उद्यम पोर्टल पर 8.9 करोड़ एमएसएमई पंजीकृत, 38 करोड़ से अधिक लोगों को मिल रहा रोजगार
सारांश
मुख्य बातें
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय ने 14 जुलाई 2026 को जानकारी दी कि उद्यम पंजीकरण पोर्टल और उद्यम सहायता प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत उद्यमों की कुल संख्या 8.9 करोड़ से अधिक हो गई है। इन उद्यमों में देशभर में 38 करोड़ से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है, जो भारत के औपचारिक रोजगार परिदृश्य में एक उल्लेखनीय विस्तार को दर्शाता है।
पंजीकरण प्रक्रिया और दोनों प्लेटफॉर्म की भूमिका
उद्यम पंजीकरण पोर्टल एक सरल, कागज रहित, स्व-घोषणा आधारित और निःशुल्क ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए एमएसएमई को आधिकारिक पहचान देता है। यह पोर्टल उद्यमों को सरकारी योजनाओं और वित्तीय सहायता तक सीधी पहुँच सुनिश्चित करता है।
वहीं, उद्यम सहायता प्लेटफॉर्म उन अनौपचारिक सूक्ष्म उद्यमों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ता है जिनके पास अभी तक जीएसटी पंजीकरण नहीं है या जो आयकर प्रणाली के दायरे में नहीं आते। इन उद्यमों को अधिकृत उद्यम सहायता साझेदारों द्वारा प्रस्तुत सत्यापित डेटा के माध्यम से सूक्ष्म उद्यम के रूप में मान्यता दी जाती है।
समावेशी विकास: किन्हें हो रहा सबसे अधिक फायदा
मंत्रालय के बयान के अनुसार, ये दोनों डिजिटल पहलें सरकारी सहायता को अधिक सुलभ और समावेशी बना रही हैं। इनसे विशेष रूप से महिला उद्यमियों, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों, ग्रामीण उद्यमों, पारंपरिक कारीगरों, पहली पीढ़ी के उद्यमियों और युवाओं द्वारा संचालित स्टार्टअप्स को सशक्त किया जा रहा है।
गौरतलब है कि भारत में एमएसएमई क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में करीब 30% का योगदान देता है और निर्यात में भी इसकी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। इस पृष्ठभूमि में पंजीकरण का यह विस्तार नीतिगत दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
विकसित भारत @2047 से जुड़ाव
मंत्रालय ने कहा कि ये डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित भारत @2047 की परिकल्पना में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाकर और एमएसएमई के औपचारिक आधार का विस्तार करके, ये प्लेटफॉर्म उद्यमशीलता की आकांक्षाओं को सफल उद्यमों में परिवर्तित करने में सहायक बन रहे हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार छोटे उद्यमों को वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं से जोड़ने और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। दोनों प्लेटफॉर्म मिलकर एक अधिक समावेशी पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रहे हैं, जिससे छोटे से छोटा उद्यम भी भारत की औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन सके।
आगे की राह
एमएसएमई क्षेत्र में पंजीकरण की यह गति बनाए रखना और पंजीकृत उद्यमों को वास्तविक ऋण, बाजार और प्रौद्योगिकी सहायता तक पहुँचाना अगली बड़ी चुनौती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पंजीकरण संख्या के साथ-साथ उद्यमों की उत्पादकता और टिकाऊपन के आँकड़े भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए।