5 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जयशंकर की वारसॉ में पोलैंड के राष्ट्रपति नवरोकी से मुलाकात, भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी पर मंथन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जयशंकर की वारसॉ में पोलैंड के राष्ट्रपति नवरोकी से मुलाकात, भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी पर मंथन

सारांश

विदेश मंत्री जयशंकर की वारसॉ यात्रा महज शिष्टाचार भेंट नहीं थी — कीव दौरे के ठीक बाद पोलैंड पहुँचकर उन्होंने यूक्रेन संघर्ष पर भारत का स्पष्ट संदेश दिया: अंतहीन युद्ध नहीं, बातचीत। साथ ही भारत-पोलैंड संयुक्त कार्य योजना 2024-28 और EU-FTA पर भी ठोस प्रगति की रूपरेखा तैयार की गई।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 4 सितंबर 2026 को वारसॉ में पोलैंड के राष्ट्रपति कैरोल नवरोकी से मुलाकात कर भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी की प्रगति पर चर्चा की।
जयशंकर ने किंगा गजेव्स्का के नेतृत्व वाले भारत-पोलैंड संसदीय समूह से भी भेंट कर संसदीय आदान-प्रदान बढ़ाने पर सहमति जताई।
उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की के साथ संयुक्त कार्य योजना 2024-28 की समीक्षा हुई; व्यापार, रक्षा, AI, सेमीकंडक्टर और ऊर्जा प्रमुख क्षेत्र रहे।
जयशंकर ने यूक्रेन युद्ध — जो अब पाँचवें साल में है — पर भारत का रुख दोहराया: 'अंतहीन युद्ध नहीं, बातचीत और कूटनीति।' भारत-EU FTA लागू होने पर द्विपक्षीय सहयोग और मज़बूत होने की उम्मीद जताई गई।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 4 सितंबर 2026 को वारसॉ में पोलैंड के राष्ट्रपति कैरोल नवरोकी से भेंट की और भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी की प्रगति एवं भावी दिशा पर विस्तृत चर्चा की। यह बैठक जयशंकर की पोलैंड यात्रा के दौरान हुई, जो यूक्रेन दौरे के तुरंत बाद आयोजित की गई थी।

राष्ट्रपति नवरोकी से मुलाकात और प्रमुख मुद्दे

जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस बैठक की जानकारी साझा करते हुए लिखा, 'पोलैंड के राष्ट्रपति कैरोल नवरोकी से मिलकर खुशी हुई। हमारी बातचीत हमारी रणनीतिक साझेदारी की सकारात्मक दिशा पर केंद्रित रही। हमने यूक्रेन संघर्ष, मध्य पूर्व/पश्चिम एशिया, आईएमईसी और जी20 पर विचार साझा किए।'

यह ऐसे समय में आया है जब भारत सक्रिय रूप से यूरोपीय देशों के साथ अपनी कूटनीतिक उपस्थिति मज़बूत कर रहा है और यूक्रेन युद्ध के समाधान में मध्यस्थ भूमिका की संभावनाएँ तलाश रहा है।

भारत-पोलैंड संसदीय समूह से संवाद

राष्ट्रपति से मुलाकात के अलावा जयशंकर ने किंगा गजेव्स्का के नेतृत्व वाले भारत-पोलैंड संसदीय समूह के सदस्यों से भी भेंट की। उन्होंने कहा, 'हमने आधुनिक भारत-पोलैंड संबंधों को आकार देने पर विचार साझा किए। ईयू के साथ हमारे संबंधों के व्यापक संदर्भ में इस और अन्य क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की। हमारे संसदीय मैत्री समूहों के बीच नियमित आदान-प्रदान की उम्मीद है।'

सिकोरस्की के साथ संयुक्त कार्य योजना की समीक्षा

इससे पहले जयशंकर ने पोलैंड के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की से मुलाकात कर संयुक्त कार्य योजना 2024-28 की प्रगति का आकलन किया। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, अंतरिक्ष, डिजिटल, एआई, सेमीकंडक्टर, रक्षा, शिक्षा, शिपिंग, खनन, ऊर्जा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और बहुपक्षीय सहयोग पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।

जयशंकर ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के संदर्भ में कहा, 'हम गहरे भारत-ईयू सहयोग के लिए पोलैंड के समर्थन को महत्व देते हैं। मुझे विश्वास है कि एफटीए के लागू होने से द्विपक्षीय सहयोग और भी मजबूत होगा।' उन्होंने आपूर्ति श्रृंखला की मज़बूती तथा भोजन, ईंधन और उर्वरक सुरक्षा जैसी वैश्विक चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श किया।

