उत्तर कोरियाई युद्धबंदी मुद्दा: दक्षिण कोरिया-यूक्रेन ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समाधान पर बनाई सहमति
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया और यूक्रेन ने मंगलवार, 30 जून को सहमति जताई कि यूक्रेन में पकड़े गए उत्तर कोरियाई युद्धबंदियों के मामले का निपटारा अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों के अनुरूप किया जाएगा, और संबंधित व्यक्तियों की अपनी इच्छा का पूरा सम्मान किया जाएगा। यह सहमति सोल में दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून और उनके यूक्रेनी समकक्ष आंद्री सिबिहा के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक में बनी।
मुख्य घटनाक्रम
2025 की शुरुआत में यूक्रेनी सेना ने रूस के कुर्स्क क्षेत्र में तैनात दो उत्तर कोरियाई सैनिकों को पकड़ा था, जो कथित तौर पर रूस की ओर से युद्ध में भाग ले रहे थे। रिपोर्टों के अनुसार, इन दोनों सैनिकों ने दक्षिण कोरिया जाने की इच्छा व्यक्त की है।
दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान में कहा गया, 'दोनों विदेश मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि यूक्रेन में मौजूद उत्तर कोरियाई युद्धबंदियों के मामले का समाधान अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों के मुताबिक किया जाएगा। साथ ही संबंधित लोगों की अपनी इच्छा का भी सम्मान किया जाएगा।'
दोनों देशों का कानूनी रुख
दक्षिण कोरिया का संवैधानिक प्रावधान यह स्पष्ट करता है कि उत्तर कोरिया के नागरिक भी दक्षिण कोरिया के नागरिक माने जाते हैं। इसी आधार पर सोल का कहना है कि यदि कोई उत्तर कोरियाई युद्धबंदी दक्षिण कोरिया आना चाहता है, तो उसे स्वीकार किया जाएगा।
यूक्रेन ने भी स्पष्ट किया है कि वह किसी भी उत्तर कोरियाई युद्धबंदी को उसकी इच्छा के विरुद्ध वापस नहीं भेजेगा। हालाँकि, अंतिम निर्णय अभी लंबित है, क्योंकि कीव अन्य देशों के युद्धबंदियों से जुड़े व्यापक पहलुओं पर भी विचार कर रहा है।
सिबिहा का डीएमजेड दौरा और बयान
अपने सोल दौरे के दौरान विदेश मंत्री सिबिहा ने दोनों कोरिया के बीच स्थित भारी सुरक्षा वाले असैन्यीकृत क्षेत्र (DMZ) का भी दौरा किया। वहाँ उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया और रूस से उत्पन्न हो रहे खतरों का सामना करने के लिए दोनों देशों के बीच और गहरे सहयोग की आवश्यकता है।
सिबिहा ने कहा, 'इस सीमा के उस पार एक ऐसा तानाशाही शासन है, जो रूस की मदद कर रहा है ताकि वह यूक्रेन के शांतिपूर्ण शहरों को तबाह कर सके। प्योंगयांग और मॉस्को की खतरनाक गतिविधियों की वजह से यह ऐतिहासिक सीमा अब सीधे यूक्रेन के मोर्चे से जुड़ गई है।'
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी लिखा कि उन्होंने और चो ने उत्तर कोरियाई युद्धबंदियों के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के अनुसार आगे की राह स्पष्ट हो गई है।
रूस-उत्तर कोरिया सैन्य सहयोग पर चिंता
सिबिहा ने रेखांकित किया कि रूस और उत्तर कोरिया (डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया — DPRK) के बीच बढ़ता सैन्य सहयोग केवल यूक्रेन के लिए नहीं, बल्कि समूचे विश्व के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन के विरुद्ध युद्ध में उत्तर कोरिया को शामिल करके मॉस्को कोरियाई प्रायद्वीप में अस्थिरता फैला रहा है।
गौरतलब है कि यह 2015 के बाद पहली बार था जब यूक्रेन के किसी विदेश मंत्री ने दक्षिण कोरिया का दौरा किया। इससे पहले दोनों विदेश मंत्री इसी वर्ष मार्च में फ्रांस में आयोजित जी-7 विदेश मंत्रियों की बैठक में मिले थे।
द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार
दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता पार्क इल ने कहा कि इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच सकारात्मक बातचीत जारी है और सोल अपने कूटनीतिक प्रयास आगे भी बनाए रखेगा। मंगलवार की बैठक में चो और सिबिहा ने युद्ध के बाद यूक्रेन के पुनर्निर्माण में सहयोग, व्यापार, निवेश और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के तरीकों पर भी विस्तार से चर्चा की। यूक्रेन ने स्पष्ट किया कि वह दक्षिण कोरिया के साथ दोनों देशों के हित में सुरक्षा साझेदारी को और गहरा करने के लिए तैयार है।