दिल्ली पुलिस ने जामताड़ा गैंग के 10 साइबर ठगों को दबोचा, ₹26 लाख की धोखाधड़ी का भंडाफोड़
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस के दक्षिण-पश्चिम जिले ने 29 जून 2025 को एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई झारखंड के जामताड़ा और देवघर समेत कई राज्यों में फैले संगठित साइबर फ्रॉड रैकेट के खिलाफ थी, जिसने चार अलग-अलग मामलों में पीड़ितों से कुल मिलाकर लगभग ₹26 लाख की ठगी की थी। पुलिस के अनुसार, आगे की जाँच जारी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है।
ऑपरेशन का विवरण
दक्षिण-पश्चिम जिले के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (एडीसीपी) अभिमन्यु पोसवाल ने बताया कि यह कार्रवाई चार अलग-अलग थानों में दर्ज 4 एफआईआर की जाँच के दौरान की गई। ऑपरेशन का नेतृत्व इंस्पेक्टर प्रवेश कॉसिक (एसएचओ) ने किया, जिनके साथ सब-इंस्पेक्टर अमित मलिक, सब-इंस्पेक्टर चंदन राजपूत, हेड कांस्टेबल विक्रम, हेड कांस्टेबल सुखलाल, हेड कांस्टेबल मरेंदर, हेड कांस्टेबल विजय पाल और कांस्टेबल रवि शामिल थे। टीम ने अलग-अलग लोकेशन पर छापेमारी कर आरोपियों को दबोचा।
मुख्य आरोपी और गिरफ्तार संदिग्ध
पुलिस के अनुसार, इस साइबर गिरोह का कथित मास्टरमाइंड मंजूर आलम है, जो झारखंड के जामताड़ा और देवघर से पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। शेष गिरफ्तार आरोपियों में यूसुफ (बुलंदशहर), आर्यन (मेरठ), राम प्रकाश (मेरठ), मनोहर (19 वर्ष, मेरठ), प्रिय दर्शन (मेरठ), रविंद्र कुमार (देवघर), राम विजय कुमार दास (दिल्ली-एनसीआर), अंकित कुमार (22 वर्ष, हजारीबाग) और गोलु कुमार (23 वर्ष, झारखंड) शामिल हैं।
पीड़ितों से कितनी ठगी हुई
एडीसीपी पोसवाल के अनुसार, चार मामलों में से पहले में एक बुजुर्ग व्यक्ति से ₹18.5 लाख की ऑनलाइन धोखाधड़ी हुई — जो इस रैकेट की सबसे बड़ी एकल वारदात है। दूसरे मामले में एक अन्य पीड़ित से ₹1 लाख की ठगी की गई। चौथे मामले में पीड़ित से ₹6 लाख 31 हजार की धोखाधड़ी हुई। तीसरा मामला भी साइबर अपराध से संबंधित था।
बरामद सामग्री
छापेमारी के दौरान पुलिस ने एक महिंद्रा थार रॉक्स गाड़ी, 14 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप और अपराध से जुड़े कई अन्य साक्ष्य बरामद किए। ये उपकरण साइबर ठगी के संचालन में इस्तेमाल किए जाने का संदेह है।
आगे की जाँच
एडीसीपी अभिमन्यु पोसवाल ने बताया कि इस नेटवर्क की पूरी कड़ी का पता लगाने और साइबर फ्रॉड में शामिल अन्य व्यक्तियों की पहचान के लिए जाँच जारी है। गौरतलब है कि जामताड़ा लंबे समय से देश के सबसे सक्रिय साइबर अपराध केंद्रों में से एक माना जाता रहा है और यह कार्रवाई संगठित डिजिटल ठगी के खिलाफ दिल्ली पुलिस की बढ़ती सक्रियता का संकेत देती है।