यूक्रेन युद्ध पर भारत का स्पष्ट संदेश

सिकोरस्की के साथ संयुक्त मीडिया संबोधन में जयशंकर ने यूक्रेन संघर्ष पर भारत का पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा, 'यूक्रेन युद्ध अब अपने पाँचवें साल में है। भारत का मानना है कि कभी न खत्म होने वाले युद्धों की जगह युद्ध को खत्म करने की कोशिश होनी चाहिए। ऐसे युद्धों में कोई नहीं जीतता। हर अतिरिक्त दिन का मतलब है और ज़्यादा मौतें, और ज़्यादा तबाही, शामिल पक्षों को और ज़्यादा नुकसान और बाकी दुनिया पर और ज़्यादा बोझ।'

गौरतलब है कि जयशंकर इस यात्रा से ठीक पहले कीव का दौरा कर चुके थे, जो भारत की संतुलित कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि बातचीत और कूटनीति ही संघर्ष समाप्ति का एकमात्र व्यावहारिक मार्ग है।

आगे की राह

वारसॉ यात्रा के दौरान जयशंकर ने भारत और पोलैंड के बीच संसदीय, कूटनीतिक और व्यापारिक — तीनों स्तरों पर संबंध प्रगाढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई। विशेषज्ञों के अनुसार, यूरोपीय संघ की अध्यक्षता में पोलैंड की बढ़ती भूमिका को देखते हुए यह यात्रा भारत-EU संबंधों के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न तो पश्चिमी गुट का हिस्सा है और न ही रूस का। पोलैंड की EU अध्यक्षता के संदर्भ में यह यात्रा भारत-EU FTA वार्ता को भी गति दे सकती है — एक समझौता जो वर्षों से अटका हुआ है। हालाँकि, 'बातचीत और कूटनीति' के आह्वान को ज़मीन पर उतारने के लिए भारत को ठोस प्रस्ताव लाने होंगे, अन्यथा यह सदिच्छा तक सीमित रहेगी।
RashtraPress
5 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विदेश मंत्री जयशंकर की पोलैंड यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या था?
जयशंकर की वारसॉ यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करना और संयुक्त कार्य योजना 2024-28 की प्रगति की समीक्षा करना था। इसके अलावा यूक्रेन संघर्ष, मध्य पूर्व और भारत-EU FTA पर भी विचार-विमर्श हुआ।
जयशंकर ने यूक्रेन युद्ध पर क्या कहा?
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत अंतहीन युद्ध के बजाय संघर्ष की समाप्ति का पक्षधर है। उन्होंने कहा कि हर अतिरिक्त दिन का अर्थ है अधिक मौतें, अधिक तबाही और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बढ़ता बोझ — इसलिए बातचीत और कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है।
भारत-पोलैंड संयुक्त कार्य योजना 2024-28 में कौन-से क्षेत्र शामिल हैं?
संयुक्त कार्य योजना 2024-28 में व्यापार, निवेश, अंतरिक्ष, डिजिटल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, रक्षा, शिक्षा, शिपिंग, खनन, ऊर्जा, सांस्कृतिक सहयोग और बहुपक्षीय सहयोग शामिल हैं। दोनों देशों ने इन क्षेत्रों में प्रगति की समीक्षा की।
भारत-पोलैंड संसदीय समूह की बैठक में क्या हुआ?
जयशंकर ने किंगा गजेव्स्का के नेतृत्व वाले भारत-पोलैंड संसदीय समूह से मुलाकात कर आधुनिक द्विपक्षीय संबंधों को आकार देने पर विचार साझा किए। दोनों पक्षों ने EU के साथ भारत के संबंधों के व्यापक संदर्भ में क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की और संसदीय मैत्री समूहों के बीच नियमित आदान-प्रदान की प्रतिबद्धता जताई।
भारत-EU FTA का पोलैंड यात्रा से क्या संबंध है?
जयशंकर ने सिकोरस्की के साथ बातचीत में भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके लागू होने से भारत-पोलैंड द्विपक्षीय सहयोग और मज़बूत होगा। पोलैंड की EU में बढ़ती भूमिका को देखते हुए उसका समर्थन इस समझौते की गति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 घंटे पहले
  2. 3 घंटे पहले
  3. कल
  4. 2 दिन पहले
  5. 2 दिन पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 1 साल पहले