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दिल्ली पुलिस ने म्यूल अकाउंट रैकेट का भंडाफोड़ किया, 10 साइबर ठग गिरफ्तार

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दिल्ली पुलिस ने म्यूल अकाउंट रैकेट का भंडाफोड़ किया, 10 साइबर ठग गिरफ्तार

सारांश

दिल्ली पुलिस ने एक संगठित म्यूल अकाउंट सप्लाई रैकेट का पर्दाफाश किया है — जो बेरोजगारों को नौकरी का झाँसा देकर उनके बैंक खाते साइबर ठगों को सौंपता था। केरल की एक महिला से ₹2 लाख की ठगी की जाँच से शुरू हुई यह कार्रवाई 10 गिरफ्तारियों तक पहुँची।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ने 16 जून 2026 को म्यूल अकाउंट सप्लाई रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरोह बेरोजगार और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को नौकरी का प्रलोभन देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था।
जाँच की शुरुआत केरल की एक महिला से ₹2 लाख की साइबर ठगी की शिकायत से हुई; रकम यश बैंक खाते में मिली।
आरोपियों के कब्जे से पीओएस मशीनें , एटीएम कार्ड , चेक बुक और मोबाइल फोन बरामद।
सभी आरोपियों पर BNS की धाराओं के तहत मामला दर्ज; नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाश जारी।

दिल्ली पुलिस ने 16 जून 2026 को एक संगठित म्यूल अकाउंट सप्लाई रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह साइबर अपराधियों को फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराता था, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम को ठिकाने लगाने के लिए किया जाता था। आरोपियों के कब्जे से पीओएस मशीनें, एटीएम कार्ड, चेक बुक और मोबाइल फोन बरामद हुए हैं।

मामले की शुरुआत कैसे हुई

जाँच की शुरुआत केरल की एक महिला की शिकायत से हुई, जिनसे ₹2 लाख की साइबर धोखाधड़ी की गई थी। पुलिस ने वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की तो पता चला कि ठगी की रकम यश बैंक के एक खाते में स्थानांतरित हुई थी। आगे की जाँच में यह खाता एक व्यापक नेटवर्क का हिस्सा निकला।

कैसे काम करता था यह गिरोह

पुलिस के अनुसार, साहिबाबाद निवासी खाताधारक योगेंद्र कुमार से पूछताछ में सामने आया कि उसे विजय नामक व्यक्ति ने नौकरी दिलाने का प्रलोभन देकर अपने नाम पर बैंक खाता खुलवाने के लिए राजी किया था। इसके बाद आरोपियों ने उस खाते के क्रेडेंशियल्स, एटीएम कार्ड, चेक बुक, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और इंटरनेट बैंकिंग की सुविधाएँ अपने कब्जे में ले लीं।

गौरतलब है कि यह गिरोह बेरोजगार और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को झूठे रोजगार के अवसर और नकद प्रलोभन देकर निशाना बनाता था। ऐसे लोगों के नाम पर खोले गए खाते साइबर ठगी की रकम को एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए इस्तेमाल होते थे।

गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई

जाँच में मिले सबूतों के आधार पर पुलिस ने 10 आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया। सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है और उन्हें संबंधित न्यायालय में पेश किया जा चुका है।

आगे की जाँच जारी

पुलिस ने बताया कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य साथियों, लाभार्थियों और उन साइबर अपराधियों की पहचान के लिए जाँच जारी है, जिन्होंने इन खातों का उपयोग धोखाधड़ी करने के लिए किया। यह मामला इस बात को रेखांकित करता है कि किस तरह संगठित गिरोह निर्दोष और आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों को मोहरा बनाकर साइबर अपराध की जड़ें मजबूत कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ असली ठग पकड़ में नहीं आते — केवल उनके मोहरे आते हैं। 10 गिरफ्तारियाँ स्वागतयोग्य हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि जिन साइबर अपराधियों ने इन खातों का उपयोग किया, उन तक जाँच कब पहुँचेगी। बेरोजगारी और आर्थिक असुरक्षा इस तरह के गिरोहों के लिए कच्चा माल बन रही है — जब तक इस सामाजिक पहलू पर ध्यान नहीं दिया जाता, ऐसे रैकेट नए चेहरों के साथ उभरते रहेंगे।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

म्यूल अकाउंट रैकेट क्या होता है?
म्यूल अकाउंट वे बैंक खाते होते हैं जो किसी निर्दोष व्यक्ति के नाम पर खोले जाते हैं और साइबर ठगी से प्राप्त रकम को छुपाने या आगे भेजने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। दिल्ली में पकड़ा गया यह गिरोह ऐसे खातों की आपूर्ति साइबर अपराधियों को करता था।
दिल्ली पुलिस ने इस गिरोह का पर्दाफाश कैसे किया?
केरल की एक महिला से ₹2 लाख की साइबर धोखाधड़ी की शिकायत के बाद पुलिस ने वित्तीय लेन-देन की जाँच की। रकम यश बैंक के एक खाते में मिली, जो एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा निकला, जिससे 10 आरोपियों तक पहुँचा गया।
गिरफ्तार आरोपियों पर क्या कार्रवाई हुई है?
सभी 10 आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है और उन्हें संबंधित न्यायालय में पेश किया जा चुका है। जाँच अभी जारी है।
यह गिरोह लोगों को कैसे फँसाता था?
गिरोह बेरोजगार और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को नौकरी दिलाने का झाँसा और नकद प्रलोभन देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था। इसके बाद खाते के एटीएम कार्ड, चेक बुक और इंटरनेट बैंकिंग की सुविधाएँ अपने कब्जे में ले लेता था।
क्या इस मामले में और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं?
पुलिस ने पुष्टि की है कि नेटवर्क के अन्य साथियों, लाभार्थियों और उन साइबर अपराधियों की पहचान के लिए जाँच जारी है जिन्होंने इन खातों का उपयोग किया। आगे और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।
राष्ट्र प्रेस
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