1 जुलाई 2026
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दिल्ली पुलिस ने 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया, पश्चिम बंगाल से 3 गिरफ्तार

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दिल्ली पुलिस ने 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया, पश्चिम बंगाल से 3 गिरफ्तार

सारांश

'डिजिटल अरेस्ट' का डर दिखाकर ₹7.22 लाख ठगने वाले सिंडिकेट का दिल्ली पुलिस ने भंडाफोड़ किया। पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना और हावड़ा से तीन आरोपी गिरफ्तार, म्यूल खाते और सिम कार्ड सप्लाई करने वाले इस नेटवर्क की अंतरराष्ट्रीय कड़ियों की जांच जारी।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस की दक्षिण जिला साइबर इकाई ने 1 जुलाई 2026 को 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया।
पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना और हावड़ा से समीरन रॉय , प्रिंस शॉ और समर चटर्जी गिरफ्तार।
पीड़िता से ₹7.22 लाख की ठगी; व्हाट्सएप वीडियो कॉल और आरटीजीएस ट्रांसफर का इस्तेमाल।
बरामदगी: 6 मोबाइल फोन , 1 लैपटॉप , 18 डेबिट/क्रेडिट कार्ड , 15 सिम कार्ड ।
आरोपी गिरोह को म्यूल बैंक खाते, सिम और बैंकिंग क्रेडेंशियल सप्लाई करते थे।
29 जून को भी दिल्ली पुलिस ने जामताड़ा समेत कई स्थानों से 10 आरोपी गिरफ्तार कर ₹26 लाख की धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया था।

दिल्ली पुलिस की दक्षिण जिला साइबर इकाई ने 1 जुलाई 2026 को एक संगठित 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए पश्चिम बंगाल से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों पर ₹7.22 लाख की ठगी में शामिल होने का आरोप है, जिसमें पीड़िता को व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर बंधक बनाकर रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया था।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस को शिकायत मिली थी कि ठगों ने पीड़िता को लगातार व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर बनाए रखा और उसे आरटीजीएस के माध्यम से रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम ने साउथ 24 परगना और हावड़ा में छापेमारी की और समीरन रॉय, प्रिंस शॉ तथा समर चटर्जी को हिरासत में लिया।

गिरफ्तार आरोपियों के पास से पुलिस ने 6 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप, 18 डेबिट/क्रेडिट कार्ड, 15 सिम कार्ड और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है।

सिंडिकेट का तरीकाकार

पुलिस के अनुसार, ये आरोपी संगठित साइबर अपराधियों को म्यूल बैंक खाते, सिम कार्ड और बैंकिंग क्रेडेंशियल उपलब्ध कराते थे। पीड़ितों को फर्जी 'डिजिटल अरेस्ट' कॉल के ज़रिए डराकर सिंडिकेट द्वारा तैयार किए गए बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए बाध्य किया जाता था। यह गिरोह अंतर-राज्यीय और कथित तौर पर अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क से भी जुड़ा बताया जा रहा है।

पहले भी हुई थी बड़ी कार्रवाई

यह ऐसे समय में आया है जब 29 जून को भी दिल्ली पुलिस ने एक बड़े अभियान में साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए जामताड़ा समेत कई स्थानों पर छापेमारी कर 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। दक्षिण-पश्चिम जिले के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त अभिमन्यु पोसवाल ने बताया था कि उस कार्रवाई में ₹26 लाख की साइबर धोखाधड़ी से जुड़े चार अलग-अलग मामलों की जांच के दौरान गिरफ्तारियाँ हुईं। उस दौरान एक महिंद्रा थार रॉक्स वाहन, 14 मोबाइल फोन और एक लैपटॉप भी बरामद किया गया था।

आगे की जांच

दक्षिण जिला साइबर पुलिस अब नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने और अपराध से अर्जित धन का पता लगाने के लिए जांच जारी रखे हुए है। गौरतलब है कि 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम में ठग खुद को सीबीआई, ईडी या कस्टम अधिकारी बताकर पीड़ितों को घंटों वीडियो कॉल पर बंधक बनाए रखते हैं — यह देशभर में तेज़ी से फैलता साइबर अपराध का एक नया और खतरनाक स्वरूप है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी म्यूल खाते और फर्जी सिम कार्ड का नेटवर्क बेरोकटोक चलता रहा। पश्चिम बंगाल और झारखंड के साइबर अपराध हॉटस्पॉट से बार-बार गिरफ्तारियाँ होती हैं, लेकिन मास्टरमाइंड अक्सर पकड़ से बाहर रहते हैं। असली परीक्षा यह है कि क्या पुलिस इस बार सप्लाई चेन — म्यूल खाता ऑपरेटर से लेकर अंतरराष्ट्रीय फंड ट्रांसफर तक — को पूरी तरह तोड़ पाती है, या यह कार्रवाई भी नेटवर्क की एक कड़ी पकड़कर खत्म हो जाती है।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'डिजिटल अरेस्ट' साइबर फ्रॉड क्या होता है?
'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम में ठग खुद को सीबीआई, ईडी, कस्टम या पुलिस अधिकारी बताकर पीड़ित को वीडियो कॉल पर घंटों 'गिरफ्तार' रखने का नाटक करते हैं और डराकर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। यह पूरी तरह फर्जी प्रक्रिया है — कोई भी वैध सरकारी एजेंसी इस तरह वीडियो कॉल पर 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती।
दिल्ली पुलिस ने किन्हें गिरफ्तार किया और कहाँ से?
दिल्ली पुलिस की दक्षिण जिला साइबर इकाई ने पश्चिम बंगाल के साउथ 24 परगना और हावड़ा में छापेमारी कर समीरन रॉय, प्रिंस शॉ और समर चटर्जी को गिरफ्तार किया। तीनों पर संगठित साइबर ठगों को म्यूल बैंक खाते और सिम कार्ड सप्लाई करने का आरोप है।
इस मामले में पीड़िता के साथ कितनी ठगी हुई?
पीड़िता से कथित तौर पर ₹7.22 लाख की धोखाधड़ी की गई। ठगों ने उसे लगातार व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर बनाए रखा और आरटीजीएस के ज़रिए रकम ट्रांसफर करवाई।
आरोपियों के पास से क्या बरामद हुआ?
गिरफ्तार तीनों आरोपियों के पास से 6 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप, 18 डेबिट/क्रेडिट कार्ड, 15 सिम कार्ड और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है।
क्या दिल्ली पुलिस ने इससे पहले भी ऐसे साइबर गिरोह पकड़े हैं?
हाँ, 29 जून 2026 को भी दिल्ली पुलिस ने जामताड़ा समेत कई स्थानों पर छापेमारी कर 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जो ₹26 लाख की साइबर धोखाधड़ी के चार मामलों से जुड़े थे। दक्षिण-पश्चिम जिले के एडीसीपी अभिमन्यु पोसवाल ने उस कार्रवाई की पुष्टि की थी।
राष्ट्र प्रेस
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