यूक्रेन ने भारत को बताया 'वैश्विक महाशक्ति', जयशंकर की ऐतिहासिक कीव यात्रा में मोदी के शांति आह्वान का स्वागत
सारांश
मुख्य बातें
यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने 3 सितंबर को भारत को 'वैश्विक महाशक्ति' करार देते हुए कहा कि कीव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस आह्वान का स्वागत करता है, जिसमें उन्होंने अंतहीन युद्ध से बाहर निकलकर युद्ध के अंत की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही थी। यह टिप्पणी विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता के दौरान आई, जो किसी भारतीय विदेश मंत्री की यूक्रेन की पहली समर्पित द्विपक्षीय यात्रा के रूप में दर्ज हुई।
ऐतिहासिक यात्रा और सिबिहा का बयान
सिबिहा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'कीव में अपने भारतीय सहयोगी एस. जयशंकर का स्वागत करते हुए सम्मानित महसूस कर रहा हूं — यह किसी भारतीय विदेश मंत्री की यूक्रेन की पहली समर्पित द्विपक्षीय यात्रा है।' उन्होंने इसे ऐसे समय में 'साहसिक यात्रा' बताया, जब रूसी हमले यूक्रेनी शहरों, बंदरगाह के बुनियादी ढाँचे और नागरिक जहाज़रानी को निशाना बना रहे हैं और राजधानी कीव लगातार हमलों की चपेट में है।
काला सागर और वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर चर्चा
वार्ता के दौरान दोनों विदेश मंत्रियों ने काला सागर में नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने और वैश्विक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर विचार-विमर्श किया। सिबिहा ने स्पष्ट किया, 'भारत एक वैश्विक शक्ति है और हम प्रधानमंत्री मोदी के अंतहीन युद्ध से युद्ध के अंत की ओर बढ़ने के आह्वान का स्वागत करते हैं। यूक्रेन कूटनीति के लिए तैयार है।'
द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार
दोनों पक्षों ने बुनियादी ढाँचे, फार्मास्युटिकल क्षेत्र, तकनीकी नवाचार और डिजिटलीकरण में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। यूक्रेनी विदेश मंत्री ने बताया कि दोनों देश अपनी अगली अंतर-सरकारी आयोग की बैठक बुलाने पर काम करने के लिए सहमत हुए, ताकि द्विपक्षीय संभावनाओं को ठोस और पारस्परिक रूप से लाभकारी परियोजनाओं में बदला जा सके।
मोदी का पुतिन के साथ संवाद और भारत की स्थिति
गौरतलब है कि इससे कुछ दिन पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के इतर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक की थी। उस बैठक में मोदी ने दोहराया कि भारत यूक्रेन में शांति हासिल करने के सभी प्रयासों का समर्थन करता है और मानवता की भलाई के लिए अंतहीन युद्ध से बाहर निकलना ज़रूरी है। पुतिन ने भी उस बैठक में संघर्ष के सभी पहलुओं पर मोदी को विस्तार से जानकारी दी थी।
आगे क्या होगा
जयशंकर की यह यात्रा भारत की उस कूटनीतिक रणनीति की अगली कड़ी है, जिसमें नई दिल्ली दोनों पक्षों — रूस और यूक्रेन — से संवाद बनाए रखते हुए शांति की दिशा में मध्यस्थ की भूमिका निभाने का प्रयास कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक समुदाय यूक्रेन संघर्ष के कूटनीतिक समाधान के लिए दबाव बढ़ा रहा है।