28 अगस्त 2026
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सूरत में 'वर्क फ्रॉम होम' के नाम पर ₹5.98 लाख की साइबर ठगी, हीरा व्यापारी गिरफ्तार

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सूरत में 'वर्क फ्रॉम होम' के नाम पर ₹5.98 लाख की साइबर ठगी, हीरा व्यापारी गिरफ्तार

सारांश

टेलीग्राम पर स्टार रेटिंग का काम, फर्जी वेबसाइट और 'अनलॉक फीस' का जाल — इसी तरकीब से एक 23 वर्षीय युवक से ₹5.98 लाख ठगे गए। सूरत पुलिस ने उस हीरा व्यापारी को दबोचा जिसने कमीशन पर अपना बैंक खाता ठगों को सौंपा था।

मुख्य बातें

सूरत साइबर क्राइम सेल ने 28 अगस्त 2026 को रवि बरैया को ₹5,98,800 की साइबर ठगी के मामले में गिरफ्तार किया।
पीड़ित 23 वर्षीय युवक को टेलीग्राम पर स्टार रेटिंग आधारित 'वर्क फ्रॉम होम' नौकरी का झाँसा दिया गया।
आरोपी रवि बरैया ने कमीशन के बदले अपने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक खाते की जानकारी सह-आरोपी गौतम बरैया को दी।
इस खाते से साइबर धोखाधड़ी के ₹7,11,475 के लेनदेन हुए; NCRP पर 5 अन्य राज्यों से शिकायतें भी दर्ज।
भारतीय न्याय संहिता, 2023 और IT अधिनियम, 2008 की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज।

सूरत साइबर क्राइम सेल ने स्टार रेटिंग आधारित अंशकालिक 'वर्क फ्रॉम होम' नौकरी का झाँसा देकर एक 23 वर्षीय युवक से ₹5,98,800 की ठगी के मामले में 28 अगस्त 2026 को एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी ने कमीशन के बदले अपने बैंक खाते की जानकारी साइबर ठगों को सौंपी थी, जिसके ज़रिये पीड़ित का पैसा हड़पा गया।

कैसे बिछाया गया ठगी का जाल

अधिकारियों के अनुसार, अज्ञात आरोपियों ने टेलीग्राम के माध्यम से पीड़ित से संपर्क किया और स्टार रेटिंग के काम पूरे करने पर आकर्षक वेतन का वादा करते हुए अंशकालिक नौकरी की पेशकश की। इसके बाद आरोपी ने एक फर्जी वेबसाइट का लिंक भेजा और पीड़ित को उस पर पंजीकृत कराया।

शुरुआत में पीड़ित को विश्वास दिलाने के लिए कुछ काम पूरे करने पर छोटी रकम भी दी गई। इसके बाद आरोपी ने कथित तौर पर कहा कि आगे के काम अनलॉक करने और अधिक कमाई के लिए अतिरिक्त शुल्क जमा करना होगा। इन दावों पर भरोसा करते हुए पीड़ित ने विभिन्न बैंक खातों में कुल ₹5,98,800 स्थानांतरित कर दिए, जो कभी वापस नहीं किए गए।

शिकायत और जाँच की शुरुआत

ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद सूरत साइबर क्राइम सेल ने जाँच शुरू की। पुलिस इंस्पेक्टर वीडी मंडोरा ने एक विशेष टीम गठित की, जिसने तकनीकी जाँच के ज़रिये आरोपियों का पता लगाया।

जाँच में पुलिस ने पाया कि पीड़ित के ₹1 लाख रुपए सूरत के कपोदरा क्षेत्र की गायत्री सोसाइटी में रहने वाले हीरा व्यापारी रवि बरैया के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक खाते में जमा हुए थे। रवि बरैया मूल रूप से भावनगर जिले के गरियाधर का निवासी है।

