारी
जाँचकर्ताओं के अनुसार, रवि बरैया ने साइबर धोखाधड़ी में इस्तेमाल के लिए कमीशन के बदले अपने बैंक खाते की जानकारी सह-आरोपी गौतम बरैया को सौंपी थी। साइबर अपराध प्रकोष्ठ के अनुसार, इस बैंक खाते के माध्यम से साइबर धोखाधड़ी से जुड़े ₹7,11,475 के लेनदेन हुए थे।
यह भी सामने आया कि राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर इस खाते से जुड़ी पाँच अन्य शिकायतें विभिन्न राज्यों में पहले से दर्ज थीं, जो इस नेटवर्क की व्यापक पहुँच को दर्शाती हैं।
दर्ज धाराएँ
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4), 336(2), 338, 336(3), 340(2), 61(2) और 3(5) के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2008 की धारा 66(डी) के तहत साइबर अपराध पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस सह-आरोपी गौतम बरैया और अन्य की तलाश जारी रखे हुए है।
आम जनता के लिए सावधानी
यह मामला उस बढ़ते चलन की ओर इशारा करता है जिसमें साइबर अपराधी टेलीग्राम जैसे मंचों का उपयोग कर 'वर्क फ्रॉम होम' और 'पार्ट-टाइम जॉब' के नाम पर भोले-भाले लोगों को निशाना बनाते हैं। गौरतलब है कि इस तरह की ठगी में पहले थोड़ा पैसा देकर विश्वास जीता जाता है, फिर बड़ी रकम ऐंठी जाती है। नागरिकों को किसी भी अनजान लिंक पर पैसे निवेश करने से पहले सत्यापन करने की सलाह दी जाती है।