जयशंकर की वारसॉ में पोलैंड के राष्ट्रपति नवरोकी से मुलाकात, भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी पर मंथन
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 4 सितंबर 2026 को वारसॉ में पोलैंड के राष्ट्रपति कैरोल नवरोकी से भेंट की और भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी की प्रगति एवं भावी दिशा पर विस्तृत चर्चा की। यह बैठक जयशंकर की पोलैंड यात्रा के दौरान हुई, जो यूक्रेन दौरे के तुरंत बाद आयोजित की गई थी।
राष्ट्रपति नवरोकी से मुलाकात और प्रमुख मुद्दे
जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस बैठक की जानकारी साझा करते हुए लिखा, 'पोलैंड के राष्ट्रपति कैरोल नवरोकी से मिलकर खुशी हुई। हमारी बातचीत हमारी रणनीतिक साझेदारी की सकारात्मक दिशा पर केंद्रित रही। हमने यूक्रेन संघर्ष, मध्य पूर्व/पश्चिम एशिया, आईएमईसी और जी20 पर विचार साझा किए।'
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सक्रिय रूप से यूरोपीय देशों के साथ अपनी कूटनीतिक उपस्थिति मज़बूत कर रहा है और यूक्रेन युद्ध के समाधान में मध्यस्थ भूमिका की संभावनाएँ तलाश रहा है।
भारत-पोलैंड संसदीय समूह से संवाद
राष्ट्रपति से मुलाकात के अलावा जयशंकर ने किंगा गजेव्स्का के नेतृत्व वाले भारत-पोलैंड संसदीय समूह के सदस्यों से भी भेंट की। उन्होंने कहा, 'हमने आधुनिक भारत-पोलैंड संबंधों को आकार देने पर विचार साझा किए। ईयू के साथ हमारे संबंधों के व्यापक संदर्भ में इस और अन्य क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की। हमारे संसदीय मैत्री समूहों के बीच नियमित आदान-प्रदान की उम्मीद है।'
सिकोरस्की के साथ संयुक्त कार्य योजना की समीक्षा
इससे पहले जयशंकर ने पोलैंड के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की से मुलाकात कर संयुक्त कार्य योजना 2024-28 की प्रगति का आकलन किया। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, अंतरिक्ष, डिजिटल, एआई, सेमीकंडक्टर, रक्षा, शिक्षा, शिपिंग, खनन, ऊर्जा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और बहुपक्षीय सहयोग पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।
जयशंकर ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के संदर्भ में कहा, 'हम गहरे भारत-ईयू सहयोग के लिए पोलैंड के समर्थन को महत्व देते हैं। मुझे विश्वास है कि एफटीए के लागू होने से द्विपक्षीय सहयोग और भी मजबूत होगा।' उन्होंने आपूर्ति श्रृंखला की मज़बूती तथा भोजन, ईंधन और उर्वरक सुरक्षा जैसी वैश्विक चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श किया।
यूक्रेन युद्ध पर भारत का स्पष्ट संदेश
सिकोरस्की के साथ संयुक्त मीडिया संबोधन में जयशंकर ने यूक्रेन संघर्ष पर भारत का पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा, 'यूक्रेन युद्ध अब अपने पाँचवें साल में है। भारत का मानना है कि कभी न खत्म होने वाले युद्धों की जगह युद्ध को खत्म करने की कोशिश होनी चाहिए। ऐसे युद्धों में कोई नहीं जीतता। हर अतिरिक्त दिन का मतलब है और ज़्यादा मौतें, और ज़्यादा तबाही, शामिल पक्षों को और ज़्यादा नुकसान और बाकी दुनिया पर और ज़्यादा बोझ।'
गौरतलब है कि जयशंकर इस यात्रा से ठीक पहले कीव का दौरा कर चुके थे, जो भारत की संतुलित कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि बातचीत और कूटनीति ही संघर्ष समाप्ति का एकमात्र व्यावहारिक मार्ग है।
आगे की राह
वारसॉ यात्रा के दौरान जयशंकर ने भारत और पोलैंड के बीच संसदीय, कूटनीतिक और व्यापारिक — तीनों स्तरों पर संबंध प्रगाढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई। विशेषज्ञों के अनुसार, यूरोपीय संघ की अध्यक्षता में पोलैंड की बढ़ती भूमिका को देखते हुए यह यात्रा भारत-EU संबंधों के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत देती है।