आरोपी की भूमिका और गिरफ्तारी

जाँचकर्ताओं के अनुसार, रवि बरैया ने साइबर धोखाधड़ी में इस्तेमाल के लिए कमीशन के बदले अपने बैंक खाते की जानकारी सह-आरोपी गौतम बरैया को सौंपी थी। साइबर अपराध प्रकोष्ठ के अनुसार, इस बैंक खाते के माध्यम से साइबर धोखाधड़ी से जुड़े ₹7,11,475 के लेनदेन हुए थे।

यह भी सामने आया कि राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर इस खाते से जुड़ी पाँच अन्य शिकायतें विभिन्न राज्यों में पहले से दर्ज थीं, जो इस नेटवर्क की व्यापक पहुँच को दर्शाती हैं।

दर्ज धाराएँ

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4), 336(2), 338, 336(3), 340(2), 61(2) और 3(5) के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2008 की धारा 66(डी) के तहत साइबर अपराध पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस सह-आरोपी गौतम बरैया और अन्य की तलाश जारी रखे हुए है।

आम जनता के लिए सावधानी

यह मामला उस बढ़ते चलन की ओर इशारा करता है जिसमें साइबर अपराधी टेलीग्राम जैसे मंचों का उपयोग कर 'वर्क फ्रॉम होम' और 'पार्ट-टाइम जॉब' के नाम पर भोले-भाले लोगों को निशाना बनाते हैं। गौरतलब है कि इस तरह की ठगी में पहले थोड़ा पैसा देकर विश्वास जीता जाता है, फिर बड़ी रकम ऐंठी जाती है। नागरिकों को किसी भी अनजान लिंक पर पैसे निवेश करने से पहले सत्यापन करने की सलाह दी जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सुविधाकर्ता हैं जो जानबूझकर इस तंत्र का हिस्सा बनते हैं। NCRP पर एक ही खाते से पाँच राज्यों में शिकायतें यह बताती हैं कि यह कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि संगठित नेटवर्क का हिस्सा है। असली सवाल यह है कि बैंक KYC प्रक्रिया इन खातों को इतनी आसानी से ठगी के लिए उपलब्ध होने से क्यों नहीं रोक पाती। जब तक बैंकों और साइबर एजेंसियों के बीच रियल-टाइम समन्वय नहीं होगा, तब तक गिरफ्तारियाँ नेटवर्क की जड़ें नहीं काट पाएँगी।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूरत में 'वर्क फ्रॉम होम' साइबर ठगी का मामला क्या है?
सूरत में एक 23 वर्षीय युवक को टेलीग्राम के ज़रिये स्टार रेटिंग आधारित अंशकालिक नौकरी का झाँसा देकर ₹5,98,800 की ठगी की गई। आरोपियों ने फर्जी वेबसाइट पर पंजीकरण कराया और 'काम अनलॉक' करने के नाम पर बड़ी रकम ऐंठी।
गिरफ्तार आरोपी रवि बरैया की क्या भूमिका थी?
रवि बरैया सूरत के कपोदरा क्षेत्र का हीरा व्यापारी है, जिसने कमीशन के बदले अपने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक खाते की जानकारी सह-आरोपी गौतम बरैया को साइबर ठगी के लिए उपलब्ध कराई। पीड़ित के ₹1 लाख इसी खाते में जमा हुए थे।
साइबर ठगी का शिकार होने पर क्या करें?
तुरंत साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज करें। जितनी जल्दी शिकायत होगी, बैंक खाते को फ्रीज़ कर पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी अधिक होती है।
इस मामले में कौन-सी कानूनी धाराएँ लगाई गई हैं?
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4), 336(2), 338, 336(3), 340(2), 61(2) और 3(5) के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2008 की धारा 66(डी) के तहत सूरत के साइबर अपराध पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है।
क्या इस नेटवर्क से अन्य राज्यों में भी ठगी हुई है?
हाँ, NCRP पर जाँच के दौरान रवि बरैया के बैंक खाते से जुड़ी पाँच अन्य शिकायतें विभिन्न राज्यों में दर्ज मिलीं। इस खाते के ज़रिये कुल ₹7,11,475 के संदिग्ध लेनदेन हुए, जो एक संगठित साइबर ठगी नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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