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झारखंड में 5,000 नए सखी मंडल: 60 हजार परिवारों को जोड़ने और ₹5,000 करोड़ ऋण का लक्ष्य

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झारखंड में 5,000 नए सखी मंडल: 60 हजार परिवारों को जोड़ने और ₹5,000 करोड़ ऋण का लक्ष्य

सारांश

झारखंड सरकार ने 5,000 नए सखी मंडल बनाने, 60 हजार परिवारों को जोड़ने और SHG को ₹5,000 करोड़ बैंक ऋण दिलाने का लक्ष्य तय किया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोलर पावर, जूट और हनी उत्पादन जैसे नए क्षेत्रों में महिलाओं को प्रशिक्षित करने और पलाश मार्ट का विस्तार करने के निर्देश दिए।

मुख्य बातें

झारखंड सरकार 5,000 नए सखी मंडल बनाएगी, जिनसे करीब 60 हजार परिवार जुड़ेंगे।
स्वयं सहायता समूहों को बैंकों से ₹5,000 करोड़ का ऋण उपलब्ध कराने की योजना है।
ढाई लाख नई महिलाओं को विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जाएगा।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 27 मई को रांची में समीक्षा बैठक में अधिकारियों को समय-सीमा में लक्ष्य पूरे करने के निर्देश दिए।
सोलर पावर उत्पादन , जूट प्रोसेसिंग और हनी उत्पादन में महिलाओं को प्रशिक्षण और अवसर दिए जाएंगे।
पलाश मार्ट जैसे बिक्री केंद्रों का विस्तार अन्य राज्यों और पर्यटन स्थलों तक किया जाएगा।

झारखंड सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार और आजीविका से जोड़ने के लिए 5,000 नए सखी मंडलों के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिनके माध्यम से करीब 60 हजार परिवारों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा स्वयं सहायता समूहों (SHG) को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए बैंकों से ₹5,000 करोड़ का ऋण उपलब्ध कराने की योजना भी तैयार की गई है। 27 मई को रांची स्थित झारखंड मंत्रालय में हुई ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यह निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री के निर्देश और योजना की रूपरेखा

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इन लक्ष्यों को एक निर्धारित समय-सीमा के भीतर धरातल पर उतारा जाए। उन्होंने कहा कि महिला स्वयं सहायता समूह ग्रामीण विकास की मजबूत कड़ी बन सकते हैं। सोरेन ने यह भी जोर दिया कि समूहों से जुड़ी महिलाओं को केवल पारंपरिक गतिविधियों तक सीमित न रखकर आधुनिक और अधिक आय देने वाले कार्यों से जोड़ा जाए।

नए क्षेत्रों में प्रशिक्षण और अवसर

मुख्यमंत्री ने सोलर पावर उत्पादन, जूट प्रोसेसिंग और हनी उत्पादन जैसे उभरते क्षेत्रों में महिलाओं को प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि राज्य में ढाई लाख नई महिलाओं को विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़ने की भी योजना है। इस पूरे अभियान को झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के माध्यम से संचालित किया जाएगा।

उत्पादों की मार्केटिंग और बिक्री केंद्रों का विस्तार

महिलाओं की आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम पहलू उनके उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों की मार्केटिंग के लिए ठोस कार्ययोजना बनाई जाए और पलाश मार्ट जैसे बिक्री केंद्रों का विस्तार किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी ऐसे बिक्री केंद्र स्थापित करने की पहल होनी चाहिए।

बैंकिंग और तकनीकी जुड़ाव पर जोर

बैठक में समूहों की महिलाओं को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने, आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण देने और क्लस्टर स्तर पर नियमित बैठकें आयोजित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य कार्यक्रम, बिरसा विशिष्ट जनजातीय विकास योजना, युवा कौशल योजना और वाटरशेड योजनाओं की विस्तृत समीक्षा भी की। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए कई मोर्चों पर काम कर रही है।

आगे की राह

गौरतलब है कि झारखंड में पहले से सक्रिय स्वयं सहायता समूहों के नेटवर्क को इस नई पहल से और विस्तार मिलेगा। JSLPS के माध्यम से चलाए जाने वाले इस अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ऋण वितरण, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्धता — तीनों स्तंभ एक साथ कितनी तेजी से खड़े किए जाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की गति में होगी — राज्य में पहले से चल रहे SHG कार्यक्रमों में ऋण वितरण और बाजार उपलब्धता के बीच की खाई एक पुरानी चुनौती रही है। ₹5,000 करोड़ के बैंक ऋण का लक्ष्य तब तक कागजी रहेगा जब तक JSLPS समूहों की क्रेडिट-रेडीनेस और बैंक-लिंकेज दर में ठोस सुधार न हो। पलाश मार्ट का विस्तार सही दिशा में कदम है, लेकिन अन्य राज्यों में बिक्री केंद्र खोलने की योजना के लिए आपूर्ति श्रृंखला और गुणवत्ता नियंत्रण का ढाँचा पहले खड़ा करना होगा।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड के नए सखी मंडल योजना में क्या है?
झारखंड सरकार राज्य में 5,000 नए सखी मंडल (महिला स्वयं सहायता समूह) बनाएगी, जिनसे करीब 60 हजार परिवारों को जोड़ने और बैंकों से ₹5,000 करोड़ का ऋण दिलाने का लक्ष्य है। यह अभियान JSLPS के माध्यम से चलाया जाएगा।
हेमंत सोरेन ने महिलाओं के लिए कौन-से नए क्षेत्र चिह्नित किए हैं?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोलर पावर उत्पादन, जूट प्रोसेसिंग और हनी उत्पादन जैसे क्षेत्रों में महिलाओं को प्रशिक्षण और अवसर देने पर जोर दिया है। उनका उद्देश्य महिलाओं को पारंपरिक कार्यों से आगे आधुनिक और अधिक आय देने वाली गतिविधियों से जोड़ना है।
पलाश मार्ट का विस्तार कहाँ-कहाँ होगा?
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि पलाश मार्ट जैसे SHG उत्पाद बिक्री केंद्रों का विस्तार झारखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी किया जाए। इसका उद्देश्य महिला समूहों के उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराना है।
ढाई लाख नई महिलाओं को आजीविका से जोड़ने की योजना क्या है?
27 मई की समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि राज्य में ढाई लाख नई महिलाओं को विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जोड़ा जाएगा। इसके लिए JSLPS के माध्यम से अभियान चलाया जाएगा और महिलाओं को बैंकिंग प्रणाली व आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा जाएगा।
इस योजना से कौन-से सरकारी कार्यक्रम जुड़े हैं?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना, दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य कार्यक्रम, बिरसा विशिष्ट जनजातीय विकास योजना, युवा कौशल योजना और वाटरशेड योजनाओं की समीक्षा की। ये सभी कार्यक्रम इस व्यापक ग्रामीण महिला सशक्तिकरण अभियान के अंग हैं।
राष्ट्र प्रेस
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