4 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

यूक्रेन ने भारत को बताया 'वैश्विक महाशक्ति', जयशंकर की ऐतिहासिक कीव यात्रा में मोदी के शांति आह्वान का स्वागत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
यूक्रेन ने भारत को बताया 'वैश्विक महाशक्ति', जयशंकर की ऐतिहासिक कीव यात्रा में मोदी के शांति आह्वान का स्वागत

सारांश

किसी भारतीय विदेश मंत्री की यूक्रेन की पहली समर्पित यात्रा में जयशंकर ने कीव पहुँचकर नई दिल्ली का संदेश स्पष्ट किया — भारत दोनों पक्षों से बात करेगा। यूक्रेन ने भारत को 'वैश्विक महाशक्ति' कहकर मोदी के शांति आह्वान का स्वागत किया, जो भारत की संतुलित कूटनीति की बड़ी स्वीकृति है।

मुख्य बातें

यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने भारत को 'वैश्विक महाशक्ति' बताया और PM मोदी के युद्ध समाप्ति के आह्वान का स्वागत किया।
जयशंकर की कीव यात्रा किसी भारतीय विदेश मंत्री की यूक्रेन की पहली समर्पित द्विपक्षीय यात्रा है।
दोनों पक्षों ने काला सागर नौवहन स्वतंत्रता , वैश्विक खाद्य सुरक्षा और द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा की।
अंतर-सरकारी आयोग की बैठक बुलाने पर सहमति बनी, जिसमें बुनियादी ढाँचा, फार्मा और डिजिटलीकरण पर फोकस होगा।
PM मोदी ने इससे पहले बिश्केक SCO शिखर सम्मेलन में पुतिन के साथ बैठक में भी यूक्रेन शांति प्रयासों के समर्थन को दोहराया था।

यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने 3 सितंबर को भारत को 'वैश्विक महाशक्ति' करार देते हुए कहा कि कीव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस आह्वान का स्वागत करता है, जिसमें उन्होंने अंतहीन युद्ध से बाहर निकलकर युद्ध के अंत की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही थी। यह टिप्पणी विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता के दौरान आई, जो किसी भारतीय विदेश मंत्री की यूक्रेन की पहली समर्पित द्विपक्षीय यात्रा के रूप में दर्ज हुई।

ऐतिहासिक यात्रा और सिबिहा का बयान

सिबिहा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'कीव में अपने भारतीय सहयोगी एस. जयशंकर का स्वागत करते हुए सम्मानित महसूस कर रहा हूं — यह किसी भारतीय विदेश मंत्री की यूक्रेन की पहली समर्पित द्विपक्षीय यात्रा है।' उन्होंने इसे ऐसे समय में 'साहसिक यात्रा' बताया, जब रूसी हमले यूक्रेनी शहरों, बंदरगाह के बुनियादी ढाँचे और नागरिक जहाज़रानी को निशाना बना रहे हैं और राजधानी कीव लगातार हमलों की चपेट में है।

काला सागर और वैश्विक खाद्य सुरक्षा पर चर्चा

वार्ता के दौरान दोनों विदेश मंत्रियों ने काला सागर में नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने और वैश्विक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर विचार-विमर्श किया। सिबिहा ने स्पष्ट किया, 'भारत एक वैश्विक शक्ति है और हम प्रधानमंत्री मोदी के अंतहीन युद्ध से युद्ध के अंत की ओर बढ़ने के आह्वान का स्वागत करते हैं। यूक्रेन कूटनीति के लिए तैयार है।'

द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार

दोनों पक्षों ने बुनियादी ढाँचे, फार्मास्युटिकल क्षेत्र, तकनीकी नवाचार और डिजिटलीकरण में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। यूक्रेनी विदेश मंत्री ने बताया कि दोनों देश अपनी अगली अंतर-सरकारी आयोग की बैठक बुलाने पर काम करने के लिए सहमत हुए, ताकि द्विपक्षीय संभावनाओं को ठोस और पारस्परिक रूप से लाभकारी परियोजनाओं में बदला जा सके।

