दिल्ली साइबर सेल का बड़ा एक्शन: 'आध्यात्मिक उपचार' के नाम पर ₹2.51 लाख की ठगी, दो गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने 22 मई 2026 को एक बड़े साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए दो युवकों को गिरफ्तार किया, जो सोशल मीडिया पर फर्जी महिला प्रोफाइल बनाकर देशभर के भावनात्मक रूप से कमजोर लोगों को 'आध्यात्मिक उपचार' के नाम पर ठग रहे थे। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने कम से कम एक शिकायतकर्ता से ₹2.51 लाख की ठगी की और उनके फर्जी अकाउंट्स से देशभर में 2,000 से अधिक लोग जुड़े हुए थे।
मुख्य घटनाक्रम
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 21 वर्षीय गणेश और 21 वर्षीय मंदीप सिंह के रूप में हुई है, दोनों मूल रूप से श्रीगंगानगर, राजस्थान के निवासी हैं। पुलिस ने तकनीकी जाँच, आईपी एड्रेस ट्रैकिंग और डिजिटल फुटप्रिंट विश्लेषण के आधार पर इन्हें पंजाब के मोहाली जिले के खरड़ स्थित एक फ्लैट से पकड़ा, जहाँ से वे पूरा नेटवर्क संचालित कर रहे थे।
दोनों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी सामने आई है — एक बीए की पढ़ाई कर रहा था, जबकि दूसरा आईटीआई डीजल मैकेनिक है।
ठगी का तरीका
यह गिरोह 'ऑल प्रॉब्लम सॉल्यूशंस' नाम से सक्रिय था। आरोपी इंस्टाग्राम और फेसबुक पर 'जैनब खान', 'मुस्कान खान', 'कविता चौधरी' और 'जारा खान' जैसी फर्जी महिला प्रोफाइल बनाते थे। ये प्रोफाइल लोगों की व्यक्तिगत समस्याओं से जुड़े पोस्ट पर कमेंट कर खुद को आध्यात्मिक हीलर बताती थीं।
इसके बाद पीड़ितों को व्हाट्सएप पर जोड़ा जाता था और पूजा, तंत्र विद्या तथा अन्य धार्मिक उपायों के नाम पर चरणबद्ध तरीके से पैसे वसूले जाते थे। एक शिकायतकर्ता के अनुसार, उसे निजी समस्याओं के समाधान का वादा कर भावनात्मक रूप से प्रभावित करते हुए ₹2.51 लाख की ठगी की गई।
बरामदगी और साक्ष्य
पुलिस ने आरोपियों के पास से 5 स्मार्टफोन, फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स, चैट्स, क्यूआर कोड और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं। इन डिवाइसेस में ठगी से जुड़ा महत्वपूर्ण डेटा मिला है, जिसकी जाँच जारी है।
जाँच की स्थिति
पुलिस के अनुसार, मामले की जाँच अभी जारी है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों तथा पीड़ितों की पहचान की जा रही है। साथ ही ठगी की कुल रकम और पूरे मनी ट्रेल का भी पता लगाया जा रहा है।
आम जनता के लिए चेतावनी
दिल्ली पुलिस ने नागरिकों को सतर्क किया है कि सोशल मीडिया पर इस तरह के फर्जी आध्यात्मिक दावों से सावधान रहें, क्योंकि ये गिरोह भावनात्मक कमजोरी का फायदा उठाकर लोगों को निशाना बनाते हैं। यह मामला उस बढ़ती प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें साइबर अपराधी धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत संकट का शोषण कर ऑनलाइन ठगी को अंजाम देते हैं।