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ऑपरेशन म्यूल हंट: पुणे पुलिस ने 152 साइबर आरोपी दबोचे, 132 म्यूल खातों पर मामले दर्ज

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ऑपरेशन म्यूल हंट: पुणे पुलिस ने 152 साइबर आरोपी दबोचे, 132 म्यूल खातों पर मामले दर्ज

सारांश

पुणे पुलिस और महाराष्ट्र साइबर के संयुक्त 'ऑपरेशन म्यूल हंट' में 152 गिरफ्तारियाँ और 132 मामले दर्ज हो चुके हैं। साइबर ठगी की रकम छिपाने वाले म्यूल खातों के नेटवर्क पर यह अब तक की सबसे बड़ी समन्वित कार्रवाई है।

मुख्य बातें

पुणे पुलिस और महाराष्ट्र साइबर के संयुक्त 'ऑपरेशन म्यूल हंट' में 152 आरोपी गिरफ्तार।
132 म्यूल बैंक खाताधारकों के विरुद्ध मामले दर्ज; कई मामलों में अदालत में आरोप पत्र दाखिल।
अन्य राज्यों से प्राप्त 1,705 नोटिसों पर कार्रवाई जारी; पुणे से 2,099 नोटिस अन्य राज्यों को भेजे गए।
बैंक खाता, सिम कार्ड या दस्तावेज़ साइबर अपराधियों को देने वालों को सह-आरोपी बनाया जाएगा।
वर्ष 2026 में 1,142 जागरूकता कार्यक्रमों के ज़रिए लगभग 3 लाख नागरिकों तक साइबर सुरक्षा संदेश पहुँचाया गया।

पुणे पुलिस और महाराष्ट्र साइबर के संयुक्त अभियान 'ऑपरेशन म्यूल हंट' के तहत अब तक 152 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और 132 म्यूल बैंक खाताधारकों के विरुद्ध मामले दर्ज किए गए हैं। यह कार्रवाई साइबर ठगी के आर्थिक नेटवर्क की रीढ़ माने जाने वाले म्यूल खातों को निशाना बनाकर की जा रही है।

म्यूल खाते क्या हैं और क्यों हैं खतरनाक

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर अपराधी ऑनलाइन ठगी से अर्जित रकम को छिपाने और एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्थानांतरित करने के लिए म्यूल बैंक खातों का उपयोग करते हैं। ये खाते प्रायः पैसे या अन्य प्रलोभन के बदले भोले-भाले नागरिकों से हासिल किए जाते हैं। इन्हीं खातों के माध्यम से साइबर अपराधियों का समूचा वित्तीय तंत्र संचालित होता है।

मुख्य घटनाक्रम

जाँच के दौरान पुणे, मुंबई, नवी मुंबई और छत्रपति संभाजीनगर सहित अन्य राज्यों से आरोपियों को पकड़ा गया है। समन्वय पोर्टल के माध्यम से अन्य राज्यों से प्राप्त 1,705 नोटिसों पर कार्रवाई जारी है, जबकि पुणे से दूसरे राज्यों के म्यूल खाताधारकों को 2,099 नोटिस भेजे जा चुके हैं। कई मामलों में अदालत में आरोप पत्र भी दाखिल किए जा चुके हैं।

जाँच की पद्धति

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक जाँच में बैंक लेन-देन, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रांजैक्शन और अन्य तकनीकी पहलुओं की गहन पड़ताल की जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जो नागरिक पैसे या किसी अन्य प्रलोभन के बदले अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड या अन्य दस्तावेज़ साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते हैं, उन्हें भी सह-आरोपी बनाकर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आम जनता पर असर और पुलिस की अपील

पुणे पुलिस ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, नेट बैंकिंग विवरण, ओटीपी, सिम कार्ड, मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी, आधार या पैन कार्ड जैसी व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। साइबर अपराधियों की मदद करने वालों की सूचना तत्काल नज़दीकी पुलिस थाने या साइबर पुलिस को देने की अपील की गई है।

जागरूकता अभियान

वर्ष 2026 में शहर में साइबर सुरक्षा से संबंधित 1,142 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनके माध्यम से लगभग 3 लाख लोगों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुँचाया गया। इसके अतिरिक्त 'कैंपस कनेक्ट सेफ होराइजन' अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों, आईटी कंपनियों, हाउसिंग सोसायटियों और सरकारी कार्यालयों में भी व्यापक जनजागरूकता फैलाई जा रही है। यह अभियान संकेत देता है कि साइबर अपराध के विरुद्ध लड़ाई अब केवल गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं, बल्कि जड़ों तक पहुँचने की कोशिश है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि गिरफ्तार किए गए 152 लोगों में से कितने वास्तविक साइबर अपराधी हैं और कितने वे निम्न-आय वर्ग के लोग हैं जिन्हें प्रलोभन देकर खाते किराये पर लिए गए। जब तक ऊपरी कड़ी — यानी असली ऑपरेटर और लाभार्थी — पकड़े नहीं जाते, यह अभियान केवल निचले पायदान को दंडित करने का जोखिम उठाता है। 2,099 नोटिस और 1,705 अंतर-राज्यीय नोटिस दर्शाते हैं कि नेटवर्क राष्ट्रीय स्तर पर फैला है — इसे तोड़ने के लिए राज्य-स्तरीय समन्वय से आगे केंद्रीय एजेंसियों की सक्रिय भागीदारी ज़रूरी है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन म्यूल हंट क्या है?
ऑपरेशन म्यूल हंट पुणे पुलिस और महाराष्ट्र साइबर का संयुक्त अभियान है, जिसका उद्देश्य साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले म्यूल बैंक खातों के नेटवर्क को तोड़ना है। इस अभियान के तहत अब तक 152 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं और 132 म्यूल खाताधारकों पर मामले दर्ज हैं।
म्यूल बैंक खाता क्या होता है?
म्यूल बैंक खाता वह खाता होता है जिसे साइबर अपराधी किसी अन्य व्यक्ति से पैसे या प्रलोभन देकर हासिल करते हैं और ठगी की रकम को इन खातों के ज़रिए एक जगह से दूसरी जगह स्थानांतरित करते हैं। इससे असली अपराधियों की पहचान छिपाना आसान हो जाता है।
क्या बैंक खाता देने वाले को भी सज़ा हो सकती है?
हाँ, पुणे पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जो नागरिक पैसे या किसी लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड या अन्य दस्तावेज़ साइबर अपराधियों को देते हैं, उन्हें भी सह-आरोपी बनाकर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस अभियान में किन-किन शहरों से गिरफ्तारियाँ हुई हैं?
पुणे, मुंबई, नवी मुंबई और छत्रपति संभाजीनगर सहित अन्य राज्यों से भी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। अभियान का दायरा राष्ट्रीय स्तर पर है और 1,705 अंतर-राज्यीय नोटिसों पर कार्रवाई जारी है।
साइबर ठगी से बचने के लिए पुलिस ने क्या सलाह दी है?
पुणे पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी अनजान व्यक्ति के साथ बैंक खाता, ओटीपी, आधार, पैन, सिम कार्ड या नेट बैंकिंग जानकारी साझा न करें। संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल नज़दीकी पुलिस थाने या साइबर पुलिस को दें।
राष्ट्र प्रेस
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