झारखंड में 'महिला किसान खुशहाली योजना' का मसौदा तैयार, 32 लाख महिलाओं को मिलेगा बेहतर बाज़ार
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड सरकार राज्य की महिला किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें कृषि बाज़ार से सीधे जोड़ने के लिए 'महिला किसान खुशहाली योजना' तैयार कर रही है। 3 सितंबर को रांची के होटल रेडिसन ब्लू में आयोजित राज्यस्तरीय स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन में योजना के मसौदे पर विस्तृत चर्चा हुई और महिला किसानों व विशेषज्ञों से सुझाव लिए गए। कृषि विभाग के अनुसार, इस योजना का मूल उद्देश्य महिलाओं की भूमिका को केवल खेती तक सीमित न रखकर उन्हें उत्पादन, निर्णय, मूल्य संवर्धन और बाज़ार — पूरी श्रृंखला से जोड़ना है।
योजना की मुख्य विशेषताएँ
योजना के तहत महिला किसानों की कृषि क्षमता विकास, खेती से जुड़े निर्णयों में भागीदारी, उत्पादों का वैल्यू एडिशन और बेहतर बाज़ार उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके साथ ही एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS) मॉडल के अंतर्गत फसल उत्पादन के साथ-साथ पशुपालन, बागवानी, मुर्गी पालन और मछली पालन जैसी गतिविधियों को जोड़कर किसानों के लिए आय के कई स्रोत विकसित करने पर विचार किया जा रहा है। इससे खेती में जोखिम कम होने और साल भर आय के अवसर बढ़ने की संभावना है।
32 लाख महिलाएँ, 3.2 लाख स्वयं सहायता समूह
झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के अनुसार, राज्य में करीब 3.2 लाख स्वयं सहायता समूहों से लगभग 32 लाख महिलाएँ जुड़ी हैं, जो विभिन्न आजीविका गतिविधियों के ज़रिए अपनी आय बढ़ा रही हैं। कंसल्टेशन में कृषि विभाग की नई योजना को इन समूहों की गतिविधियों के साथ समन्वित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में कृषि क्षेत्र में महिलाओं की श्रम भागीदारी राष्ट्रीय औसत से अधिक होने के बावजूद उनकी निर्णय-प्रक्रिया में हिस्सेदारी सीमित रही है।
स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन की प्रक्रिया
कार्यक्रम में राज्यभर से महिला किसान, कृषि क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं के प्रतिनिधि, किसान उत्पादक संगठन (FPO), बैंकिंग संस्थान, कृषि वैज्ञानिक और विभागीय अधिकारी शामिल हुए। योजना के कॉन्सेप्ट और मसौदे का प्रेजेंटेशन दिया गया, इसके बाद उद्देश्यों, दायरे और IFS मॉडल पर खुली चर्चा हुई। प्राप्त सुझावों को योजना के अंतिम स्वरूप में शामिल करने की तैयारी है।
मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति
कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कार्यक्रम में कहा कि स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन को महज़ औपचारिकता नहीं माना जाना चाहिए और योजना को ज़मीनी ज़रूरतों के अनुरूप बनाने के लिए महिला किसानों व विशेषज्ञों के सुझावों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कार्यक्रम में कृषि निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज, उद्यान निदेशक प्रवीण केरकेट्टा, मृदा संरक्षण निदेशक विकास कुमार, JSLPS के CEO अनन्य मित्तल और पशुपालन निदेशक रोबिन टोप्पो के अलावा NABARD, लीड बैंक, ICAR, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विज्ञान केंद्र के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह योजना अभी मसौदे के चरण में है और कंसल्टेशन में मिले सुझावों के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो राज्य की लाखों महिला किसानों को संगठित बाज़ार, तकनीकी प्रशिक्षण और आय के विविध स्रोतों तक पहुँच मिल सकती है।