17 जुलाई 2026
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गुजरात पुलिस का 'ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0' लॉन्च, ₹2,289 करोड़ के साइबर फ्रॉड नेटवर्क पर होगी सर्जिकल स्ट्राइक

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गुजरात पुलिस का 'ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0' लॉन्च, ₹2,289 करोड़ के साइबर फ्रॉड नेटवर्क पर होगी सर्जिकल स्ट्राइक

सारांश

गुजरात पुलिस का 'ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0' महज़ एक अभियान नहीं — यह साइबर ठगी के वित्तीय ढाँचे पर सीधा प्रहार है। पहले चरण में ₹2,289 करोड़ के फ्रॉड और 638 गिरफ्तारियों के बाद, अब राज्यभर में म्यूल खातों के पूरे नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने की तैयारी है।

मुख्य बातें

गुजरात पुलिस ने 3 जून 2025 से 'ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0' राज्यव्यापी स्तर पर लागू किया।
अभियान की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री एवं गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने की।
पहले चरण (दिसंबर 2025) में ₹2,289 करोड़ के फ्रॉड लेन-देन उजागर, 565 एफआईआर और 638 गिरफ्तारियाँ ।
913 म्यूल खातों का संबंध देशभर के 4,000 से अधिक साइबर अपराध मामलों से पाया गया।
2.0 के तहत अब तक ₹53.55 करोड़ और ₹288 करोड़ से अधिक के नेटवर्क ध्वस्त।
जाँच में I4C , नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल और हेल्पलाइन 1930 के डेटा का उपयोग।

गुजरात पुलिस ने 3 जून 2025 से पूरे राज्य में 'ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0' लागू कर दिया है — एक राज्यव्यापी अभियान जिसका लक्ष्य उन म्यूल बैंक खातों को चिह्नित कर नष्ट करना है, जिनके ज़रिए साइबर ठग ऑनलाइन फ्रॉड की रकम को स्थानांतरित और छिपाते हैं। यह निर्णय सोमवार रात आयोजित राज्यस्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंस समीक्षा बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता गुजरात के उपमुख्यमंत्री एवं गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने की।

बैठक में क्या तय हुआ

बैठक में पुलिस महानिदेशक समेत राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे, जबकि सभी शहरों के पुलिस आयुक्त और जिला पुलिस प्रमुख वर्चुअल माध्यम से जुड़े। अधिकारियों के अनुसार, बैठक में म्यूल खातों के विरुद्ध 'सर्जिकल स्ट्राइक' जैसी केंद्रित कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए गए, ताकि साइबर ठगी के वित्तीय नेटवर्क की रीढ़ तोड़ी जा सके और आम नागरिकों को सुरक्षित किया जा सके।

सूत्रों के अनुसार, यह नियमित समीक्षा बैठक थी जिसमें साइबर अपराध के विरुद्ध चल रही कार्रवाइयों की प्रगति का आकलन किया गया और आगामी रणनीति को अंतिम रूप दिया गया।

ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 की उपलब्धियाँ

नया अभियान 'ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0' की सफलता के बाद शुरू किया गया है। पहला अभियान 1 दिसंबर से 31 दिसंबर 2025 तक गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस द्वारा संचालित किया गया था। उस एक महीने में पुलिस ने ₹2,289 करोड़ के संदिग्ध साइबर फ्रॉड लेन-देन उजागर किए, 565 एफआईआर दर्ज कीं और 638 आरोपियों को गिरफ्तार किया।

इसके अतिरिक्त, 913 म्यूल खातों के विरुद्ध कार्रवाई की गई और पाया गया कि इनका संबंध देशभर में दर्ज 4,000 से अधिक साइबर अपराध मामलों से था — यह आँकड़ा दर्शाता है कि ये खाते कितने व्यापक नेटवर्क की धुरी बने हुए थे।

