दिल्ली पुलिस ने 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया, पश्चिम बंगाल से 3 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस की दक्षिण जिला साइबर इकाई ने 1 जुलाई 2026 को एक संगठित 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए पश्चिम बंगाल से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों पर ₹7.22 लाख की ठगी में शामिल होने का आरोप है, जिसमें पीड़िता को व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर बंधक बनाकर रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया था।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस को शिकायत मिली थी कि ठगों ने पीड़िता को लगातार व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर बनाए रखा और उसे आरटीजीएस के माध्यम से रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम ने साउथ 24 परगना और हावड़ा में छापेमारी की और समीरन रॉय, प्रिंस शॉ तथा समर चटर्जी को हिरासत में लिया।
गिरफ्तार आरोपियों के पास से पुलिस ने 6 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप, 18 डेबिट/क्रेडिट कार्ड, 15 सिम कार्ड और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है।
सिंडिकेट का तरीकाकार
पुलिस के अनुसार, ये आरोपी संगठित साइबर अपराधियों को म्यूल बैंक खाते, सिम कार्ड और बैंकिंग क्रेडेंशियल उपलब्ध कराते थे। पीड़ितों को फर्जी 'डिजिटल अरेस्ट' कॉल के ज़रिए डराकर सिंडिकेट द्वारा तैयार किए गए बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने के लिए बाध्य किया जाता था। यह गिरोह अंतर-राज्यीय और कथित तौर पर अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क से भी जुड़ा बताया जा रहा है।
पहले भी हुई थी बड़ी कार्रवाई
यह ऐसे समय में आया है जब 29 जून को भी दिल्ली पुलिस ने एक बड़े अभियान में साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए जामताड़ा समेत कई स्थानों पर छापेमारी कर 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। दक्षिण-पश्चिम जिले के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त अभिमन्यु पोसवाल ने बताया था कि उस कार्रवाई में ₹26 लाख की साइबर धोखाधड़ी से जुड़े चार अलग-अलग मामलों की जांच के दौरान गिरफ्तारियाँ हुईं। उस दौरान एक महिंद्रा थार रॉक्स वाहन, 14 मोबाइल फोन और एक लैपटॉप भी बरामद किया गया था।
आगे की जांच
दक्षिण जिला साइबर पुलिस अब नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने और अपराध से अर्जित धन का पता लगाने के लिए जांच जारी रखे हुए है। गौरतलब है कि 'डिजिटल अरेस्ट' स्कैम में ठग खुद को सीबीआई, ईडी या कस्टम अधिकारी बताकर पीड़ितों को घंटों वीडियो कॉल पर बंधक बनाए रखते हैं — यह देशभर में तेज़ी से फैलता साइबर अपराध का एक नया और खतरनाक स्वरूप है।