सीबीआई ने 13 देशों के 30 अधिकारियों को आर्थिक अपराध जांच की ट्रेनिंग दी, गाजियाबाद में हुआ कोर्स
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 27 अगस्त से 2 सितंबर 2026 तक गाजियाबाद स्थित सीबीआई एकेडमी में आईटीईसी (इंडियन टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन) के 13 सदस्य देशों के 30 अधिकारियों के लिए आर्थिक अपराधों की जांच पर एक सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। यह कार्यक्रम विदेश मंत्रालय के आईटीईसी कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित किया गया, जो भारत की तकनीकी सहयोग पहल का अहम हिस्सा है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम का स्वरूप
एक सप्ताह के इस गहन प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को आर्थिक अपराधों की जांच से जुड़ी जागरूकता, व्यावहारिक कौशल और मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) की व्यापक जानकारी दी गई। कोर्स में आर्थिक अपराधों के विभिन्न स्वरूपों, उनसे जुड़ी चुनौतियों और सफल अभियोजन के लिए अपनाई जाने वाली सर्वोत्तम प्रक्रियाओं पर विस्तृत चर्चा की गई।
समापन समारोह बुधवार, 3 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय में आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता सीबीआई के अतिरिक्त निदेशक एन. वेणु गोपाल ने की।
मुख्य संदेश: सीमाओं से परे है आर्थिक अपराध
प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए अतिरिक्त निदेशक एन. वेणु गोपाल ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आर्थिक अपराधों की जांच का दायरा और असर सामान्यतः भौगोलिक सीमाओं से बहुत आगे तक जाता है। उन्होंने प्रतिभागियों के साथ सीधी बातचीत भी की और अंतरराष्ट्रीय मामलों में अपनाई जाने वाली सर्वोत्तम प्रक्रियाओं पर विचार साझा किए।
भाग लेने वाले देश
इस कार्यक्रम में भूटान, फिजी, किंगडम ऑफ एस्वातिनी (पूर्व में स्वाजीलैंड), लेबनान, लेसोथो, लाइबेरिया, मालदीव, मॉरिशस, मैक्सिको, ओमान, तंजानिया, थाईलैंड और जाम्बिया — कुल 13 देशों के 30 अधिकारियों ने भाग लिया। इन देशों का भौगोलिक विस्तार एशिया, अफ्रीका, प्रशांत और लैटिन अमेरिका तक है, जो इस प्रशिक्षण की वैश्विक प्रासंगिकता को रेखांकित करता है।
आईटीईसी और भारत की सॉफ्ट पावर
आईटीईसी कार्यक्रम भारत सरकार की एक प्रमुख तकनीकी सहयोग पहल है, जिसके तहत विकासशील देशों के अधिकारियों को भारत में विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाता है। सीबीआई एकेडमी का यह कोर्स भारत की कानून प्रवर्तन विशेषज्ञता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। गौरतलब है कि आर्थिक अपराध — जिनमें मनी लॉन्ड्रिंग, साइबर धोखाधड़ी और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अपराध शामिल हैं — आज के डिजिटल युग में किसी एक देश की समस्या नहीं रहे।
आगे की राह
इस प्रकार के बहुपक्षीय प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल भाग लेने वाले देशों की जांच क्षमता को मजबूत करते हैं, बल्कि आर्थिक अपराधों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग की नींव भी रखते हैं। सीबीआई की यह पहल भविष्य में और अधिक देशों को इस नेटवर्क से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।