म्यूल खाते क्यों हैं साइबर फ्रॉड की जड़

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, म्यूल खाते साइबर ठगी गिरोहों की सबसे महत्त्वपूर्ण कड़ी होते हैं। ठगी की रकम को कई खातों में तेज़ी से घुमाया जाता है, जिससे उसका मूल स्रोत छिप जाता है और जाँच एजेंसियों के लिए धन की वसूली कठिन हो जाती है। जाँच के लिए इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C), नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल और साइबर हेल्पलाइन 1930 के डेटा का उपयोग किया जा रहा है।

2.0 में अब तक की सफलताएँ

ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0 के अंतर्गत इस वर्ष पहले ही कई बड़े नेटवर्क ध्वस्त किए जा चुके हैं। अलग-अलग अभियानों में गुजरात पुलिस ने ₹53.55 करोड़ और ₹288 करोड़ से अधिक के साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। अहमदाबाद, सूरत, राजकोट, भावनगर और आनंद सहित कई शहरों से आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में साइबर ठगी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और संगठित गिरोह म्यूल खातों के बड़े नेटवर्क के ज़रिए अवैध धन को वैध बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0 का मुख्य लक्ष्य ऐसे खातों और उनसे जुड़े नेटवर्क को चिह्नित करना, फ्रीज करना और पूरी तरह निष्क्रिय करना है। गौरतलब है कि यह अभियान गुजरात को साइबर अपराध के वित्तीय नेटवर्क के विरुद्ध देश में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या म्यूल खातों को फ्रीज़ करने से पीड़ितों की रकम वापस मिल पाती है — जो अब तक की कार्रवाइयों में सबसे कमज़ोर कड़ी रही है। ₹2,289 करोड़ के लेन-देन उजागर होने के बावजूद, वसूली के आँकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। साइबर ठगी के गिरोह अक्सर अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार काम करते हैं, इसलिए केवल गुजरात में कार्रवाई से नेटवर्क पूरी तरह नहीं टूटेगा — इसके लिए केंद्रीय समन्वय और अन्य राज्यों की सक्रिय भागीदारी ज़रूरी है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0 क्या है?
यह गुजरात पुलिस का राज्यव्यापी साइबर अपराध विरोधी अभियान है, जो 3 जून 2025 से शुरू हुआ है। इसका उद्देश्य उन म्यूल बैंक खातों को चिह्नित कर फ्रीज़ करना और नष्ट करना है जिनका उपयोग साइबर ठग ऑनलाइन फ्रॉड की रकम छिपाने के लिए करते हैं।
म्यूल अकाउंट क्या होते हैं और ये साइबर ठगी में कैसे काम करते हैं?
म्यूल खाते वे बैंक खाते होते हैं जिनका उपयोग साइबर ठगी गिरोह अवैध रकम को कई खातों में तेज़ी से घुमाने के लिए करते हैं, जिससे धन का मूल स्रोत छिप जाता है। इससे जाँच एजेंसियों के लिए रकम की वसूली और अपराधियों की पहचान करना बेहद कठिन हो जाता है।
ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 में क्या हासिल हुआ था?
दिसंबर 2025 में चले पहले अभियान में गुजरात पुलिस ने ₹2,289 करोड़ के संदिग्ध साइबर फ्रॉड लेन-देन उजागर किए, 565 एफआईआर दर्ज कीं और 638 आरोपियों को गिरफ्तार किया। 913 म्यूल खातों का संबंध देशभर के 4,000 से अधिक साइबर अपराध मामलों से पाया गया।
ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0 की निगरानी कौन कर रहा है?
अभियान की राज्यस्तरीय निगरानी उपमुख्यमंत्री एवं गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी कर रहे हैं। संचालन की जिम्मेदारी गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर है, जो I4C और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के डेटा का उपयोग कर रहा है।
आम नागरिक साइबर ठगी से कैसे सुरक्षित रह सकते हैं?
साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपना बैंक खाता किराए पर देना या उपयोग करने देना कानूनी अपराध है।
राष्ट्र प्रेस
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