सूरत साइबर क्राइम: ₹19.60 लाख की निवेश धोखाधड़ी में फरार आरोपी गिरफ्तार, खाते में ₹2.73 करोड़ का लेनदेन
सारांश
मुख्य बातें
सूरत शहर साइबर क्राइम पुलिस ने 13 अगस्त 2026 को 'ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0' के अंतर्गत ₹19.60 लाख के निवेश धोखाधड़ी मामले में एक फरार आरोपी को गिरफ्तार किया। जाँच में सामने आया कि साइबर ठगी की रकम स्थानांतरित करने के लिए कथित तौर पर जिस बैंक खाते का उपयोग किया गया, उसमें लगभग ₹2.73 करोड़ का लेनदेन हुआ था।
धोखाधड़ी का तरीका
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने शिकायतकर्ता के बेटे को शेयर बाजार में निवेश का प्रलोभन देकर फँसाया। उन्होंने 'बीआरपी फंड 100-डे वेल्थ लीप प्रोग्राम' नामक योजना के तहत 390 प्रतिशत तक रिटर्न का वादा किया। संपर्क के लिए 'बीआरपी फंड-ग्रो टुगेदर-008' नामक व्हाट्सएप ग्रुप और वेबसाइट 'ऐप.तोलोययी.कॉम' का उपयोग किया गया।
पीड़ित को वेबसाइट पर लॉग इन कराया गया, जहाँ झूठे मुनाफे के आँकड़े दिखाए गए ताकि निवेश पर वास्तविक रिटर्न का भ्रम बना रहे। इसके बाद कथित तौर पर रकम अलग-अलग बैंक खातों में स्थानांतरित कर दी गई।
गिरफ्तार आरोपी
ताज़ा गिरफ्तारी में कपोदरा, सूरत निवासी 30 वर्षीय विवेक बेल्दिया शामिल हैं, जो पेशे से ड्राइवर हैं और मूल रूप से भावनगर जिले के तलजा तालुका के मखनिया गाँव के रहने वाले हैं। इससे पहले इस मामले में दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है — अहमदाबाद के वेजलपुर इलाके के 28 वर्षीय सत्यजीत मंजेरैया (मूलतः अमरेली निवासी) और सूरत के वेसु इलाके के 39 वर्षीय व्यापारी पंकजकुमार रमानी (मूलतः राजकोट जिले के जसदन तालुका के डोडियाला गाँव के)।
बैंक खाते का दुरुपयोग
जाँच में खुलासा हुआ कि पंकजकुमार रमानी ने कमीशन के बदले सत्यजीत मंजेरैया का आईसीआईसीआई बैंक का चालू खाता हासिल किया और फिर वही खाता कमीशन लेकर विवेक बेल्दिया को सौंप दिया। इसके बाद यह खाता फरार आरोपियों को उपलब्ध कराया गया, जिन्होंने इसे साइबर ठगी की रकम के लेनदेन के लिए इस्तेमाल किया।
कानूनी कार्रवाई
साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 318(4), 336(2), 338, 336(3), 340(2), 61(2) और 3(5) तथा सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम, 2008 की धारा 66(डी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता ने सूरत साइबर क्राइम सेल में ₹19.60 लाख के नुकसान की औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब गुजरात में 'म्यूल अकाउंट' — यानी किराये पर या कमीशन पर लिए गए बैंक खाते — के जरिए साइबर ठगी की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। पुलिस का कहना है कि जाँच जारी है और अन्य फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है।