दिल्ली पुलिस ने दो साइबर ठगों को पकड़ा, 3.60 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का पर्दाफाश

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दिल्ली पुलिस ने दो साइबर ठगों को पकड़ा, 3.60 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का पर्दाफाश

सारांश

दिल्ली पुलिस ने साइबर ठगों के एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिन्होंने 3.60 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की थी। आरोपियों को टेलीग्राम के माध्यम से ठगी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। जानिए इस मामले की पूरी कहानी।

Key Takeaways

  • दिल्ली पुलिस ने दो साइबर ठगों को गिरफ्तार किया।
  • धोखाधड़ी की कुल रकम लगभग 3.60 करोड़ रुपये है।
  • आरोपियों ने टेलीग्राम और म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल किया।
  • पुलिस ने तकनीकी सबूतों के आधार पर कार्रवाई की।
  • साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ जागरूकता आवश्यक है।

नई दिल्ली, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली पुलिस की साइबर शाहदरा टीम ने ऑनलाइन फ्रॉड का एक बड़ा खुलासा किया है। इस टीम ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर लगभग 3.60 करोड़ रुपये के साइबर धोखाधड़ी का आरोप है। दोनों आरोपी टेलीग्राम और म्यूल अकाउंट्स का उपयोग करके लोगों को ठगते थे। पुलिस ने उनके पास से दो मोबाइल फोन और धोखाधड़ी से संबंधित टेलीग्राम चैट्स भी बरामद की हैं।

यह मामला तब सामने आया जब दिल्ली के पीयूष नामक व्यक्ति ने साइबर पुलिस स्टेशन शाहदरा में शिकायत दर्ज कराई। पीयूष ने बताया कि उसकी जानकारी के बिना उसके बैंक खाते से 6,65,992 रुपये निकाल लिए गए। वह पहले ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ा हुआ था। 27 अक्टूबर 2025 से 30 अक्टूबर 2025 के बीच उसके खाते में कई अनधिकृत लेन-देन हुए। बाद में पता चला कि उसके मोबाइल में एक अनजान एपीके फाइल इंस्टॉल हो गई थी, जिसके माध्यम से धोखाधड़ी करने वालों ने उसके फोन तक पहुंच बना ली थी। इस शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई।

मामले की जांच इंस्पेक्टर विजय कुमार के नेतृत्व में शुरू हुई। डीसीपी शाहदरा के निर्देश पर एसआई पुष्पेंद्र पांडे, एसआई एस.बी. शरण, एचसी सचिन शालोट और एचसी कपिल की एक विशेष टीम गठित की गई। टीम ने बैंक लेन-देन के रिकॉर्ड, तकनीकी निगरानी और डिजिटल सबूतों का गहराई से विश्लेषण किया। जांच में पता चला कि धोखाधड़ी की रकम 'आर.पी. टोल एंड पार्किंग' नाम से एक्सिस बैंक के एक खाते में ट्रांसफर की गई थी। इस खाते को राम अवतार सिंह नामक व्यक्ति संचालित कर रहा था, जो आगरा के शास्त्री पुरम, सिकंदरा का निवासी है।

पुलिस टीम ने तकनीकी जानकारी के आधार पर आगरा के शास्त्री पुरम में छापा मारा और राम अवतार सिंह को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान उसने खुलासा किया कि वह विक्रांत सोनी नामक दूसरे व्यक्ति के साथ मिलकर यह धोखाधड़ी कर रहा था। इसके बाद टीम जगदीशपुरा, आगरा पहुंची और वहां छापा मारकर विक्रांत सोनी को भी पकड़ लिया। दोनों को तकनीकी सबूतों और पूछताछ के आधार पर औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया।

पूछताछ में विक्रांत सोनी ने अपना पूरा गुनाह कबूल किया। उसने बताया कि वर्ष 2023 में उसकी मुलाकात पिंकी यादव नामक एक महिला से हुई, जिसने उसे विदेश में अच्छी नौकरी और कमाई का लालच दिया। बाद में टेलीग्राम के जरिए उसका संपर्क लियो नामक एक चीनी व्यक्ति से हुआ। जुलाई 2024 में उसे बैंकॉक भेजा गया और फिर सड़क मार्ग से कंबोडिया के नोम पेन्ह ले जाया गया। वहां संगठित साइबर धोखाधड़ी शिविरों में उसे 3-4 महीने की ट्रेनिंग दी गई। ट्रेनिंग में भारतीय लोगों को ठगने की तकनीकें, सोशल इंजीनियरिंग, मैलिशियस एपीके लिंक भेजना और स्क्रिप्ट के जरिए बातचीत करना सिखाया गया।

ट्रेनिंग पूरी होने के बाद विक्रांत भारत लौट आया और अपने साथियों के साथ मिलकर धोखाधड़ी का काम शुरू कर दिया। वह टेलीग्राम पर विदेशी हैंडलर्स से संपर्क बनाए रखता था। धोखाधड़ी से मिली रकम को म्यूल बैंक अकाउंट्स के जरिए आगे भेजा जाता था। पुलिस के अनुसार इस गिरोह ने कुल मिलाकर करीब 3.60 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है।

Point of View

और इस पर कड़ी नजर रखने की आवश्यकता है।
NationPress
09/04/2026

Frequently Asked Questions

दिल्ली पुलिस ने कितने साइबर ठगों को गिरफ्तार किया?
दिल्ली पुलिस ने दो साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है।
इन ठगों पर कितनी रकम की धोखाधड़ी का आरोप है?
इन ठगों पर लगभग 3.60 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है।
इन ठगों ने किस माध्यम से धोखाधड़ी की?
इन ठगों ने टेलीग्राम और म्यूल अकाउंट्स का उपयोग करके धोखाधड़ी की।
धोखाधड़ी की शिकायत किसने की थी?
दिल्ली के पीयूष नामक व्यक्ति ने धोखाधड़ी की शिकायत की थी।
इन ठगों को गिरफ्तार करने के लिए किस टीम का गठन किया गया था?
इंस्पेक्टर विजय कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया था।
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