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जयशंकर की कीव यात्रा: जेलेंस्की बोले — 'अन्यायपूर्ण युद्ध' खत्म करने की भारत की इच्छा पर यूक्रेन आभारी

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जयशंकर की कीव यात्रा: जेलेंस्की बोले — 'अन्यायपूर्ण युद्ध' खत्म करने की भारत की इच्छा पर यूक्रेन आभारी

सारांश

विदेश मंत्री जयशंकर की कीव यात्रा महज शिष्टाचार नहीं थी — जेलेंस्की ने सार्वजनिक रूप से भारत को 'अन्यायपूर्ण युद्ध' खत्म करने का इच्छुक देश बताया। ड्रोन हमलों के बीच हुई यह बैठक भारत की शांति-दूत भूमिका को नई वैधता देती है।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 3 सितंबर को कीव में राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात की।
जेलेंस्की ने एक्स पर कहा कि यूक्रेन 'अन्यायपूर्ण युद्ध' समाप्त करने की भारत की इच्छा के लिए आभारी है।
बैठक के दौरान रूस ने ईरानी सहायता से बने 'शाहेद' ड्रोन दागे; यूक्रेनी लड़ाकू विमानों ने प्रतिनिधिमंडल को सुरक्षित रखा।
जयशंकर और यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा साइप्रस, फ्रांस, म्यूनिख, कनाडा और नई दिल्ली में पहले भी मिल चुके हैं।
प्रधानमंत्री मोदी और जेलेंस्की की सबसे ताज़ा मुलाकात जून 2026 में फ्रांस के एवियन में जी-7 के इतर हुई थी।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 3 सितंबर को कीव में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से मुलाकात की और 2022 से जारी रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के उपायों पर विस्तृत चर्चा की। यह यात्रा भारत-यूक्रेन द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने और युद्धग्रस्त क्षेत्र में शांति की संभावनाएँ तलाशने के उद्देश्य से आयोजित की गई।

मुख्य घटनाक्रम

राष्ट्रपति जेलेंस्की ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ बैठक की। हमने महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। हम इस अन्यायपूर्ण युद्ध — यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध — को समाप्त करने की भारत की इच्छा के लिए आभारी हैं। यह निश्चित रूप से युद्ध का समय नहीं होना चाहिए। शांति की आवश्यकता है। यह भारत की स्पष्ट स्थिति है।'

विदेश मंत्री जयशंकर ने भी एक्स पर पोस्ट कर बताया, 'आज राष्ट्रपति जेलेंस्की से मिलकर खुशी हुई। उन्हें विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के साथ द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने पर हुई चर्चा से अवगत कराया। हमारी बातचीत का केंद्र चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के उपायों पर रहा।'

ड्रोन हमले की पृष्ठभूमि में बैठक

जेलेंस्की ने बताया कि जिस दिन भारतीय प्रतिनिधिमंडल कीव में था, उसी दिन रूस ने एक बार फिर जेट-संचालित 'शाहेद' ड्रोन दागे — जिन्हें उन्होंने ईरानी सहायता से निर्मित बताया। उन्होंने कहा कि यूक्रेनी लड़ाकू विमानों की सतर्कता के कारण प्रतिनिधिमंडल सुरक्षित रहा। जेलेंस्की ने अपील की, 'हमें उम्मीद है कि दुनिया के अन्य मजबूत देश भी स्पष्ट रुख अपनाएंगे कि इस युद्ध को समाप्त करने और एक विश्वसनीय शांति की आवश्यकता है।'

जयशंकर का संबोधन और राजनयिक संदर्भ

जयशंकर ने बैठक में कहा, 'यह यात्रा 2022 से चल रहे युद्ध के व्यापक संदर्भ में हो रही है।' उन्होंने रेखांकित किया कि वे और यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा नियमित संपर्क में हैं — मई में साइप्रस, मार्च में फ्रांस, फरवरी में म्यूनिख और पिछले वर्ष कनाडा तथा नई दिल्ली में भी मुलाकातें हो चुकी हैं।

