नोएडा में म्यूल अकाउंट गैंग का भंडाफोड़: 7 गिरफ्तार, देशभर में 74 साइबर शिकायतों से जुड़े खाते
सारांश
मुख्य बातें
नोएडा के फेस-3 थाने की पुलिस ने 29 जुलाई 2026 को साइबर अपराध के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उन्हें साइबर ठगों को बेचते थे। इन खातों का उपयोग डिजिटल अरेस्ट, फर्जी ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट स्कीम के नाम पर ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। जाँच में सामने आया कि इन बैंक खातों के विरुद्ध देशभर में 74 साइबर शिकायतें दर्ज हैं।
गिरफ्तार आरोपी और बरामदगी
पुलिस ने बीट पुलिसिंग और गोपनीय सूचना के आधार पर कार्रवाई की। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अजब सिंह, प्रदीप, गुलाब सिंह लोधी, कौशल, सचिन, जिनेन्द्र सिंह और प्रियंका के रूप में हुई है। ये आरोपी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश और आगरा के निवासी हैं।
आरोपियों के कब्जे से 7 मोबाइल फोन, 1 चेक बुक, 1 स्टैम्प और 4 लेटर हेड बरामद किए गए हैं।
कैसे काम करता था यह नेटवर्क
पुलिस जाँच के अनुसार, आरोपी पहले फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इसके बाद व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप के माध्यम से साइबर अपराधियों से संपर्क बनाए रखते थे। बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर की सिम अपने पास रखकर वे मोबाइल में 'डिंग एसएमएस' नामक एपीके फाइल इंस्टॉल करते थे। इस ऐप के जरिए बैंक खाते से जुड़े ओटीपी और एसएमएस उन्हें प्राप्त होते थे, जिससे साइबर ठग खातों में आई रकम को आसानी से निकाल लेते थे।
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि साइबर ठग उन्हें ठगी की रकम का एक निश्चित प्रतिशत कमीशन के रूप में देते थे, जिसे सभी आरोपी आपस में बाँट लेते थे। कुछ समय बाद आरोपी इन खातों को बंद कर देते थे ताकि पुलिस जाँच से बच सकें।
ठगी का दायरा और आरोप
जाँच में इन खातों में लाखों रुपये के लेनदेन का पता चला है। इन खातों के विरुद्ध देशभर में साइबर ठगी से संबंधित कुल 74 शिकायतें दर्ज मिली हैं। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 66डी के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया है।
यह ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में डिजिटल अरेस्ट और फर्जी निवेश योजनाओं से जुड़े साइबर अपराधों में तेज वृद्धि दर्ज की जा रही है। गौरतलब है कि म्यूल बैंक अकाउंट नेटवर्क इस तरह के अपराधों की रीढ़ माने जाते हैं।
आगे की जाँच
नोएडा पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की गहन जाँच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह का संबंध किन-किन राज्यों में सक्रिय साइबर अपराधियों से था और इस नेटवर्क के जरिए अब तक कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया। पुलिस के अनुसार इस मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की भी संभावना बनी हुई है।