ऑपरेशन म्यूल हंट: चंडीगढ़ साइबर पुलिस ने म्यूल खाता नेटवर्क के दो आरोपी दबोचे, बहु-राज्यीय धोखाधड़ी का भंडाफोड़
सारांश
मुख्य बातें
चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने 30 मई 2026 को संगठित साइबर अपराध के विरुद्ध चलाए जा रहे 'ऑपरेशन म्यूल हंट' के तहत दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो कथित तौर पर एक बहु-राज्यीय साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क में म्यूल बैंक खातों के ज़रिये अवैध धन के हस्तांतरण में संलिप्त थे। यह कार्रवाई सेक्टर 17, चंडीगढ़ स्थित पुलिस स्टेशन-साइबर क्राइम में दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
पुलिस ने जिन दो व्यक्तियों को हिरासत में लिया है, उनकी पहचान पंजाब के मोहाली के गाँव मिलख निवासी सलमान अंसारी पुत्र समिक अंसारी और चंडीगढ़ के खुड्डा लौहारा निवासी भीम सरोज पुत्र राम किशुन के रूप में की गई है। दोनों के विरुद्ध म्यूल खातों के माध्यम से धोखाधड़ी की रकम को ठिकाने लगाने का आरोप है।
जाँच के दौरान आरोपियों ने अपनी संलिप्तता स्वीकार की। अधिकारियों के अनुसार, किसी अज्ञात व्यक्ति ने सलमान अंसारी से संपर्क कर फर्जी बैंक खाता खुलवाने को कहा, जिसके बाद सलमान ने भीम सरोज को नया खाता खोलने के लिए राजी किया।
म्यूल खाता नेटवर्क कैसे काम करता था
जाँच से पता चला कि इन खातों का उपयोग सामान्य बैंकिंग लेनदेन के लिए नहीं, बल्कि 'म्यूल खातों' के रूप में किया जा रहा था — यानी अपराधियों द्वारा अवैध धन प्राप्त करने, उसे अन्य खातों में स्थानांतरित करने या नकद निकालकर धोखेबाजों को सौंपने के लिए। अधिकारियों के अनुसार, भीम सरोज के खाते में अज्ञात व्यक्तियों द्वारा बड़ी मात्रा में धनराशि जमा की गई, जिसे सलमान अंसारी ने चेक के माध्यम से निकालकर धोखेबाज को सौंपा। इसके बदले में दोनों को कमीशन मिला, जिसे उन्होंने आपस में बाँट लिया।
गौरतलब है कि ये चंडीगढ़ स्थित बैंक खाते दिल्ली, तमिलनाडु, गोवा, मुंबई, गुजरात और अन्य राज्यों से दर्ज साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों से जुड़े पाए गए — जो इस नेटवर्क की बहु-राज्यीय पहुँच को उजागर करता है।
I4C की भूमिका और तकनीकी जाँच
गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से प्राप्त सूचना के आधार पर यह मामला सामने आया। NCRP/I4C पोर्टल पर अन्य राज्यों के पीड़ितों द्वारा दर्ज ऑनलाइन धोखाधड़ी की शिकायतों का विश्लेषण करने पर इन संदिग्ध खातों की पहचान हुई। आरोपियों की संलिप्तता उनके बैंक खातों में हुए वित्तीय लेनदेन से पुष्ट हुई।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में म्यूल खाता आधारित साइबर धोखाधड़ी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं और केंद्र सरकार I4C के ज़रिये राज्य पुलिस बलों के साथ समन्वय को मज़बूत कर रही है।
पुलिस नेतृत्व और निगरानी
यह कार्रवाई चंडीगढ़ की एसपी-साइबर आईपीएस गीतांजलि खंडेलवाल के निर्देशन में, डीएसपी साइबर क्राइम के मार्गदर्शन और पुलिस स्टेशन-साइबर क्राइम, सेक्टर 17 के एसएचओ की निगरानी में संपन्न हुई। पुलिस के अनुसार, फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और नेटवर्क में शामिल अन्य संदिग्धों की तलाश की जा रही है।
आगे क्या होगा
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जाँच का दायरा बढ़ाया जा रहा है और उस अज्ञात व्यक्ति की पहचान की कोशिश की जा रही है जिसने सलमान अंसारी से संपर्क किया था। अधिकारियों का मानना है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय बड़े साइबर अपराध गिरोह से जुड़ा हो सकता है। आम नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने बैंक खाते उपलब्ध न कराएँ, अन्यथा वे स्वयं भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।