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पटना साइबर पुलिस ने 'डिजिटल अरेस्ट' गैंग का भंडाफोड़ किया, तीन आरोपी गिरफ्तार

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पटना साइबर पुलिस ने 'डिजिटल अरेस्ट' गैंग का भंडाफोड़ किया, तीन आरोपी गिरफ्तार

सारांश

पटना साइबर पुलिस ने 'डिजिटल अरेस्ट' और करोड़ों की ऑनलाइन ठगी करने वाले संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया। गौरव कुमार, आदर्श कुमार और अमन राज गिरफ्तार — छह मोबाइल, दो लैपटॉप और बैंक दस्तावेज़ बरामद। गिरोह पिछले छह महीनों से कई राज्यों में सक्रिय था।

मुख्य बातें

पटना साइबर पुलिस ने 3 सितंबर 2026 को 'डिजिटल अरेस्ट' और ऑनलाइन धोखाधड़ी में लिप्त संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया।
गिरफ्तार आरोपी: गौरव कुमार (खगौल-दानापुर), आदर्श कुमार (ट्रांसपोर्ट नगर) और अमन राज (कुम्हरार)।
गिरोह पिछले छह महीनों से पटना में सक्रिय था और कई राज्यों में करोड़ों रुपये की ठगी की।
बरामदगी में 6 मोबाइल फोन , 2 लैपटॉप , 3 चेकबुक , 2 पासबुक , 5 एटीएम कार्ड और एक राजनीतिक पार्टी के झंडे वाली कार शामिल।
आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत एफआईआर दर्ज; तीनों न्यायिक हिरासत में।
बरामद सामग्री की फोरेंसिक जाँच जारी; गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश।

पटना साइबर पुलिस ने 3 सितंबर 2026 को एक संगठित साइबर अपराध गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो कथित तौर पर 'डिजिटल अरेस्ट', वित्तीय धोखाधड़ी और ऑनलाइन ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहे थे। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने कई राज्यों में लोगों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी की।

मुख्य घटनाक्रम

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान खगौल-दानापुर की न्यू कॉलोनी निवासी गौरव कुमार, ट्रांसपोर्ट नगर के आदर्श कुमार और कुम्हरार के अमन राज के रूप में हुई है। शुरुआती जाँच से पता चला है कि तीनों एक संगठित साइबर क्राइम नेटवर्क के सक्रिय सदस्य थे।

पुलिस के अनुसार, ये आरोपी पिछले छह महीनों से पटना में सक्रिय थे और पकड़े जाने से बचने के लिए लगातार अपना ठिकाना बदलते रहते थे।

बरामदगी और तकनीकी सुराग

साइबर पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने साइबर अपराध में इस्तेमाल की गई कई सामग्री बरामद की, जिनमें शामिल हैं:

एक राजनीतिक पार्टी का झंडा लगी कार, छह मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, तीन चेकबुक, दो पासबुक और पाँच एटीएम कार्ड। इन सभी की अब विस्तृत जाँच की जा रही है।

गौरतलब है कि नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर इन आरोपियों से जुड़ी कई शिकायतें पहले से दर्ज थीं, जिन्होंने जाँचकर्ताओं को सुराग देने में अहम भूमिका निभाई।

कानूनी कार्रवाई

पटना साइबर पुलिस स्टेशन में आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है। तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

आम जनता पर असर

यह गिरोह 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे नए और भ्रामक तरीकों का इस्तेमाल करता था, जिसमें पीड़ितों को सरकारी अधिकारी या पुलिस अधिकारी बनकर डराया जाता है और उन्हें ऑनलाइन ही 'हिरासत में' रखने का भ्रम दिया जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में डिजिटल अरेस्ट के मामलों में तेज़ी से वृद्धि हो रही है।

क्या होगा आगे

पुलिस के अनुसार, आगे की जाँच जारी है। बरामद मोबाइल फोन, लैपटॉप और बैंक दस्तावेजों की फोरेंसिक जाँच से गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान और धोखाधड़ी से जुड़े वित्तीय लेन-देन का पूरा ब्यौरा सामने आने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें साइबर ठग सरकारी तंत्र का भय दिखाकर पीड़ितों को मनोवैज्ञानिक रूप से जकड़ लेते हैं। पटना में इस गिरोह की गतिविधियाँ छह महीने तक अनदेखी रहीं, जो राज्य में साइबर निगरानी की सीमाओं को उजागर करती हैं। बरामद सामग्री में राजनीतिक पार्टी के झंडे वाली कार का होना जाँच में एक अहम पहलू है जिस पर पुलिस को पारदर्शी रहना होगा। असली परीक्षा अब यह है कि क्या जाँच गिरोह के सरगनाओं तक पहुँचती है, या केवल निचले स्तर के ऑपरेटिव पकड़े जाने पर ही मामला बंद हो जाता है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पटना में 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर गैंग क्या था?
यह एक संगठित साइबर अपराध गिरोह था जो 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर पीड़ितों को सरकारी अधिकारी बनकर डराता था और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी करता था। गिरोह कई राज्यों में सक्रिय था और करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका था।
पटना साइबर पुलिस ने किन्हें गिरफ्तार किया?
पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया — खगौल-दानापुर की न्यू कॉलोनी के गौरव कुमार, ट्रांसपोर्ट नगर के आदर्श कुमार और कुम्हरार के अमन राज। तीनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
गिरफ्तारी में कौन-कौन सी सामग्री बरामद हुई?
पुलिस ने छह मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, तीन चेकबुक, दो पासबुक, पाँच एटीएम कार्ड और एक राजनीतिक पार्टी का झंडा लगी कार बरामद की। इन सभी की फोरेंसिक जाँच जारी है।
'डिजिटल अरेस्ट' धोखाधड़ी से आम लोग कैसे बचें?
कोई भी वास्तविक सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती। ऐसी किसी भी कॉल पर तुरंत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करें।
इस मामले में आगे क्या होगा?
पुलिस बरामद डिजिटल उपकरणों और बैंक दस्तावेजों की जाँच कर गिरोह के अन्य सदस्यों और वित्तीय लेन-देन का पता लगाने की कोशिश कर रही है। आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता के तहत दर्ज एफआईआर में और नाम जुड़ने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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