3 सितंबर 2026
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झारखंड में 'महिला किसान खुशहाली योजना' का मसौदा तैयार, 32 लाख महिलाओं को मिलेगा बेहतर बाज़ार

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झारखंड में 'महिला किसान खुशहाली योजना' का मसौदा तैयार, 32 लाख महिलाओं को मिलेगा बेहतर बाज़ार

सारांश

झारखंड सरकार की 'महिला किसान खुशहाली योजना' सिर्फ एक कृषि योजना नहीं — यह राज्य की 32 लाख महिलाओं को खेत से बाज़ार तक की पूरी श्रृंखला में भागीदार बनाने की कोशिश है। IFS मॉडल और वैल्यू एडिशन के ज़रिए आय के कई स्रोत विकसित करने का यह प्रयास अभी मसौदे के चरण में है।

मुख्य बातें

झारखंड में 'महिला किसान खुशहाली योजना' का मसौदा तैयार; 3 सितंबर को रांची में राज्यस्तरीय स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन आयोजित।
योजना का फोकस महिला किसानों की क्षमता विकास, वैल्यू एडिशन और बेहतर बाज़ार उपलब्ध कराने पर।
JSLPS के अनुसार, राज्य में 3.2 लाख स्वयं सहायता समूहों से लगभग 32 लाख महिलाएँ जुड़ी हैं।
एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS) मॉडल के तहत फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, बागवानी, मुर्गी पालन और मछली पालन को जोड़ने की योजना।
कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा — कंसल्टेशन को औपचारिकता नहीं, ज़मीनी सुझावों को प्राथमिकता दी जाए।
कंसल्टेशन में मिले सुझावों को योजना के अंतिम स्वरूप में शामिल किया जाएगा।

झारखंड सरकार राज्य की महिला किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें कृषि बाज़ार से सीधे जोड़ने के लिए 'महिला किसान खुशहाली योजना' तैयार कर रही है। 3 सितंबर को रांची के होटल रेडिसन ब्लू में आयोजित राज्यस्तरीय स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन में योजना के मसौदे पर विस्तृत चर्चा हुई और महिला किसानों व विशेषज्ञों से सुझाव लिए गए। कृषि विभाग के अनुसार, इस योजना का मूल उद्देश्य महिलाओं की भूमिका को केवल खेती तक सीमित न रखकर उन्हें उत्पादन, निर्णय, मूल्य संवर्धन और बाज़ार — पूरी श्रृंखला से जोड़ना है।

योजना की मुख्य विशेषताएँ

योजना के तहत महिला किसानों की कृषि क्षमता विकास, खेती से जुड़े निर्णयों में भागीदारी, उत्पादों का वैल्यू एडिशन और बेहतर बाज़ार उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके साथ ही एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS) मॉडल के अंतर्गत फसल उत्पादन के साथ-साथ पशुपालन, बागवानी, मुर्गी पालन और मछली पालन जैसी गतिविधियों को जोड़कर किसानों के लिए आय के कई स्रोत विकसित करने पर विचार किया जा रहा है। इससे खेती में जोखिम कम होने और साल भर आय के अवसर बढ़ने की संभावना है।

32 लाख महिलाएँ, 3.2 लाख स्वयं सहायता समूह

झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के अनुसार, राज्य में करीब 3.2 लाख स्वयं सहायता समूहों से लगभग 32 लाख महिलाएँ जुड़ी हैं, जो विभिन्न आजीविका गतिविधियों के ज़रिए अपनी आय बढ़ा रही हैं। कंसल्टेशन में कृषि विभाग की नई योजना को इन समूहों की गतिविधियों के साथ समन्वित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में कृषि क्षेत्र में महिलाओं की श्रम भागीदारी राष्ट्रीय औसत से अधिक होने के बावजूद उनकी निर्णय-प्रक्रिया में हिस्सेदारी सीमित रही है।

