29 जून 2026
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दिल्ली पुलिस ने जामताड़ा गैंग के 10 साइबर ठगों को दबोचा, ₹26 लाख की धोखाधड़ी का भंडाफोड़

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दिल्ली पुलिस ने जामताड़ा गैंग के 10 साइबर ठगों को दबोचा, ₹26 लाख की धोखाधड़ी का भंडाफोड़

सारांश

दिल्ली पुलिस ने जामताड़ा और देवघर से ऑपरेट हो रहे साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। मास्टरमाइंड मंजूर आलम समेत 10 आरोपी गिरफ्तार, ₹26 लाख की ठगी के 4 मामले सुलझे और महिंद्रा थार रॉक्स समेत 14 मोबाइल व लैपटॉप बरामद।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ने 29 जून 2025 को साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ कर 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
कथित मास्टरमाइंड मंजूर आलम झारखंड के जामताड़ा और देवघर से गिरोह चला रहा था।
चार मामलों में कुल लगभग ₹26 लाख की धोखाधड़ी, जिसमें एक बुजुर्ग से अकेले ₹18.5 लाख की ठगी शामिल।
बरामदगी में महिंद्रा थार रॉक्स , 14 मोबाइल फोन , 1 लैपटॉप और अन्य साक्ष्य शामिल।
आरोपी उत्तर प्रदेश, झारखंड और दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न जिलों से थे।
नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान के लिए जाँच जारी है।

दिल्ली पुलिस के दक्षिण-पश्चिम जिले ने 29 जून 2025 को एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई झारखंड के जामताड़ा और देवघर समेत कई राज्यों में फैले संगठित साइबर फ्रॉड रैकेट के खिलाफ थी, जिसने चार अलग-अलग मामलों में पीड़ितों से कुल मिलाकर लगभग ₹26 लाख की ठगी की थी। पुलिस के अनुसार, आगे की जाँच जारी है और नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान की जा रही है।

ऑपरेशन का विवरण

दक्षिण-पश्चिम जिले के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (एडीसीपी) अभिमन्यु पोसवाल ने बताया कि यह कार्रवाई चार अलग-अलग थानों में दर्ज 4 एफआईआर की जाँच के दौरान की गई। ऑपरेशन का नेतृत्व इंस्पेक्टर प्रवेश कॉसिक (एसएचओ) ने किया, जिनके साथ सब-इंस्पेक्टर अमित मलिक, सब-इंस्पेक्टर चंदन राजपूत, हेड कांस्टेबल विक्रम, हेड कांस्टेबल सुखलाल, हेड कांस्टेबल मरेंदर, हेड कांस्टेबल विजय पाल और कांस्टेबल रवि शामिल थे। टीम ने अलग-अलग लोकेशन पर छापेमारी कर आरोपियों को दबोचा।

मुख्य आरोपी और गिरफ्तार संदिग्ध

पुलिस के अनुसार, इस साइबर गिरोह का कथित मास्टरमाइंड मंजूर आलम है, जो झारखंड के जामताड़ा और देवघर से पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। शेष गिरफ्तार आरोपियों में यूसुफ (बुलंदशहर), आर्यन (मेरठ), राम प्रकाश (मेरठ), मनोहर (19 वर्ष, मेरठ), प्रिय दर्शन (मेरठ), रविंद्र कुमार (देवघर), राम विजय कुमार दास (दिल्ली-एनसीआर), अंकित कुमार (22 वर्ष, हजारीबाग) और गोलु कुमार (23 वर्ष, झारखंड) शामिल हैं।

पीड़ितों से कितनी ठगी हुई

एडीसीपी पोसवाल के अनुसार, चार मामलों में से पहले में एक बुजुर्ग व्यक्ति से ₹18.5 लाख की ऑनलाइन धोखाधड़ी हुई — जो इस रैकेट की सबसे बड़ी एकल वारदात है। दूसरे मामले में एक अन्य पीड़ित से ₹1 लाख की ठगी की गई। चौथे मामले में पीड़ित से ₹6 लाख 31 हजार की धोखाधड़ी हुई। तीसरा मामला भी साइबर अपराध से संबंधित था।

