15 जुलाई 2026
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ऑपरेशन म्यूल हंट: चंडीगढ़ साइबर पुलिस ने म्यूल खाता नेटवर्क के दो आरोपी दबोचे, बहु-राज्यीय धोखाधड़ी का भंडाफोड़

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ऑपरेशन म्यूल हंट: चंडीगढ़ साइबर पुलिस ने म्यूल खाता नेटवर्क के दो आरोपी दबोचे, बहु-राज्यीय धोखाधड़ी का भंडाफोड़

सारांश

चंडीगढ़ साइबर पुलिस ने 'ऑपरेशन म्यूल हंट' में दो आरोपियों को दबोचा, जो कथित तौर पर दिल्ली, मुंबई, गोवा सहित कई राज्यों में सक्रिय साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क के लिए म्यूल बैंक खातों से अवैध धन का हस्तांतरण कर रहे थे। I4C की सूचना पर आधारित यह कार्रवाई बहु-राज्यीय साइबर अपराध के विरुद्ध केंद्र-राज्य समन्वय की बड़ी मिसाल है।

मुख्य बातें

चंडीगढ़ साइबर क्राइम पुलिस ने 30 मई 2026 को 'ऑपरेशन म्यूल हंट' के तहत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपी हैं — सलमान अंसारी (मोहाली, पंजाब) और भीम सरोज (खुड्डा लौहारा, चंडीगढ़)।
आरोपियों ने भीम सरोज के बैंक खाते का उपयोग म्यूल खाते के रूप में किया और धोखाधड़ी की रकम चेक से निकालकर धोखेबाजों को सौंपी।
संदिग्ध खाते दिल्ली, तमिलनाडु, गोवा, मुंबई, गुजरात सहित कई राज्यों की धोखाधड़ी शिकायतों से जुड़े पाए गए।
गृह मंत्रालय के I4C से प्राप्त सूचना के आधार पर मामले का भंडाफोड़ हुआ।
दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी; नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश में जाँच का दायरा बढ़ाया जा रहा है।

चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने 30 मई 2026 को संगठित साइबर अपराध के विरुद्ध चलाए जा रहे 'ऑपरेशन म्यूल हंट' के तहत दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो कथित तौर पर एक बहु-राज्यीय साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क में म्यूल बैंक खातों के ज़रिये अवैध धन के हस्तांतरण में संलिप्त थे। यह कार्रवाई सेक्टर 17, चंडीगढ़ स्थित पुलिस स्टेशन-साइबर क्राइम में दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

पुलिस ने जिन दो व्यक्तियों को हिरासत में लिया है, उनकी पहचान पंजाब के मोहाली के गाँव मिलख निवासी सलमान अंसारी पुत्र समिक अंसारी और चंडीगढ़ के खुड्डा लौहारा निवासी भीम सरोज पुत्र राम किशुन के रूप में की गई है। दोनों के विरुद्ध म्यूल खातों के माध्यम से धोखाधड़ी की रकम को ठिकाने लगाने का आरोप है।

जाँच के दौरान आरोपियों ने अपनी संलिप्तता स्वीकार की। अधिकारियों के अनुसार, किसी अज्ञात व्यक्ति ने सलमान अंसारी से संपर्क कर फर्जी बैंक खाता खुलवाने को कहा, जिसके बाद सलमान ने भीम सरोज को नया खाता खोलने के लिए राजी किया।

म्यूल खाता नेटवर्क कैसे काम करता था

जाँच से पता चला कि इन खातों का उपयोग सामान्य बैंकिंग लेनदेन के लिए नहीं, बल्कि 'म्यूल खातों' के रूप में किया जा रहा था — यानी अपराधियों द्वारा अवैध धन प्राप्त करने, उसे अन्य खातों में स्थानांतरित करने या नकद निकालकर धोखेबाजों को सौंपने के लिए। अधिकारियों के अनुसार, भीम सरोज के खाते में अज्ञात व्यक्तियों द्वारा बड़ी मात्रा में धनराशि जमा की गई, जिसे सलमान अंसारी ने चेक के माध्यम से निकालकर धोखेबाज को सौंपा। इसके बदले में दोनों को कमीशन मिला, जिसे उन्होंने आपस में बाँट लिया।

गौरतलब है कि ये चंडीगढ़ स्थित बैंक खाते दिल्ली, तमिलनाडु, गोवा, मुंबई, गुजरात और अन्य राज्यों से दर्ज साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों से जुड़े पाए गए — जो इस नेटवर्क की बहु-राज्यीय पहुँच को उजागर करता है।

