मुंबई साइबर पुलिस ने APK फ्रॉड गिरोह के 6 सदस्य दबोचे, ₹43.25 करोड़ की ठगी का खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई साइबर पुलिस ने 25 जून 2026 को एक बड़ी अंतरराज्यीय कार्रवाई में फर्जी APK (एप्लीकेशन पैकेज) फाइलों के ज़रिए मोबाइल हैक कर ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया। झारखंड और नई दिल्ली में एक साथ छापेमारी कर छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक जाँच में यह गिरोह देशभर में 3,206 साइबर ठगी की घटनाओं में शामिल पाया गया है, जिसमें कुल ₹43.25 करोड़ की धोखाधड़ी का अनुमान है।
कैसे काम करता था यह गिरोह
पुलिस के अनुसार, आरोपी अज्ञात नंबरों और व्हाट्सएप के ज़रिए लोगों को फर्जी संदेश भेजते थे, जिनमें एक APK फाइल का लिंक होता था। जैसे ही पीड़ित वह ऐप इंस्टॉल करता, गिरोह के सदस्य उस मोबाइल में मौजूद बैंक खाते की जानकारी, एटीएम कार्ड नंबर, CVV, PIN और UPI ID चुरा लेते थे।
इसी तरीके से शिकायतकर्ता से ₹2,35,000 की ठगी की गई, जिसके आधार पर साइबर पुलिस थाना, पश्चिम विभाग, मुंबई में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं
तकनीकी जाँच के आधार पर पुलिस ने फर्जी APK बनाने, फैलाने और पीड़ितों को फँसाने वाले सदस्यों की पहचान की। गिरफ्तार छह आरोपी इस प्रकार हैं:
आरिफ अस्तुत अंसारी (झारखंड, गिरिडीह), शेख बेलाल नौशाद (झारखंड, गिरिडीह), मेहबूब नौशाद आलम (झारखंड, गिरिडीह), साजिद मंसूर अली (नई दिल्ली), मोहन कुशल महतो (झारखंड, धनबाद), और सुनील कुमार दशरथ सोरेन (झारखंड, धनबाद)।
जाँच में क्या मिला
पुलिस ने आरोपियों के पास से 11 मोबाइल फोन और 1 लैपटॉप जब्त किया है। डिजिटल फॉरेंसिक में 911 फर्जी APK फाइलें और 83 अलग-अलग पैकेज नाम सामने आए हैं।
इसके अलावा व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप, बॉट्स, चैट रिकॉर्ड, सर्वर लॉगिन क्रेडेंशियल्स और कई URL भी बरामद हुए हैं। सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह रहा कि आरोपियों के सिस्टम से लगभग 1.24 करोड़ SMS रिकॉर्ड और 8,609 मोबाइल नंबरों का संवेदनशील डेटा मिला।
आम जनता पर असर और पुलिस की चेतावनी
अकेले महाराष्ट्र में इस गिरोह से जुड़ी 517 शिकायतें और मुंबई में 93 शिकायतें दर्ज हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में APK-आधारित साइबर ठगी के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं।
साइबर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात नंबर या व्हाट्सएप से भेजी गई APK फाइल को इंस्टॉल न करें और न ही किसी अनजान ZIP फाइल को खोलें। आगे की जाँच जारी है और अन्य राज्यों में भी संभावित संपर्कों की तलाश की जा रही है।