गौरतलब है कि राष्ट्रपति जेलेंस्की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई अवसरों पर मिल चुके हैं — सबसे ताज़ा मुलाकात जून 2026 में फ्रांस के एवियन में जी-7 शिखर सम्मेलन के इतर हुई थी, जिसमें जयशंकर भी उपस्थित थे।

भारत की भूमिका और व्यापक संदर्भ

यह यात्रा ऐसे समय में आई है जब भारत रूस और यूक्रेन दोनों के साथ सक्रिय कूटनीतिक संपर्क बनाए हुए है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में रूसी कार्रवाई की सीधी निंदा से परहेज किया है, लेकिन बार-बार संवाद और कूटनीति के ज़रिये शांति की पैरवी की है। आलोचकों का कहना है कि भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति उसे मध्यस्थ की भूमिका में रखती है, जबकि पश्चिमी देश अधिक स्पष्ट पक्षधरता की अपेक्षा करते हैं।

आगे क्या

इस यात्रा से भारत-यूक्रेन संबंधों में नई गर्मजोशी के संकेत मिले हैं। यूक्रेन की ओर से भारत को शांति प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार के रूप में देखने की इच्छा स्पष्ट है। आने वाले हफ्तों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग के नए ढाँचे पर बातचीत आगे बढ़ने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो यूक्रेन के लिए एक सूक्ष्म लेकिन अर्थपूर्ण अंतर है। हालाँकि, भारत ने अब तक रूसी आक्रमण की सीधी निंदा से परहेज किया है, और यही विरोधाभास पश्चिमी राजधानियों में असहजता का कारण बना हुआ है। मुख्यधारा की कवरेज बैठक के प्रतीकात्मक पहलू पर केंद्रित रही, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' शांति प्रक्रिया में ठोस मध्यस्थता में तब्दील हो सकती है — या यह केवल कूटनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने तक सीमित रहेगी।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर की कीव यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या था?
विदेश मंत्री जयशंकर की कीव यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत-यूक्रेन द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना और 2022 से जारी रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के उपायों पर चर्चा करना था। उन्होंने राष्ट्रपति जेलेंस्की और विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा दोनों से बातचीत की।
जेलेंस्की ने भारत के बारे में क्या कहा?
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने एक्स पर लिखा कि यूक्रेन 'अन्यायपूर्ण युद्ध' — रूस के यूक्रेन के खिलाफ युद्ध — को समाप्त करने की भारत की इच्छा के लिए आभारी है। उन्होंने कहा कि 'यह निश्चित रूप से युद्ध का समय नहीं होना चाहिए' और भारत की इस स्पष्ट स्थिति की सराहना की।
बैठक के दौरान ड्रोन हमले की क्या स्थिति थी?
जेलेंस्की के अनुसार, जिस दिन भारतीय प्रतिनिधिमंडल कीव में था, रूस ने ईरानी सहायता से बने 'शाहेद' जेट-संचालित ड्रोन दागे। यूक्रेनी लड़ाकू विमानों ने अधिकांश ड्रोन को मार गिराया और प्रतिनिधिमंडल सुरक्षित रहा।
भारत और यूक्रेन के बीच पहले कब-कब राजनयिक संपर्क हुए हैं?
जयशंकर और यूक्रेनी विदेश मंत्री सिबिहा मई में साइप्रस, मार्च में फ्रांस, फरवरी में म्यूनिख और पिछले वर्ष कनाडा तथा नई दिल्ली में मिल चुके हैं। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति जेलेंस्की की सबसे हालिया मुलाकात जून 2026 में फ्रांस के एवियन में जी-7 के दौरान हुई थी।
रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत का रुख क्या है?
भारत ने संवाद और कूटनीति के ज़रिये शांति की लगातार पैरवी की है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में रूसी कार्रवाई की सीधी निंदा से परहेज करते हुए 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति अपनाई है, जो उसे दोनों पक्षों के साथ संपर्क बनाए रखने की स्थिति में रखती है।
राष्ट्र प्रेस
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