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ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0: गुजरात पुलिस ने ₹2,289 करोड़ के साइबर फ्रॉड का भंडाफोड़ किया, 638 गिरफ्तार

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ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0: गुजरात पुलिस ने ₹2,289 करोड़ के साइबर फ्रॉड का भंडाफोड़ किया, 638 गिरफ्तार

सारांश

गुजरात पुलिस ने 'ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0' में ₹2,289 करोड़ के साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश किया, 638 अपराधी गिरफ्तार और 913 म्यूल अकाउंट्स ध्वस्त किए। AI-आधारित रिस्क स्कोरिंग और डेटा इंटेलिजेंस की मदद से यह राज्य की अब तक की सबसे बड़ी साइबर सर्जिकल स्ट्राइक बनी।

मुख्य बातें

ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 के तहत गुजरात पुलिस ने ₹2,289 करोड़ के साइबर फ्रॉड का भंडाफोड़ किया।
राज्यभर में 638 साइबर अपराधी गिरफ्तार और 565 एफआईआर दर्ज की गईं।
913 म्यूल अकाउंट्स पर कार्रवाई; कुल 4,052 अपराधों की पहचान, जिनमें 491 गुजरात से।
RBI और इंडियन डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर AI आधारित रिस्क स्कोरिंग प्रणाली का उपयोग।
2 जून 2026 से ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0 शुरू; एटीएम और चेक से अवैध निकासी में उल्लेखनीय कमी।

गुजरात पुलिस और साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने 'ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0' के तहत राज्यभर में साइबर अपराधियों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई करते हुए ₹2,289 करोड़ के साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश किया और 638 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान को राज्य में डिजिटल ठगी के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी समन्वित कार्रवाई माना जा रहा है।

अभियान की पृष्ठभूमि और रणनीति

इस अभियान के तहत गुजरात पुलिस ने इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल, समन्वय पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन से प्राप्त डेटा की सघन निगरानी की। इस डेटा इंटेलिजेंस के आधार पर सभी जिलों में म्यूल अकाउंट्स संचालित करने वाले अपराधियों की पहचान की गई और उनके खिलाफ एक साथ कार्रवाई की गई।

गौरतलब है कि म्यूल अकाउंट्स वे बैंक खाते होते हैं जिनका उपयोग साइबर ठग ठगी की रकम को इधर-उधर स्थानांतरित करने के लिए करते हैं। इन खातों के जरिए अपराधी पैसे को एटीएम या चेक से निकालकर गायब कर देते हैं।

मुख्य उपलब्धियाँ और आँकड़े

आँकड़ों के अनुसार, इस अभियान के दौरान राज्य में कुल 565 एफआईआर दर्ज की गईं। 913 म्यूल अकाउंट्स पर कार्रवाई की गई और कुल 4,052 अपराधों की पहचान हुई, जिनमें से 491 अपराध सीधे गुजरात से जुड़े थे। इस ऑपरेशन के दौरान पीड़ितों को उनकी ठगी गई रकम वापस दिलाने में भी सफलता मिली।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में साइबर ठगी के मामलों में तेज़ी से वृद्धि हो रही है और डिजिटल अरेस्ट जैसे नए तरीकों से लोगों को शिकार बनाया जा रहा है।

AI और तकनीक का उपयोग

गुजरात पुलिस ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और इंडियन डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित रिस्क स्कोरिंग प्रणाली का उपयोग किया, जिससे म्यूल अकाउंट्स की सटीक पहचान संभव हुई। साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, गांधीनगर के एसपी राजदीप सिंह झाला ने बताया कि डेटाबेस तैयार करके उन लक्ष्यों को चिह्नित किया गया जो म्यूल अकाउंट्स से सीधे साइबर क्राइम की रकम प्राप्त करते थे और उसे चेक या एटीएम से निकालते थे।

विशेषज्ञों की सलाह

साइबर विशेषज्ञ छात्रपाल सिंह ने कहा, 'कोई संदिग्ध कॉल आए तो ध्यान रखें और ऐसे कॉल्स को ब्लॉक करके उस नंबर को तत्काल 1930 पर रिपोर्ट करें। डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी कार्रवाई नहीं है।' विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन संपर्क पर सतर्कता बरतना और तत्काल शिकायत दर्ज करना सबसे प्रभावी बचाव है।

आगे की कार्रवाई

ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 की सफलता के बाद राज्य सरकार ने 2 जून 2026 से 'ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0' शुरू कर दिया है, जो साइबर अपराधियों के खिलाफ इस मुहिम को और व्यापक बनाएगा। अभियान के परिणामस्वरूप राज्य में एटीएम और चेक के जरिए अवैध निकासी में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

289 करोड़ के साइबर फ्रॉड का यह भंडाफोड़ प्रभावशाली है, लेकिन असली कसौटी यह है कि पीड़ितों को वास्तव में कितनी रकम वापस मिली — यह आँकड़ा अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ है। AI-आधारित रिस्क स्कोरिंग और डेटा इंटेलिजेंस का उपयोग सराहनीय है, परंतु म्यूल अकाउंट्स की समस्या बैंकिंग प्रणाली की KYC खामियों से जुड़ी है जिसे केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं सुलझाया जा सकता। ऑपरेशन 2.0 की शुरुआत यह संकेत देती है कि 1.0 से अपराध पूरी तरह नहीं रुका — यह एक चल रही लड़ाई है, एकमुश्त जीत नहीं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 क्या है?
यह गुजरात पुलिस और साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस द्वारा मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में चलाया गया साइबर अपराध-विरोधी अभियान है। इसके तहत म्यूल अकाउंट्स के जरिए होने वाली ऑनलाइन ठगी को रोकने के लिए डेटा इंटेलिजेंस और AI तकनीक का उपयोग किया गया।
इस अभियान में कितने अपराधी पकड़े गए और कितने का फ्रॉड उजागर हुआ?
ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 में 638 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया और ₹2,289 करोड़ के साइबर फ्रॉड का भंडाफोड़ हुआ। इसके अलावा 565 एफआईआर दर्ज की गईं और 913 म्यूल अकाउंट्स पर कार्रवाई की गई।
म्यूल अकाउंट क्या होता है और यह साइबर क्राइम से कैसे जुड़ा है?
म्यूल अकाउंट वे बैंक खाते होते हैं जिनका उपयोग साइबर ठग ठगी की रकम को स्थानांतरित करने और छिपाने के लिए करते हैं। इन खातों के जरिए अपराधी पैसे को एटीएम या चेक से निकालकर गायब कर देते हैं, जिससे उनका पता लगाना कठिन हो जाता है।
साइबर ठगी होने पर या संदिग्ध कॉल आने पर क्या करें?
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, संदिग्ध कॉल या मैसेज आने पर तुरंत उसे ब्लॉक करें और नंबर को 1930 हेल्पलाइन पर रिपोर्ट करें। विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती — यह एक ठगी का तरीका है।
ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0 कब शुरू हुआ?
ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0 को 2 जून 2026 से गुजरात में शुरू किया गया है। यह पहले अभियान की सफलता के बाद साइबर अपराधियों के खिलाफ मुहिम को और व्यापक एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लॉन्च किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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