लावरोव का उत्तर कोरिया को पत्र: 'रूस और नॉर्थ कोरिया एक ही मोर्चे पर', कुर्स्क तैनाती को बताया दोस्ती का सबूत
सारांश
मुख्य बातें
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अपनी उत्तर कोरियाई समकक्ष चो सोन हुई को भेजे एक पत्र में कहा कि रूस और उत्तर कोरिया अब एक ही मोर्चे पर लड़ रहे हैं। 18 अगस्त 2026 को उत्तर कोरिया के मुक्ति दिवस की 81वीं वर्षगांठ के अवसर पर लिखे इस पत्र में लावरोव ने यूक्रेन युद्ध में उत्तर कोरिया की सैन्य सहायता और सैनिकों की तैनाती की खुलकर सराहना की। उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया एजेंसी केसीएनए ने इस पत्र की जानकारी सार्वजनिक की।
पत्र में क्या कहा लावरोव ने
लावरोव ने पत्र में ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए याद दिलाया कि रूस और उत्तर कोरिया ने 1945 में जापानी सैन्यवाद को हराने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी थी और द्वितीय विश्व युद्ध को शीघ्र समाप्त करने में साझा भूमिका निभाई थी। उन्होंने इसी ऐतिहासिक एकजुटता को वर्तमान सैन्य सहयोग की नींव बताया।
लावरोव ने कुर्स्क इलाके में उत्तर कोरियाई सेना की तैनाती को 'पिछली बहादुर पीढ़ियों की पहल पर कायम हुई दोस्ती का साफ सबूत' करार दिया। उन्होंने दोनों देशों के बीच बहुआयामी सहयोग को बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और राष्ट्रीय संप्रभुता पर आधारित नई वैश्विक व्यवस्था के निर्माण से जोड़ा।
रूस-उत्तर कोरिया संबंधों की पृष्ठभूमि
यूक्रेन युद्ध के बाद से मास्को और प्योंगयांग के संबंध तेज़ी से प्रगाढ़ हुए हैं। उत्तर कोरिया ने रूस को हथियार, गोला-बारूद और सैनिक उपलब्ध कराए हैं। रूस ने अप्रैल 2025 में पहली बार उत्तर कोरियाई सैनिकों की तैनाती की आधिकारिक पुष्टि की थी।
दोनों देशों ने जून 2024 में व्यापक रणनीतिक साझेदारी संधि पर हस्ताक्षर किए थे, जिसने द्विपक्षीय सुरक्षा संबंधों को नई दिशा दी। लावरोव का यह पत्र उसी बढ़ते सैन्य सहयोग को सार्वजनिक समर्थन देने के रूप में देखा जा रहा है।
पुतिन-किम के बीच भी संदेशों का आदान-प्रदान
मुक्ति दिवस के अवसर पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने भी एक-दूसरे को संदेश भेजकर द्विपक्षीय संबंधों को और मज़बूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। पुतिन ने सभी क्षेत्रों में सहयोग आगे बढ़ाने की बात कही।
अंतरराष्ट्रीय चिंताएँ और ट्रंप का बयान
रूस-उत्तर कोरिया के इस बढ़ते सैन्य गठजोड़ ने अमेरिका, दक्षिण कोरिया और उनके सहयोगियों की चिंताएँ बढ़ा दी हैं। उत्तर कोरिया के लिए यह साझेदारी आर्थिक, सैन्य और कूटनीतिक समर्थन का महत्वपूर्ण स्रोत है, जबकि रूस के लिए प्योंगयांग की सैन्य सहायता यूक्रेन युद्ध के बीच रणनीतिक रूप से अहम बनी हुई है।
गौरतलब है कि लावरोव का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने किम जोंग उन के साथ दोबारा बातचीत की इच्छा जताई और दावा किया कि किम ने उनके संवाद प्रस्ताव का जवाब दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब कोरियाई प्रायद्वीप पर कूटनीतिक हलचल एक साथ कई दिशाओं में बढ़ रही है।