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बिहार: पूर्वी चंपारण में साइबर धोखाधड़ी रैकेट का पर्दाफाश, चार लोग गिरफ्तार

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बिहार: पूर्वी चंपारण में साइबर धोखाधड़ी रैकेट का पर्दाफाश, चार लोग गिरफ्तार

सारांश

पूर्वी चंपारण में पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। चार आरोपियों को गिरफ्तार कर कई महत्वपूर्ण सामग्री बरामद की गई है। जानिए कैसे यह गिरोह काम करता था और उसके पीछे के तथ्यों के बारे में।

मुख्य बातें

साइबर धोखाधड़ी रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है।
चार आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं।
पुलिस ने कई आपत्तिजनक सामान बरामद किए हैं।
गिरोह ने सोशल मीडिया का उपयोग कर धोखाधड़ी की थी।
जांच में अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन का पता चला है।

पटना, 15 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के कल्याणपुर थाना क्षेत्र में सक्रिय एक अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी रैकेट का भंडाफोड़ किया गया है। इस कार्रवाई के दौरान ऐसे तथ्य सामने आए हैं जो देश की सीमाओं को पार करते हैं। इस मामले में चार व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है।

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, पकड़े गए आरोपियों का संबंध एक संगठित साइबर अपराध नेटवर्क से था, जो पीड़ितों से धोखाधड़ी के माध्यम से ठगी गई राशि पर 10 प्रतिशत कमीशन लेते थे।

यह अभियान तब शुरू हुआ जब पुलिस को एक संदिग्ध साइबर अपराधी, खतोलवा गांव के अंकित कुमार, के बारे में जानकारी मिली, जो एक एटीएम के निकट देखा गया था।

पुलिस की एक टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उसे मौके पर पकड़ लिया। पूछताछ के दौरान, अंकित ने एक विशाल नेटवर्क की जानकारी दी, जिसके आधार पर उसके तीन अन्य साथियों को भी गिरफ्तार किया गया।

इस मामले की जानकारी देते हुए सब-डिविजनल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) संतोष कुमार ने बताया कि आरोपी उन साइबर अपराधियों के साथ काम कर रहे थे, जो पाकिस्तान में स्थित थे।

आरोप है कि यह गिरोह लोगों को लूटने के लिए सोशल मीडिया पर भ्रामक विज्ञापनों और झूठी कानूनी कार्रवाई की धमकियों का सहारा लेता था।

कई मामलों में, पीड़ितों को आम तौर पर 'डिजिटल अरेस्ट' के तरीके से ठगा गया, जिसमें पैसे वसूलने के लिए डर का इस्तेमाल किया जाता है।

धोखाधड़ी से अर्जित धन बाद में कैश डिपॉजिट मशीनों के माध्यम से उनके विदेशी आकाओं को भेजा जाता था, जबकि आरोपियों ने कमीशन अपने पास रख लिया।

जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह के तार अन्य राज्यों और देशों के सक्रिय साइबर अपराधियों से जुड़े थे।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान अंकित कुमार (खतोलवा गांव), युवराज कुमार (केसरिया गांव), मोहम्मद (गरहिया गांव) और चुन्नू कुमार (गजहौलिया गांव) के रूप में की गई है।

पुलिस ने उनके पास से कई आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की हैं, जिनमें सात बैंक पासबुक, 10 एटीएम कार्ड, एक लैपटॉप और पाँच मोबाइल फोन शामिल हैं।

इसके अलावा, दो महंगी मोटरसाइकिलें और अपराधों के लिए उपयोग की गई एक पल्सर मोटरसाइकिल भी जब्त की गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें साइबर धोखाधड़ी का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय था। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से चार आरोपियों को पकड़ा गया है, जो कि एक संगठित अपराध के हिस्से थे। यह घटना दिखाती है कि हमारा समाज कितनी तेजी से साइबर अपराध के खतरे का सामना कर रहा है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस साइबर धोखाधड़ी रैकेट में आरोपी कैसे काम कर रहे थे?
आरोपी पीड़ितों से धोखाधड़ी के जरिए पैसे वसूलने के लिए सोशल मीडिया पर भ्रामक विज्ञापनों और झूठी कानूनी कार्रवाई की धमकियों का इस्तेमाल कर रहे थे।
पुलिस ने कितने आरोपियों को गिरफ्तार किया?
पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से सभी विभिन्न गांवों से हैं।
गिरफ्तार आरोपियों के पास से क्या सामग्री मिली?
पुलिस ने उनके पास से कई आपत्तिजनक चीजें बरामद की हैं, जिनमें बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, लैपटॉप और मोबाइल फोन शामिल हैं।
क्या यह गिरोह केवल बिहार में सक्रिय था?
नहीं, जांच में पता चला है कि इस गिरोह के तार अन्य राज्यों और देशों के सक्रिय साइबर अपराधियों से जुड़े थे।
साइबर धोखाधड़ी से लोगों को कैसे ठगा जाता था?
इन गिरोहों ने लोगों को फंसाने के लिए डिजिटल अरेस्ट जैसी तकनीक का सहारा लिया, जिसमें लोगों को डराकर पैसे वसूले जाते थे।
राष्ट्र प्रेस
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