बरामद सामग्री

छापेमारी के दौरान पुलिस ने एक महिंद्रा थार रॉक्स गाड़ी, 14 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप और अपराध से जुड़े कई अन्य साक्ष्य बरामद किए। ये उपकरण साइबर ठगी के संचालन में इस्तेमाल किए जाने का संदेह है।

आगे की जाँच

एडीसीपी अभिमन्यु पोसवाल ने बताया कि इस नेटवर्क की पूरी कड़ी का पता लगाने और साइबर फ्रॉड में शामिल अन्य व्यक्तियों की पहचान के लिए जाँच जारी है। गौरतलब है कि जामताड़ा लंबे समय से देश के सबसे सक्रिय साइबर अपराध केंद्रों में से एक माना जाता रहा है और यह कार्रवाई संगठित डिजिटल ठगी के खिलाफ दिल्ली पुलिस की बढ़ती सक्रियता का संकेत देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक गहरी संरचनागत समस्या की निशानदेही है। वर्षों की केंद्रीय और राज्य-स्तरीय कार्रवाइयों के बावजूद झारखंड के ये इलाके साइबर ठगों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बने हुए हैं। दिल्ली पुलिस की यह कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि गिरफ्तारियों के बाद सजा की दर कितनी है — क्योंकि बार-बार की गई गिरफ्तारियाँ तब तक निरोधक नहीं बनतीं जब तक अभियोजन पक्ष मज़बूत न हो। बुजुर्गों को निशाना बनाकर ₹18.5 लाख तक की ठगी यह भी बताती है कि डिजिटल साक्षरता अभियान अभी तक सबसे कमज़ोर वर्ग तक नहीं पहुँचे हैं।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली पुलिस ने जामताड़ा गैंग के कितने आरोपियों को गिरफ्तार किया?
दिल्ली पुलिस के दक्षिण-पश्चिम जिले ने 29 जून 2025 को 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें कथित मास्टरमाइंड मंजूर आलम समेत उत्तर प्रदेश, झारखंड और दिल्ली-एनसीआर के संदिग्ध शामिल हैं।
इस साइबर फ्रॉड में कुल कितनी रकम की ठगी हुई?
चार अलग-अलग मामलों में कुल मिलाकर लगभग ₹26 लाख की धोखाधड़ी हुई। सबसे बड़ा मामला एक बुजुर्ग व्यक्ति से जुड़ा है, जिनसे अकेले ₹18.5 लाख की ऑनलाइन ठगी हुई।
मास्टरमाइंड मंजूर आलम कहाँ से गिरोह चला रहा था?
पुलिस के अनुसार, मंजूर आलम झारखंड के जामताड़ा और देवघर से इस साइबर अपराध नेटवर्क को संचालित कर रहा था। उसे गिरफ्तार कर लिया गया है और आगे की जाँच जारी है।
छापेमारी में क्या-क्या बरामद हुआ?
पुलिस ने एक महिंद्रा थार रॉक्स गाड़ी, 14 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप और अपराध से जुड़े कई अन्य साक्ष्य बरामद किए। ये उपकरण साइबर ठगी के संचालन में इस्तेमाल किए जाने का संदेह है।
इस ऑपरेशन को किसने अंजाम दिया?
यह कार्रवाई दक्षिण-पश्चिम जिले की पुलिस टीम ने की, जिसका नेतृत्व इंस्पेक्टर प्रवेश कॉसिक (एसएचओ) ने किया। टीम में सब-इंस्पेक्टर अमित मलिक, सब-इंस्पेक्टर चंदन राजपूत और कई हेड कांस्टेबल व कांस्टेबल शामिल थे।
राष्ट्र प्रेस
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