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8.7 करोड़ एमएसएमई से GDP में 31% योगदान, 38 करोड़ लोगों की आजीविका: मंत्री शोभा करंदलाजे

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8.7 करोड़ एमएसएमई से GDP में 31% योगदान, 38 करोड़ लोगों की आजीविका: मंत्री शोभा करंदलाजे

सारांश

8.7 करोड़ एमएसएमई — GDP में 31%, निर्यात में 45% और 38 करोड़ लोगों की आजीविका। एमएसएमई दिवस 2026 पर पाँच नई डिजिटल पहलें लॉन्च हुईं और बैंक ऋण 2014 के ₹10 लाख करोड़ से बढ़कर ₹37 लाख करोड़ पहुँचा — यह क्षेत्र अब 'विकसित भारत 2047' की असली नींव बन रहा है।

मुख्य बातें

देश के 8.7 करोड़ एमएसएमई GDP में 31% , विनिर्माण में 35% और निर्यात में 45% योगदान दे रहे हैं।
यह क्षेत्र 38 करोड़ लोगों की आजीविका का प्रमुख आधार है।
एमएसएमई को बैंक ऋण 2014 के ₹10 लाख करोड़ से बढ़कर दिसंबर 2025 तक ₹37 लाख करोड़ हो गया।
एमएसएमई दिवस 2026 पर पीएमईजीपी 2.0 , एमएसएमई समाधान 2.0 , पीएमएस 2.0 , एमएसएमई ग्लोबल मार्ट 2.0 और टेस्टिंग सेंटर पोर्टल लॉन्च किए गए।
एमएसएमई पोर्टलों पर 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में सेवाएँ और एआई-आधारित वॉयस शिकायत निवारण प्रणाली शुरू हुई।

केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने 27 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 'एमएसएमई दिवस 2026' समारोह में कहा कि देश के 8.7 करोड़ एमएसएमई भारत की आर्थिक प्रगति की रीढ़ बन चुके हैं और 38 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका का आधार हैं। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 31%, विनिर्माण उत्पादन में 35% और निर्यात में लगभग 45% का योगदान दे रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

एमएसएमई दिवस 2026 के अवसर पर मंत्री करंदलाजे ने पाँच नई डिजिटल पहलों का शुभारंभ किया — पीएमईजीपी 2.0, एमएसएमई समाधान 2.0, पीएमएस 2.0, एमएसएमई ग्लोबल मार्ट 2.0 और टेस्टिंग सेंटर पोर्टल। इन पहलों के ज़रिये उद्यमियों को ऋण, बाज़ार पहुँच और गुणवत्ता परीक्षण सेवाएँ पहले से कहीं अधिक सुलभ होंगी।

इसके साथ ही मंत्रालय ने एमएसएमई पोर्टलों पर 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में सेवाएँ उपलब्ध कराने की बहुभाषी सुविधा भी शुरू की। इसमें एआई-आधारित वॉयस शिकायत निवारण प्रणाली और दस्तावेज़ अनुवाद की सुविधा भी शामिल है, जिससे देश के दूरदराज़ के उद्यमी भी अपनी मातृभाषा में सरकारी सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे।

बैंक ऋण में ऐतिहासिक वृद्धि

मंत्री करंदलाजे ने बताया कि वर्ष 2014 में एमएसएमई क्षेत्र को मिलने वाला बैंक ऋण ₹10 लाख करोड़ था, जो दिसंबर 2025 तक बढ़कर ₹37 लाख करोड़ हो गया है — यानी लगभग 3.7 गुना की वृद्धि। उन्होंने इसे सरकार की उद्यमियों को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि को घरेलू माँग और लघु उद्योगों से बल मिल रहा है। गौरतलब है कि एमएसएमई क्षेत्र कृषि के बाद देश में सर्वाधिक रोज़गार देने वाला क्षेत्र है।