मोदी का पुतिन के साथ संवाद और भारत की स्थिति

गौरतलब है कि इससे कुछ दिन पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के इतर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बैठक की थी। उस बैठक में मोदी ने दोहराया कि भारत यूक्रेन में शांति हासिल करने के सभी प्रयासों का समर्थन करता है और मानवता की भलाई के लिए अंतहीन युद्ध से बाहर निकलना ज़रूरी है। पुतिन ने भी उस बैठक में संघर्ष के सभी पहलुओं पर मोदी को विस्तार से जानकारी दी थी।

आगे क्या होगा

जयशंकर की यह यात्रा भारत की उस कूटनीतिक रणनीति की अगली कड़ी है, जिसमें नई दिल्ली दोनों पक्षों — रूस और यूक्रेन — से संवाद बनाए रखते हुए शांति की दिशा में मध्यस्थ की भूमिका निभाने का प्रयास कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक समुदाय यूक्रेन संघर्ष के कूटनीतिक समाधान के लिए दबाव बढ़ा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित कूटनीतिक क्रम है। भारत एकमात्र बड़ी शक्ति है जो एक साथ मॉस्को और कीव दोनों से सक्रिय संवाद बनाए हुए है, और यूक्रेन का 'वैश्विक महाशक्ति' वाला बयान इसी रणनीतिक मूल्य की स्वीकृति है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि भारत की 'तटस्थता' व्यवहार में रूस से ऊर्जा आयात जारी रखने के साथ आती है, जो नैतिक संतुलन को जटिल बनाती है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या भारत महज मध्यस्थ की भूमिका से आगे बढ़कर किसी ठोस शांति प्रस्ताव का हिस्सा बन सकता है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर की यूक्रेन यात्रा क्यों ऐतिहासिक है?
यह किसी भारतीय विदेश मंत्री की यूक्रेन की पहली समर्पित द्विपक्षीय यात्रा है। इससे पहले भारत के किसी विदेश मंत्री ने यूक्रेन का स्वतंत्र दौरा नहीं किया था, जो इस यात्रा को कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाता है।
यूक्रेन ने भारत को 'वैश्विक महाशक्ति' क्यों कहा?
यूक्रेनी विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने भारत को 'वैश्विक शक्ति' बताते हुए PM मोदी के शांति आह्वान का स्वागत किया। यह बयान भारत की उस कूटनीतिक स्थिति को मान्यता देता है जिसमें वह रूस और यूक्रेन दोनों से संवाद बनाए हुए है।
PM मोदी ने युद्ध के अंत के बारे में क्या कहा था?
PM मोदी ने बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन के दौरान रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ बैठक में कहा था कि मानवता की भलाई के लिए अंतहीन युद्ध से युद्ध के अंत की ओर बढ़ना आवश्यक है। उन्होंने यूक्रेन में शांति के सभी प्रयासों के लिए भारत के समर्थन को भी दोहराया।
भारत और यूक्रेन के बीच किन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी?
दोनों देशों ने बुनियादी ढाँचे, फार्मास्युटिकल क्षेत्र, तकनीकी नवाचार और डिजिटलीकरण में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। साथ ही अंतर-सरकारी आयोग की अगली बैठक बुलाने पर भी काम शुरू करने का निर्णय लिया गया।
काला सागर नौवहन पर भारत-यूक्रेन वार्ता का क्या महत्व है?
काला सागर में नौवहन की स्वतंत्रता सीधे वैश्विक खाद्य सुरक्षा से जुड़ी है, क्योंकि यूक्रेन दुनिया के प्रमुख अनाज निर्यातकों में से एक है। रूसी हमलों के कारण बंदरगाह बुनियादी ढाँचे को नुकसान पहुँचने से वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो रही है, जिसमें भारत जैसे देशों का हित भी जुड़ा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 घंटे पहले
  2. 5 घंटे पहले
  3. 7 घंटे पहले
  4. कल
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले