जयशंकर का कीव दौरा संपन्न: जेलेंस्की से मुलाकात, गांधी को श्रद्धांजलि और शांति का संदेश
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 3 सितंबर 2026 को कीव में अपना दौरा समाप्त किया — नेशनल बॉटनिकल गार्डन में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित कर। यूक्रेन-रूस संघर्ष के बीच यह भारत की उच्चस्तरीय कूटनीतिक उपस्थिति का अहम संकेत है, जिसमें भारत ने एक बार फिर बातचीत और शांति की पैरवी की।
गांधी को श्रद्धांजलि और शांति का आह्वान
जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'कीव के नेशनल बॉटनिकल गार्डन में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देकर अपने दौरे का समापन किया। उनका जीवन और संदेश 'अंतहीन युद्ध से युद्ध के अंत की ओर' बढ़ने की जरूरत को रेखांकित करता है।' यह कदम प्रतीकात्मक रूप से भारत की उस नीति को दर्शाता है, जो किसी एक पक्ष का समर्थन किए बिना संवाद को प्राथमिकता देती है।
जेलेंस्की से मुलाकात: द्विपक्षीय और संघर्ष-समाधान पर चर्चा
दौरे के दौरान जयशंकर ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा से मुलाकात की। बैठक में भारत-यूक्रेन द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने के साथ-साथ जारी संघर्ष को समाप्त करने के उपायों पर विस्तृत चर्चा हुई। जयशंकर ने एक्स पर लिखा, 'हमारी बातचीत जारी संघर्ष को समाप्त करने के तरीकों पर केंद्रित रही।'
जेलेंस्की का बयान: भारत की भूमिका की सराहना
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने भी एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने लिखा, 'हम इस अन्यायपूर्ण युद्ध को समाप्त करने की भारत की इच्छा के लिए आभारी हैं। यह निश्चित रूप से युद्ध का समय नहीं होना चाहिए। शांति की आवश्यकता है — यह भारत की स्पष्ट स्थिति है।' दोनों पक्षों ने काला सागर की स्थिति सहित अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया।
दौरे के दौरान ड्रोन हमला, प्रतिनिधिमंडल सुरक्षित
जेलेंस्की ने यह भी बताया कि जयशंकर के कीव में रहने के दौरान रूस ने ईरानी तकनीक से बने जेट-संचालित 'शाहेद' ड्रोन दागे। उन्होंने कहा कि यूक्रेनी लड़ाकू विमानों ने अधिकांश ड्रोन को मार गिराया और भारतीय प्रतिनिधिमंडल पूरी तरह सुरक्षित रहा। जेलेंस्की ने अन्य देशों से भी युद्ध समाप्ति के पक्ष में स्पष्ट रुख अपनाने की अपील की।
भारत की कूटनीतिक स्थिति: संतुलन और संवाद
गौरतलब है कि भारत ने रूस-यूक्रेन संघर्ष में किसी एक पक्ष का खुलकर साथ नहीं दिया है। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक दबाव के बीच भारत की मध्यस्थ भूमिका को लेकर चर्चा तेज है। जयशंकर का यह कीव दौरा भारत की उस 'शांति-केंद्रित' विदेश नीति का विस्तार है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मॉस्को और कीव दोनों के साथ संपर्क बनाए रखने की रणनीति पर आधारित है। आगे भारत की कूटनीतिक भूमिका और किस दिशा में जाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।