मंत्रालय की रणनीति

एमएसएमई मंत्रालय के सचिव भरत खेड़ा ने कार्यक्रम में क्षेत्र की प्रगति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने मंत्रालय द्वारा संचालित प्रमुख योजनाओं की जानकारी देते हुए सभी हितधारकों की सराहना की। मंत्रालय का कहना है कि डिजिटल सहायता, कौशल विकास, नई तकनीक और विपणन सुविधाओं के ज़रिये उद्यमियों को एक संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र उपलब्ध कराया जा रहा है।

विकसित भारत 2047 से जुड़ाव

मंत्री करंदलाजे ने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास इंजन है और इन प्रयासों के ज़रिये सरकार 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रही है। उनके अनुसार, एमएसएमई केवल उद्योगों का समूह नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के सपनों को साकार करने और नए विचारों को कारोबार में बदलने का माध्यम है।

आने वाले समय में इन डिजिटल पहलों के क्रियान्वयन और बहुभाषी सेवाओं की व्यापकता यह तय करेगी कि एमएसएमई क्षेत्र वास्तव में समावेशी विकास का वाहक बन पाता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इस ऋण वृद्धि का कितना हिस्सा नए उद्यमों तक पहुँचा और कितना पुराने खातों के पुनर्गठन में समा गया। 38 करोड़ आजीविकाओं का दावा सत्यापन माँगता है — क्योंकि अनौपचारिक क्षेत्र में रोज़गार की गणना पद्धति अभी भी विवादित है। पाँच नई डिजिटल पहलें स्वागत योग्य हैं, परंतु पिछले 'संस्करण 1.0' पोर्टलों के उपयोग के आँकड़े सार्वजनिक नहीं हैं — बिना उस आधार रेखा के 'बेहतर पहुँच' का दावा अधूरा है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में एमएसएमई का GDP में कितना योगदान है?
केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे के अनुसार, देश के 8.7 करोड़ एमएसएमई GDP में 31%, विनिर्माण उत्पादन में 35% और निर्यात में लगभग 45% योगदान दे रहे हैं। यह क्षेत्र 38 करोड़ लोगों की आजीविका का भी प्रमुख आधार है।
एमएसएमई दिवस 2026 पर कौन-सी नई योजनाएँ लॉन्च हुईं?
27 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एमएसएमई दिवस समारोह में पीएमईजीपी 2.0, एमएसएमई समाधान 2.0, पीएमएस 2.0, एमएसएमई ग्लोबल मार्ट 2.0 और टेस्टिंग सेंटर पोर्टल लॉन्च किए गए। इन पहलों से उद्यमियों को ऋण, बाज़ार और गुणवत्ता सेवाओं तक आसान पहुँच मिलेगी।
एमएसएमई को बैंक ऋण में कितनी वृद्धि हुई है?
2014 में एमएसएमई क्षेत्र को मिलने वाला बैंक ऋण ₹10 लाख करोड़ था, जो दिसंबर 2025 तक बढ़कर ₹37 लाख करोड़ हो गया — यानी लगभग 3.7 गुना की वृद्धि। मंत्री करंदलाजे ने इसे सरकार की उद्यमियों को सशक्त बनाने की प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।
एमएसएमई पोर्टलों पर बहुभाषी सुविधा क्या है?
एमएसएमई मंत्रालय ने अपने प्रमुख पोर्टलों और वेबसाइटों पर 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में सेवाएँ उपलब्ध कराने की घोषणा की है। इसमें एआई-आधारित वॉयस शिकायत निवारण प्रणाली और दस्तावेज़ अनुवाद की सुविधा भी शामिल है, जिससे देश भर के उद्यमी अपनी मातृभाषा में सरकारी सेवाओं का लाभ ले सकेंगे।
एमएसएमई क्षेत्र 'विकसित भारत 2047' से कैसे जुड़ा है?
मंत्री शोभा करंदलाजे के अनुसार, एमएसएमई क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास इंजन है और सरकार इन पहलों के ज़रिये 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रही है। डिजिटल सहायता, कौशल विकास और बहुभाषी सेवाओं के माध्यम से एमएसएमई को समावेशी विकास का वाहक बनाना सरकार की रणनीति का केंद्रबिंदु है।
राष्ट्र प्रेस
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