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क्या उत्तराखंड की महिलाएं राष्ट्रीय आजीविका मिशन से आत्मनिर्भर बन रही हैं?

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क्या उत्तराखंड की महिलाएं राष्ट्रीय आजीविका मिशन से आत्मनिर्भर बन रही हैं?

सारांश

उत्तराखंड के चमोली में, महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाएं केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। पीरूल, भोजपत्र और वैजयंती की राखी बनाकर वे आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं। जानिए इस कहानी के पीछे की सच्चाई।

मुख्य बातें

महिला सशक्तिकरण के लिए सरकारी योजनाएं महत्वपूर्ण हैं।
आर्थिक सुधार में स्वयं सहायता समूह की भूमिका अहम है।
पारंपरिक उत्पादों की बिक्री आत्मनिर्भरता का माध्यम बन रही है।
महिलाएं सामाजिक बदलाव की दिशा में अग्रसर हैं।
स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ रही है।

चमोली, 5 अगस्‍त (राष्ट्र प्रेस)। केंद्र सरकार की जनकल्‍याणकारी योजनाएं महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रही हैं। महिलाएं योजनाओं का लाभ उठाकर आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं। उत्तराखंड के चमोली की महिलाएं राष्ट्रीय आजीविका मिशन (ग्रामीण) के तहत आत्मनिर्भर बन रही हैं।

समूह की महिलाएं आकर्षक पीरूल, भोजपत्र और वैजयंती की राखी बनाकर हजारों की कमाई कर रही हैं।

वहीं, चमोली के मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक त्रिपाठी ने जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना के तहत जनपद की महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए 18 जगहों पर स्टाल लगाए गए हैं। इसके माध्यम से उनके द्वारा बनाए गए पीरूल, भोजपत्र और वैजयंती की बनी राखियां बेची जा रही हैं। इसके साथ ही उनके द्वारा पारंपरिक मिष्ठान अरसे और रोटने भी बेचे जा रहे हैं। जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा हो रहा है। इससे स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।

समूह की महिलाएं पारंपरिक मिठाइयां अरसे और रोटने के माध्यम से अच्छी कमाई कर रही हैं। महिलाओं का कहना है कि यह सरकार द्वारा संचालित योजनाएं उनके लिए वरदान साबित हुई हैं।

समूह की महिला सदस्‍य प्रतिभा तिवाड़ी ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत के दौरान कहा कि पीरूल और वैजयंती माला की राखियां बनाई हैं। इस राखी को बुनाई वाले धागे से बनाया गया है। बहुत सारी राखियों की बिक्री हो गई है। मैंने स्टाल पर पांच सौ राखियां रखी थीं, जिसमें 200 बिक गई हैं। इससे हम आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं।

समूह की महिला सदस्‍य संगीता बिष्ट ने बताया कि उन्‍होंने बहुत अच्‍छी-अच्‍छी राखियां बनाई हैं। वैजयंती माला से बनी राखी से मन शांत होता है। इन राखियों की मांग अन्य राज्‍यों में भी है। सुमन देवी ने बताया कि समूह ने पीरूल की राखी और पहाड़ी उत्‍पाद तैयार किया है। सरकार की इस योजना से हम आत्मनिर्भर हो रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह दर्शाती है कि कैसे सरकारी योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को सशक्त बना रही हैं। महिलाओं की यह पहल उनके आर्थिक स्थिति में सुधार लाने के साथ-साथ समाज में एक सकारात्मक बदलाव भी ला रही है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय आजीविका मिशन क्या है?
यह केंद्र सरकार की एक योजना है जो ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बनाई गई है।
चमोली की महिलाएं कौन से उत्पाद बना रही हैं?
वे पीरूल , भोजपत्र और वैजयंती की राखी बना रही हैं।
इन महिलाओं को कैसे लाभ हो रहा है?
उन्हें अपने बनाए उत्पादों की बिक्री से अच्छा मुनाफा हो रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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