जयशंकर-सिबिहा फोन वार्ता: काला सागर हमलों और भारतीय नाविकों पर भारत की कड़ी निंदा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और यूक्रेन के कार्यवाहक विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा के बीच 30 जुलाई 2026 को फोन पर उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसमें काला सागर में नागरिक जहाजों और भारतीय नाविकों पर हुए हमलों की भारत ने स्पष्ट रूप से निंदा की। दोनों नेताओं ने यूक्रेन संघर्ष के वैश्विक आर्थिक प्रभावों — विशेषकर ऊर्जा, उर्वरक और खाद्य सुरक्षा पर पड़ रहे दबाव — पर गहन विचार-विमर्श किया।
वार्ता का मुख्य घटनाक्रम
सिबिहा ने वार्ता के बाद एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि यह 'अच्छी और सकारात्मक बातचीत' थी, जिसमें दोनों पक्षों ने हाल के अपने-अपने अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की जानकारी साझा की। उन्होंने जयशंकर को राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की हालिया वॉशिंगटन डीसी यात्रा के नतीजों से भी अवगत कराया।
सिबिहा ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि रूस की आक्रामकता के प्रभाव केवल यूक्रेन तक सीमित नहीं हैं। उनके अनुसार, काला सागर में नागरिक जहाजों पर हमले कर रूस समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता को कमज़ोर कर रहा है और वैश्विक खाद्य आपूर्ति को खतरे में डाल रहा है।
भारत का स्पष्ट रुख
जयशंकर ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि काला सागर में जहाजों और भारतीय नाविकों पर हुए हमलों पर चर्चा हुई और किसी भी पक्ष की ओर से ऐसे हमले 'पूरी तरह अस्वीकार्य' हैं। उन्होंने कहा कि भारत इनकी स्पष्ट निंदा करता है — यह कथन उल्लेखनीय है क्योंकि भारत आमतौर पर सीधे किसी एक पक्ष को दोषी ठहराने से बचता रहा है।
जयशंकर ने यह भी रेखांकित किया कि मौजूदा वैश्विक परिस्थिति 'काफी नाजुक' है, क्योंकि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में कई संघर्ष एक साथ चल रहे हैं। उनके अनुसार, इसका सबसे अधिक असर वैश्विक दक्षिण के देशों पर पड़ रहा है — ईंधन, उर्वरक और खाद्य सुरक्षा के मोर्चे पर।
शांति प्रयासों में भारत की भूमिका
सिबिहा ने वार्ता में यूक्रेन की एक व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई और भारत से शांति प्रक्रिया में 'सक्रिय भूमिका' निभाने का आग्रह किया। जयशंकर ने पुष्टि की कि भारत हमेशा से संबंधित पक्षों के बीच बातचीत और कूटनीतिक समाधान का समर्थक रहा है, और दोनों नेता इस विषय पर संपर्क में बने रहने पर सहमत हुए।
पोलैंड के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन
इसी दिन, यानी 30 जुलाई की तड़के, रूस के यूक्रेन पर बड़े मिसाइल हमले के दौरान पोलैंड के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन भी हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, पोलैंड के तारनावा कोलोनिया इलाके में सुबह करीब 4 बजे एक जोरदार धमाका सुना गया, जिससे घरों की खिड़कियाँ हिल गईं। पुलिस को एक खेत में लगभग 10 मीटर चौड़ा गड्ढा और अज्ञात वस्तु का मलबा मिला।
पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने एक्स पर पुष्टि की कि यह घटना पश्चिमी यूक्रेन पर रूस के बड़े मिसाइल हमले के दौरान हुई। उन्होंने रक्षा मंत्री और संबंधित एजेंसियों के साथ एक समन्वय बैठक बुलाई। यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने भी यूक्रेन और पोलैंड की सरकारों तथा सुरक्षा एजेंसियों के साथ एकजुटता व्यक्त की।
आगे की राह
यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब यूक्रेन युद्ध का भू-राजनीतिक दायरा लगातार बढ़ रहा है और नाटो सदस्य देशों की सीमाओं तक इसकी आँच पहुँचने लगी है। भारत की स्थिति — संवाद का समर्थन करते हुए किसी एक गुट में न जाना — आने वाले महीनों में और अधिक परखी जाएगी, खासकर जब वैश्विक दक्षिण के देश शांति वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका की माँग कर रहे हैं।