किम जोंग-उन का पुतिन से वादा: रूस के साथ 'संयुक्त सहयोग' और गहरा करेगा उत्तर कोरिया
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भेजे एक औपचारिक पत्र में स्पष्ट किया है कि प्योंगयांग मॉस्को के साथ 'संयुक्त सहयोग' को हर क्षेत्र में और अधिक गहरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए के अनुसार, यह संदेश 9 सितंबर 2026 को उत्तर कोरिया की स्थापना की 78वीं वर्षगांठ पर पुतिन के बधाई संदेश के जवाब में भेजा गया।
किम के पत्र में क्या कहा गया
केसीएनए के अनुसार, किम जोंग-उन ने अपने पत्र में लिखा कि उत्तर कोरिया की इच्छा 'पूरी तरह स्पष्ट और मजबूत' है कि वह रूस के साथ संयुक्त सहयोग को हर मोर्चे पर आगे बढ़ाए। उन्होंने कहा कि यह सहयोग दोनों देशों के बीच 'लंबे समय से चली आ रही दोस्ती, पड़ोसी संबंधों, आपसी मदद और मजबूत गठबंधन' की नींव पर टिका है।
किम ने यह भी कहा कि दोनों देश 'कठिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों' के बीच भी अपने गठबंधन के इतिहास का एक नया अध्याय लिख रहे हैं। उन्होंने यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध में रूस को अपना 'अटल समर्थन' देने का भी भरोसा दिलाया।
रणनीतिक साझेदारी की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि जून 2024 में राष्ट्रपति पुतिन की प्योंगयांग यात्रा के दौरान दोनों देशों ने एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी संधि पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते में प्रावधान है कि यदि किसी एक देश पर हमला होता है, तो दूसरा देश बिना देरी के सैन्य सहायता प्रदान करेगा।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर कोरिया पहले ही यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद के लिए हजारों सैनिक और पारंपरिक हथियार भेज चुका है। आलोचकों का कहना है कि इस सहयोग ने यूरोपीय सुरक्षा के समीकरण को और अधिक जटिल बना दिया है।
तुमेन नदी पर नए पुल का उद्घाटन
इसी क्रम में, इस महीने की शुरुआत में दोनों देशों ने तुमेन नदी पर एक नए सड़क पुल का संयुक्त उद्घाटन किया। उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया ने इसे द्विपक्षीय सहयोग को 'नई ऊर्जा' देने वाला महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचा बताया।
उद्घाटन समारोह उत्तर कोरिया के रासोन और रूस के खासन में आयोजित हुआ। इसमें उत्तर कोरियाई प्रधानमंत्री पाकथे-सोंग और रूसी प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्टिन ने वर्चुअल माध्यम से भाग लिया। इस पुल का निर्माण अप्रैल 2025 में शुरू हुआ था और इसकी योजना जून 2024 की प्योंगयांग शिखर बैठक के बाद बनाई गई थी।
केसीएनए के अनुसार, इस पुल का नाम याकोव नोविचेंको के नाम पर रखा गया है — जो सोवियत रेड आर्मी के एक अधिकारी थे और जिन्हें 1946 में उत्तर कोरिया के संस्थापक किम इल-सुंग की जान बचाने का श्रेय दिया जाता है।
दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की प्रतिक्रिया
उत्तर कोरियाई प्रधानमंत्री पाकथे-सोंग ने इस पुल को दोनों देशों की दोस्ती का 'नया प्रतीक' करार दिया और कहा कि इससे द्विपक्षीय सहयोग को नई गति मिलेगी। रूसी प्रधानमंत्री मिशुस्टिन ने कहा कि दोनों देशों के संबंध 'अब तक के सबसे ऊंचे स्तर की व्यापक रणनीतिक साझेदारी' तक पहुँच चुके हैं और रूस भविष्य में भी इन संबंधों को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
आगे क्या हो सकता है
किम जोंग-उन ने 'संयुक्त सहयोग' का विस्तृत ब्यौरा नहीं दिया, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह सैन्य, आर्थिक और ऊर्जा क्षेत्रों में और गहरे जुड़ाव का संकेत है। नया पुल व्यापार, पर्यटन और लोगों के आदान-प्रदान को आसान बनाने के साथ-साथ रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखला को भी मज़बूत कर सकता है। इस धुरी का वैश्विक भू-राजनीति पर असर आने वाले महीनों में और स्पष्ट होगा।