I4C की भूमिका और तकनीकी जाँच

गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से प्राप्त सूचना के आधार पर यह मामला सामने आया। NCRP/I4C पोर्टल पर अन्य राज्यों के पीड़ितों द्वारा दर्ज ऑनलाइन धोखाधड़ी की शिकायतों का विश्लेषण करने पर इन संदिग्ध खातों की पहचान हुई। आरोपियों की संलिप्तता उनके बैंक खातों में हुए वित्तीय लेनदेन से पुष्ट हुई।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में म्यूल खाता आधारित साइबर धोखाधड़ी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और केंद्र सरकार I4C के ज़रिये राज्य पुलिस बलों के साथ समन्वय को मज़बूत कर रही है।

पुलिस नेतृत्व और निगरानी

यह कार्रवाई चंडीगढ़ की एसपी-साइबर आईपीएस गीतांजलि खंडेलवाल के निर्देशन में, डीएसपी साइबर क्राइम के मार्गदर्शन और पुलिस स्टेशन-साइबर क्राइम, सेक्टर 17 के एसएचओ की निगरानी में संपन्न हुई। पुलिस के अनुसार, फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और नेटवर्क में शामिल अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है।

आगे क्या होगा

पुलिस सूत्रों के अनुसार, जाँच का दायरा बढ़ाया जा रहा है और उस अज्ञात व्यक्ति की पहचान की कोशिश की जा रही है जिसने सलमान अंसारी से संपर्क किया था। अधिकारियों का मानना है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय बड़े साइबर अपराध गिरोह से जुड़ा हो सकता है। आम नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने बैंक खाते उपलब्ध न कराएँ, अन्यथा वे स्वयं भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन म्यूल खाता धोखाधड़ी इसलिए फलती-फूलती है क्योंकि बैंक KYC प्रक्रियाएँ अक्सर खाते के वास्तविक उपयोग की निगरानी नहीं करतीं। जब तक बैंकिंग तंत्र और साइबर पुलिस के बीच रियल-टाइम डेटा साझेदारी नहीं होती, ऐसे नेटवर्क एक राज्य में पकड़े जाने के बाद दूसरे राज्य में सक्रिय हो जाते हैं।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन म्यूल हंट क्या है?
'ऑपरेशन म्यूल हंट' चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश की साइबर क्राइम पुलिस द्वारा संगठित साइबर अपराध नेटवर्क के विरुद्ध चलाया जा रहा अभियान है, जिसका उद्देश्य म्यूल बैंक खातों के ज़रिये धोखाधड़ी की रकम को ठिकाने लगाने वाले गिरोहों का भंडाफोड़ करना है। इस अभियान के तहत 30 मई 2026 को दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
म्यूल बैंक खाता क्या होता है?
म्यूल बैंक खाता वह खाता होता है जिसे खाताधारक किसी अपराधी को अवैध धन प्राप्त करने, उसे अन्य खातों में स्थानांतरित करने या नकद निकालकर धोखेबाजों को सौंपने के लिए उपलब्ध कराता है। इसके बदले में खाताधारक को कमीशन मिलता है और वह अनजाने में या जानबूझकर साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का हिस्सा बन जाता है।
इस मामले में किन राज्यों के पीड़ित शामिल हैं?
जाँच के अनुसार, चंडीगढ़ के संदिग्ध बैंक खाते दिल्ली, तमिलनाडु, गोवा, मुंबई और गुजरात सहित कई राज्यों से NCRP/I4C पोर्टल पर दर्ज साइबर धोखाधड़ी शिकायतों से जुड़े पाए गए। इन राज्यों के पीड़ितों ने विभिन्न ऑनलाइन धोखाधड़ी में पैसा गँवाने की शिकायत दर्ज कराई थी।
इस गिरफ्तारी में I4C की क्या भूमिका रही?
गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से प्राप्त सूचना के आधार पर चंडीगढ़ पुलिस ने संदिग्ध बैंक खातों की पहचान की। I4C विभिन्न राज्यों की साइबर धोखाधड़ी शिकायतों को केंद्रीय स्तर पर संकलित और विश्लेषण करता है, जिससे बहु-राज्यीय नेटवर्क का पता लगाना संभव होता है।
क्या आम नागरिक अनजाने में म्यूल खाते में फँस सकते हैं?
हाँ, अपराधी अक्सर लालच या झाँसे से आम लोगों को अपने बैंक खाते उपलब्ध कराने के लिए राजी करते हैं। इस मामले में भी सलमान अंसारी ने भीम सरोज को नया खाता खोलने के लिए मनाया था। ऐसा करने पर खाताधारक स्वयं भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकता है, इसलिए किसी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता कभी न सौंपें।
राष्ट्र प्रेस
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