स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन की प्रक्रिया

कार्यक्रम में राज्यभर से महिला किसान, कृषि क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं के प्रतिनिधि, किसान उत्पादक संगठन (FPO), बैंकिंग संस्थान, कृषि वैज्ञानिक और विभागीय अधिकारी शामिल हुए। योजना के कॉन्सेप्ट और मसौदे का प्रेजेंटेशन दिया गया, इसके बाद उद्देश्यों, दायरे और IFS मॉडल पर खुली चर्चा हुई। प्राप्त सुझावों को योजना के अंतिम स्वरूप में शामिल करने की तैयारी है।

मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति

कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कार्यक्रम में कहा कि स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन को महज़ औपचारिकता नहीं माना जाना चाहिए और योजना को ज़मीनी ज़रूरतों के अनुरूप बनाने के लिए महिला किसानों व विशेषज्ञों के सुझावों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कार्यक्रम में कृषि निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज, उद्यान निदेशक प्रवीण केरकेट्टा, मृदा संरक्षण निदेशक विकास कुमार, JSLPS के CEO अनन्य मित्तल और पशुपालन निदेशक रोबिन टोप्पो के अलावा NABARD, लीड बैंक, ICAR, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विज्ञान केंद्र के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

आगे की राह

गौरतलब है कि यह योजना अभी मसौदे के चरण में है और कंसल्टेशन में मिले सुझावों के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो राज्य की लाखों महिला किसानों को संगठित बाज़ार, तकनीकी प्रशिक्षण और आय के विविध स्रोतों तक पहुँच मिल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — राज्य में इससे पहले भी कृषि-केंद्रित योजनाएँ घोषित हुई हैं जो ज़मीन पर उतनी प्रभावी नहीं रहीं। 32 लाख महिलाओं तक पहुँच का दावा JSLPS के नेटवर्क पर टिका है, लेकिन क्या इस नेटवर्क को बाज़ार-लिंकेज और वैल्यू चेन से जोड़ने की ठोस व्यवस्था होगी — यह अभी स्पष्ट नहीं है। IFS मॉडल की सफलता के लिए बहु-विभागीय समन्वय अनिवार्य है, जो झारखंड जैसे राज्य में ऐतिहासिक रूप से चुनौतीपूर्ण रहा है। बिना सत्यापन-योग्य आय-वृद्धि के लक्ष्यों और स्वतंत्र निगरानी तंत्र के, यह योजना महिला सशक्तिकरण की लंबी सूची में एक और नाम बनकर रह सकती है।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला किसान खुशहाली योजना क्या है?
यह झारखंड सरकार की प्रस्तावित योजना है जिसका उद्देश्य महिला किसानों को कृषि उत्पादन, निर्णय-प्रक्रिया, वैल्यू एडिशन और बाज़ार — पूरी श्रृंखला से जोड़ना है। योजना अभी मसौदे के चरण में है और स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।
इस योजना से झारखंड की कितनी महिलाएँ लाभान्वित हो सकती हैं?
JSLPS के अनुसार, राज्य में 3.2 लाख स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी लगभग 32 लाख महिलाएँ इस योजना की संभावित लाभार्थी हो सकती हैं। इन महिलाओं को कृषि विभाग की नई योजना के साथ जोड़ने पर कंसल्टेशन में विचार-विमर्श हुआ।
एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS) मॉडल क्या है और इसे इस योजना में क्यों शामिल किया गया?
IFS मॉडल में फसल उत्पादन के साथ-साथ पशुपालन, बागवानी, मुर्गी पालन और मछली पालन जैसी गतिविधियाँ एक साथ संचालित की जाती हैं। इसे योजना में इसलिए शामिल किया गया है ताकि महिला किसानों के लिए आय के कई स्रोत विकसित हों और खेती में जोखिम कम हो।
स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन में कौन-कौन शामिल हुए?
3 सितंबर को रांची में हुए कंसल्टेशन में महिला किसान, FPO प्रतिनिधि, बैंकिंग संस्थान, कृषि वैज्ञानिक, NABARD, ICAR, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय और विभागीय अधिकारी शामिल हुए। कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की भी कार्यक्रम में उपस्थित रहीं।
यह योजना कब तक लागू होगी?
योजना अभी अंतिम रूप लेने की प्रक्रिया में है। कंसल्टेशन में प्राप्त सुझावों को मसौदे में शामिल करने के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा, लेकिन लागू होने की कोई निश्चित तिथि अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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